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हरियाणाः दिव्यांग कर्मचारियों को बड़ी राहत, निजी स्कूलों पर सख्ती, बनेंगी पशुधन सर्वेक्षण समितियां

Sat, 09 May 2020 11:01 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 09 May 2020 11:01 AM IST
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Lockdown, Haryana Government Decisions Regarding Private Schools, Disable Employees
बैठक लेते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा सरकार ने दिव्यांग कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। साथ ही पशुधन सर्वेक्षण समितियां बनाने का फैसला लिया और निजी स्कूलों के प्रति सख्त रूख भी अख्तियार किया। हरियाणा सरकार ने आदेश जारी किए हैं कि कोरोना अवधि के दौरान दिव्यांग कर्मचारियों को दफ्तर आने से छूट रहेगी।
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अगर कोई दिव्यांग कर्मचारी स्वेच्छा से आता है तो उससे हाजिरी नहीं लगवाई जाएगी। मुख्य सचिव ने सभी प्रशासनिक सचिवों व विभागाध्यक्षों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी विभागाध्यक्षों को ड्यूटी रोस्टर बनाते समय दिव्यांग कर्मचारियों को उससे बाहर रखना होगा।
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सरकार इन कर्मचारियों की जान महामारी के दौरान जोखिम में नहीं डालना चाहती है। सरकार ने सभी विभागों में कार्यरत जूनियर इंजीनियर को ड्यूटी पर आने के निर्देश दिए हैं। उन पर 33 फीसदी कर्मचारियों से काम लेने के आदेश लागू नहीं होंगे। सभी जूनियर इंजीनियर को रोजाना डयूटी पर आना होगा।
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ट्यूशन फीस के अलावा अन्य फंड लेने वाले निजी स्कूलों पर सख्ती

हरियाणा सरकार ने लॉकडाउन के दौरान ट्यूशन फीस के अलावा अन्य फंड वसूलने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करने का मन बना लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने सभी मंडलायुक्तों को मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ आई मासिक टयूशन फीस के अलावा अन्य फंड लेने की शिकायतों का  निवारण करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि लॉकडाउन के 17 मई तक बढ़ने के कारण सामान्य जन की आजीविका के स्रोतों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।

और कई अभिभावक अभी फीस देने में सक्षम नहीं हैं। जिसके चलते निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वर्तमान परिस्थितियों में निजी स्कूल विद्यार्थियों से मासिक आधार पर केवल ट्यूशन फीस ही लें, बिल्डिंग फंड, रखरखाव फंड, एडमिशन फीस, कंप्यूटर फीस आदि स्थगित कर दिए जाएं। सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि न तो मासिक आधार पर ली जाने वाली ट्यूशन फीस में वृद्धि की जाएगी और न ही बंद की अवधि का यातायात शुल्क वसूला जाएगा।

स्कूल यूनिफार्म, पाठ्य-पुस्तकों, कार्य-पुस्तकों, अभ्यास-पुस्तकों, प्रैक्टिकल फाईल में भी परिवर्तन नहीं कर सकते। यही नहीं, कोई भी निजी स्कूल मासिक फीस में कोई हिडन-चार्ज नही जोड़ेगा। यदि कोई निजी स्कूल इन हिदायतों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके विरूद्ध हरियाणा शिक्षा नियमावली 2003 के नियम 158 के अनुसार कार्रवाई की जाए तथा इस संबंध में निदेशालय को भी अवगत करवाएं।

अभिभावकों ने  मासिक टयूशन फीस के अलावा अन्य फंड वसूलने से संबंधित शिकायतें की हुई हैं। निजी स्कूल निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं तो शिकायतों का निवारण कर कारवाई की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। उसके अनुसार आगामी कार्रवाई निदेशालय स्तर पर की जाएगी।

गोधन की अलग-अलग रंग से होगी टैगिंग

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि सभी उपयोगी व अनुपयोगी गोधन की अलग-अलग रंग से टैगिंग की जाएगी। उपयोगी व अनुपयोगी श्रेणी समय के साथ परिवर्तित की जा सकती है। सभी वेटरनरी सर्जन सांझा सेवा केंद्रों से गोधन का डाटा जुटाकर ऑनलाइन अपडेट करेंगे। चाहे कोई गोशाला सरकारी अनुदान ले अथवा न ले, सभी को पशुपालन विभाग से रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा।

