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लोकसभा चुनाव 2019: दिल्ली चुनाव के बाद पंजाब में डेरा डालेगी सरकार, इस बार दो सीटें बचाना चुनौती
Tue, 07 May 2019 11:58 AM IST
खुशबू गोयल
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 07 May 2019 11:58 AM IST
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : फाइल फोटो
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दिल्ली में लोकसभा की सात सीटों पर चुनाव निपटने के बाद आम आदमी पार्टी की पूरी सरकार पंजाब में डेरा डालेगी। दिल्ली और हरियाणा में बारह मई को मतदान होने जा रहा है, तो 13 से आप नेता पंजाब की कमान संभालेंगे। जानकारी के मुताबिक पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम व पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया 13 मई को पंजाब पहुंच जाएंगे। उनके साथ ही पंजाब आने वाले अन्य नेताओं में सत्येंद्र जैन, गोपाल राय, राघव चड्ढा, आतिशी मरलेना, राखी बिड़लान भी शामिल हैं।
जरूरत पड़ने पर दिल्ली और हरियाणा से और नेताओं को भी बुलाया जा सकेगा। दिल्ली के बाद पंजाब में ही आप का सबसे ज्यादा आधार है। 2014 में आप ने यहां से चार लोकसभा सीटें जीत कर सबको चौंका दिया था। पार्टी को करीब 25 फीसदी वोट मिले थे। उस समय जीते चार सांसदों में से हरिंदर खालसा भाजपा में चले गए हैं। जबकि, डॉ. धरमवीर गांधी अपनी पार्टी बना कर पटियाला से चुनाव लड़ रहे हैं। बाकी बचे दोनों सांसद भगवंत मान संगरूर से और प्रो. साधू सिंह फरीदकोट से दोबारा चुनाव मैदान में हैं। ये दोनों सीटें बचाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
आप नेतृत्व को पता है कि 2014 जैसी केजरीवाल की लहर इस बार नहीं है। यह भी स्पष्ट है कि आप केंद्र की सत्ता की लड़ाई में नहीं है। ऐसे में उसका वोट कांग्रेस या अकाली-भाजपा को शिफ्ट होने की भी आशंका है। इसलिए पार्टी अपनी परंपरागत रणनीति पर काम कर रही है। वॉलंटियर्स को घर-घर जाकर ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं से सीधा संपर्क साधने को कहा जा रहा है। दिल्ली के नेता भी अलग-अलग लोकसभा हलकों में इसी मुहिम की कमान संभालेंगे।
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जरूरत पड़ने पर दिल्ली और हरियाणा से और नेताओं को भी बुलाया जा सकेगा। दिल्ली के बाद पंजाब में ही आप का सबसे ज्यादा आधार है। 2014 में आप ने यहां से चार लोकसभा सीटें जीत कर सबको चौंका दिया था। पार्टी को करीब 25 फीसदी वोट मिले थे। उस समय जीते चार सांसदों में से हरिंदर खालसा भाजपा में चले गए हैं। जबकि, डॉ. धरमवीर गांधी अपनी पार्टी बना कर पटियाला से चुनाव लड़ रहे हैं। बाकी बचे दोनों सांसद भगवंत मान संगरूर से और प्रो. साधू सिंह फरीदकोट से दोबारा चुनाव मैदान में हैं। ये दोनों सीटें बचाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
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आप नेतृत्व को पता है कि 2014 जैसी केजरीवाल की लहर इस बार नहीं है। यह भी स्पष्ट है कि आप केंद्र की सत्ता की लड़ाई में नहीं है। ऐसे में उसका वोट कांग्रेस या अकाली-भाजपा को शिफ्ट होने की भी आशंका है। इसलिए पार्टी अपनी परंपरागत रणनीति पर काम कर रही है। वॉलंटियर्स को घर-घर जाकर ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं से सीधा संपर्क साधने को कहा जा रहा है। दिल्ली के नेता भी अलग-अलग लोकसभा हलकों में इसी मुहिम की कमान संभालेंगे।
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केजरीवाल के लिए खास रणनीति
आप ने अपने स्टार कैंपेनर अरविंद केजरीवाल को पूरी तरह उपयोग करने केलिए खास रणनीति तैयार की है। केजरीवाल पांच दिन पंजाब में रहेंगे। पंजाब इकाई द्वारा तैयार रणनीति केतहत उन्हें पूरे दिन एक ही हलके में नहीं रखा जाएगा। कैंपेन प्लान ऐसा बनाया जाएगा कि सुबह वह एक हलके से शुरूआत करेंगे तो शाम को दूसरे हलके को टच करेंगे। जिन हलकों में भी वह जाएंगे, उन्हें दो अलग-अलग दिन टच करेंगे।
कोई रैली नहीं
आप ने प्रचार की रणनीति में एक और बदलाव किया है। इस बार पार्टी ने अरविंद केजरीवाल की कोई बड़ी रैली या सभा नहीं रखी है। इसके बजाय रोड शो से माहौल बनाया जाएगा। साथ ही दिन में एक-दो छोटी सभाएं हो सकती हैं। सुबह रोड शो के बाद किसी जगह संबोधन होगा। शाम को फिर रोड शो और छोटी सभा होगी।
कोई रैली नहीं
आप ने प्रचार की रणनीति में एक और बदलाव किया है। इस बार पार्टी ने अरविंद केजरीवाल की कोई बड़ी रैली या सभा नहीं रखी है। इसके बजाय रोड शो से माहौल बनाया जाएगा। साथ ही दिन में एक-दो छोटी सभाएं हो सकती हैं। सुबह रोड शो के बाद किसी जगह संबोधन होगा। शाम को फिर रोड शो और छोटी सभा होगी।