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Chandigarh News: ली कॉर्बुजिए की बनाई ड्राइंग स्विट्जरलैंड में 34.87 लाख में बिकी
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चंडीगढ़। हेरिटेज फर्नीचर के बाद फ्रांसीसी वास्तुकार ली कॉर्बुजिए की ओर से चंडीगढ़ के लिए बनाई गई ड्राइंग की भी विदेश में नीलामी होने लगी है। एक ऐसी ही नीलामी 21 जून को स्विट्जरलैंड के शहर बेसल स्थित आर्टक्यूरियल में हुई है, जिसमें कॉर्बुजिए की बनाई ड्राइंग 34.87 लाख रुपये में बिकी है। चंडीगढ़ हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने राज्यसभा के महासचिव को इस नीलामी की शिकायत भेजी है। उन्होंने शिकायत में कहा है 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दिन आर्टक्यूरियल में एक नीलामी हुई, जिसमें 18 नवंबर 1960 को चंडीगढ़ के लिए बनाई गई ली कॉर्बुजिए की ड्राइंग को करीब 34.87 लाख रुपये में नीलाम किया गया। यह बेहद चिंताजनक है। जांच का विषय है कि ये चित्र भारत से बाहर कौन ले गया है। उन्होंने शिकायत में एक सख्त नियम बनाने की मांग की है ताकि कोई भी चंडीगढ़ के हेरिटेज आइटम को बाहर न ले जा सके। साथ ही उन्होंने ऐसी नीलामियों पर रोक लगाने और कैसे हेरिटेज आइटम्स को वापस लाया जा सकता है, इस पर नियम बनाने की मांग की है। ड्राइंग की फोटो में ली कोर्बुजिए का नाम और तारीख को फोटो के नीचे दाहिनी ओर देखा जा सकता है, जिसका उल्लेख ली कॉर्बुजिए यानी एल-सी और तारीख एल-सी 18 11 60 के रूप में किया गया है। जग्गा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2011 में ही आदेश जारी कर दिया था कि चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचरों को न तो बेचा जा सकता है, न रिप्लेस किया जा सकता है और न ही किसी अन्य जगह शिफ्ट किया जा सकता है। इसके बावजूद वर्षों तक इस आदेश की उल्लंघना होती रही। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में आज भी हजारों करोड़ के हेरिटेज आइटम बिखरे पड़े हैं, लेकिन दुख की बात है कि स्थानीय स्तर पर ही अधिकारी संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है।
इन आइटम्स को माना जाता है हेरिटेज
ली कॉर्बुजिए और उनके चचेरे भाई पियरे जेनरे ने फर्नीचर ही नहीं, बल्कि मैनहोल कवर, फुट लैंप, कंक्रीट लाइट फिक्सचर (जो सुखना लेक पर लगे हैं) और कुछ लोहे के पल्ले भी डिजाइन किए थे। इन सभी को हेरिटेज माना जाता है। पियरे जेनरे ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, विधानसभा, सचिवालय, पंजाब विश्वविद्यालय, शैक्षणिक संस्थान और दूसरी प्रशासनिक बिल्डिंग के लिए फर्नीचर डिजाइन किए थे। पंजाब यूनिवर्सिटी में यह फर्नीचर सबसे बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं। अभी भी इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि प्रशासन के पास ऐसी कोई निश्चित संख्या नहीं है।
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इन आइटम्स को माना जाता है हेरिटेज
ली कॉर्बुजिए और उनके चचेरे भाई पियरे जेनरे ने फर्नीचर ही नहीं, बल्कि मैनहोल कवर, फुट लैंप, कंक्रीट लाइट फिक्सचर (जो सुखना लेक पर लगे हैं) और कुछ लोहे के पल्ले भी डिजाइन किए थे। इन सभी को हेरिटेज माना जाता है। पियरे जेनरे ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, विधानसभा, सचिवालय, पंजाब विश्वविद्यालय, शैक्षणिक संस्थान और दूसरी प्रशासनिक बिल्डिंग के लिए फर्नीचर डिजाइन किए थे। पंजाब यूनिवर्सिटी में यह फर्नीचर सबसे बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं। अभी भी इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि प्रशासन के पास ऐसी कोई निश्चित संख्या नहीं है।
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