सभी निराश्रय पशुओं,विशेषकर गायों और नंदियों को  गौशालाओं में आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य से जल्दी सभी खंडों में 225 पशुधन सर्वेक्षण समितियों का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री यहां वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से डीसी, पशुपालन विभाग के सभी उप-निदेशकों, गो-रक्षक समितियों के प्रतिनिधियों व गो सेवकों के साथ बैठक कर रहे थे। पशुपालन मंत्री जेपी दलाल और गीता मनीषी ज्ञानानंद ने भी बैठक में भाग लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नंदियों को रखने के लिए कोई तैयार नहीं होता। गोशाला संचालक नंदियों को आश्रय प्रदान करने के लिए अलग से नंदी शालाएं बनाएं। पांच सदस्यों वाली खंड स्तरीय समितियों की अध्यक्षता वेटरनरी सर्जन करेंगे। इसके अन्य सदस्यों में गौ-सेवा आयोग के प्रतिनिधि, क्षेत्र की प्रमुख गौशाला के संचालक और डीसी के स्तर पर दो समाजसेवी शामिल होंगे।  जिला स्तर पर इन समितियों की निगरानी पशुपालन विभाग के उप-निदेशक करेंगे उन्हें सदस्यों की संख्या पांच से छह करने का भी अधिकार होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश में लगभग600 गौशालाएं हैं। मुख्यमंत्री ने गौ-रक्षक समितियों के प्रतिनिधियों व गौ सेवकों से आग्रह किया कि इन गौशालाओं में गायों और नंदियों को आश्रय प्रदान करने के लिए व्यवस्था बनाने में अपना सहयोग दें। सरकार स्वयं गौशाला नहीं चलाएगी बल्कि गौशालाओं का संचालन करने वालों को अनुदान प्रदान करेगी। इसी उद्देश्य से पशुधन सर्वेक्षण समितियों का गठन किया जा रहा है। इस कार्य के लिए सरकार सभी गौशालाओं को अनुदान राशि प्रदान करेगी।

अनुदान राशि उपयोगी और अनुपयोगी पशुओं के अनुपात के अनुसार ही प्रदान की जाएगी। 33 प्रतिशत से कम अनुपयोगी पशुओं को रखने वाली गौशालाओं को कोई सरकारी अनुदान प्रदान नहीं किया जाएगा।  33 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक अनुपयोगी पशुओं को रखने वाली गौशालाओं को प्रति वर्ष 100 रुपये प्रति पशुधन दिया जाएगा। 51 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक अनुपयोगी पशुओं को रखने वाली गौशालाओं को प्रति वर्ष 200 रुपये प्रति पशुधन देंगे।

76 प्रतिशत से 99 प्रतिशत तक अनुपयोगी पशुओं को रखने वाली गौशालाओं को प्रति वर्ष 300 रुपये प्रति पशुधन दिया जाएगा। 100 प्रतिशत अनुपयोगी पशुओं को रखने वाली गौशालाओं को प्रति वर्ष 400 रुपये प्रति पशुधन देंगे। केवल नंदियों को ही रखने वाली गौशालाओं, नंदी शालाओं को प्रति वर्ष 500 रुपये प्रति पशुधन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नंदी और अनुपयोगी गायों को सम्मलित रूप से रखने वाली गौशालाओं को प्रति वर्ष 400 रुपये प्रति पशुधन मिलेंगे।

पशुधन सर्वेक्षण समितियों का पहला कार्य गायों और नंदियों की संख्या की गणना, उपयोगी व अनुपयोगी मापदंडों को तय करना व गौशालाओं के लिए जमीन तलाशना होगा। चारे के लिए गौशालाएं पट्टे पर ग्राम पंचायतों की गौ-चरण भूमि का उपयोग कर सकती हैं। यदि गौशाला उसी ग्राम पंचायत की है तो 5000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष और दूसरी ग्राम पंचायत की है तो 7000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से भुगतान करना होगा। शहरी क्षेत्रों में शहरी स्थानीय निकाय विभाग व शहर के बाहरी क्षेत्र में पंचायत विभाग गौशालाओं के लिए जमीन उपलब्ध करवाएगा।
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