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लोकसभा चुनाव 2019: पंजाब में भाजपा-शिअद में बढ़ी खटास, हिस्सेदारी से बचने लगी भाजपा

Fri, 14 Dec 2018 02:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Updated Fri, 14 Dec 2018 02:21 PM IST
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Lok Sabha Election 2019, BJP and Akali Dal Separating in Chandigarh
Bikram Majithia (L) and Sukhbir Badal (R)
जमीनी स्तर पर भाजपा-शिअद में दूरियां तेजी से बढ़नी शुरू हो गई है। हालात यह है कि भाजपा नेताओं की तरफ से अकाली दल के साथ संयुक्त प्रेस नोट तक बंद कर दिए गए हैं। अकाली दल के तमाम धरनों से भाजपा किनारा कर अपनी जमीन खुद तैयार करने में जुट गई है। पंजाब में पंथक सियासत करने वाली पार्टी अब तक के सबसे गंभीर संकट से रूबरू है। पार्टी के बुजुर्ग नेता खुलकर सामने आ गए हैं। शिरोमणि अकाली दल को खड़ा करने वाले लोगों में शामिल इन वरिष्ठ नेताओं ने बगावत कर दी है। इनकी गंभीर नाराजगी पार्टी चलाने के तौर-तरीकों से है।
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सीनियर नेताओं में गुस्सा काफी समय से था, लेकिन वरिष्ठ अकाली नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद धीरे-धीरे सभी खुल कर सामने आ गए। माझा क्षेत्र के दिग्गज नेता पूर्व सांसद रतन सिंह अजनाला, खडूर साहिब से वर्तमान सांसद रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा और गुरदासपुर से दो बार राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सेवा सिंह सेखवां ने मोर्चा संभाल लिया। अकाली दल संकट में गुजर रहा है। 1997 से अकाली दल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर संकट का सामना करने वाली भाजपा अब दूर होने लगी हैं।
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भाजपा ने पटियाला, फरीदकोट रैली से किनारा तो रखा साथ ही जिला स्तर पर होने वाले धरनों से भी खुद को अलग कर लिया है। हाल ही में जालंधर में एससी-एसटी विद्यार्थियों के वजीफे को लेकर अकाली दल ने जालंधर में धरना दिया तो भाजपा ने इससे किनारा रखा। सुखबीर बादल इस कार्यक्रम में पहुंचे लेकिन भाजपाई नहीं आई। हालांकि जालंधर में भाजपा खुद एक आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ती है और तीन बार सीट को जीत चुकी है। इसके अलावा गन्ना किसानों को लेकर अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने किसानों के हित में धरना दिया तो भी भाजपा साथ नहीं आई।
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अकाली दल पिछले दस साल में सरकार में भाजपा के साथ गठबंधन में थी। सरकार चलाने के दौरान हुई गलतियों की माफी मांगने के लिए समूचा अकाली दल श्री दरबार साहब पहुंचा लेकिन वहां भी भाजपा ने दूरी बनाकर रखी। भाजपा के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल और भाजपा के संयुक्त प्रेस नोट भी बंद कर दिए हैं। भाजपा नेताओं ने अकाली दल को साफ कह दिया है कि अगर कोई संयुक्त प्रेस नोट जारी करना है तो उसकी एक कापी पहले भाजपा हाईकमान को भेजकर उसकी स्वीकृति ली जाए वरना किसी बयानबाजी में नाम न डाला जाए।

 
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