किसान आंदोलन से सियासी जमीन तलाश रहे वामपंथी, अपने हिसाब से चलाना और खत्म करना चाहते हैं धरना
- नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में इनकी राह अन्य संगठनों से जुदा
- मांगें पूरी कराने के लिए भी अलग रुख, हरियाणा में ज्यादा नहीं वामपंथियों का जनाधार
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नए कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए चल रहा किसान आंदोलन सियासत चमकाने का जरिया भी बना हुआ है। आंदोलन में अलग राह पकड़े वामपंथी संगठन हरियाणा, पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। हरियाणा की सियासत में वामपंथियों का अब ज्यादा दखल नहीं है। संयुक्त पंजाब के समय व हरियाणा के अलग राज्य बनने के कुछ समय बाद तक इनका जनाधार रहा, दो विधायक भी चुनकर विधानसभा पहुंचे। लेकिन, अब हरियाणा में वामपंथी अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके हैं।
विधानसभा व लोकसभा चुनावों में इन्हें सभी सीटों पर प्रत्याशी तक नहीं मिलते। कुछ सीटों पर चुनाव लड़कर वामपंथी दल अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। पंजाब में भी कमोबेश यही स्थिति है। दिल्ली के बॉर्डर पर डटे अन्नदाताओं में वामपंथी संगठन अब अपना राजनीतिक भविष्य टटोल रहे हैं। वामपंथ समर्थक किसान संगठनों के नेताओं की आंदोलन में अपनी अलग ही राह है।
ये संगठन चाहे पंजाब के हों या हरियाणा के, नए कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई में इनका अपना अलग नजरिया है। ये अपने हिसाब से ही आंदोलन को चलाना व खत्म कराना चाहते हैं। जिसका अंदरखाने विरोध हो रहा है। सूत्रों के अनुसार वामपंथी विचारधारा के किसान नेताओं को वार्ता से इसलिए ही दूर रखा गया। मांगें पूरी कराने को लेकर भी इनका रुख अन्य संगठनों से अलग है। हालांकि, इस पर खुलकर बोलने को कोई तैयार नहीं।
वामपंथी कर्मचारी संगठन कर रहे सहयोग
हरियाणा के सरकारी व कच्चे कर्मचारियों में वामपंथी संगठनों का अच्छा जनाधार है। सर्व कर्मचारी संघ के हाथ इनकी कमान है। जनहित के मुद्दों पर संघ हमेशा आंदोलन की अगुवाई करता आया है। मजदूरों व केंद्रीय परियोजनाओं के कर्मचारियों का नेतृत्व सीटू करता है। ये दोनों ही संगठन किसान आंदोलन का भी पुरजोर समर्थन कर रहे हैं।
राजनीति उद्देश्य नहीं, किसान हित सर्वोपरि : लांबा
सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान सुभाष लांबा का कहना है कि उनके संगठन का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है। उनके लिए किसान व कर्मचारी हित सर्वोपरि हैं। केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों, बिजली संशोधन विधेयक 2020 को तुरंत वापस ले।
किसान बचाने के लिए करें संघर्ष, राजनीति बर्दाश्त नहीं : भाकियू
भाकियू हरियाणा के प्रेस प्रवक्ता राकेश बैंस व किसान नेता कर्म सिंह मथाना ने कहा कि सभी संगठनों को राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर किसानी बचाने के लिए संघर्ष करना चाहिए। इस आंदोलन में राजनीति बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है।