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Photos: चंडीगढ़ में इंडियन क्लासिकल डांस फेस्टिवल, टेगौर थिएटर में तीन दिन रही धूम, दिल छू लेंगी ये तस्वीरें
Wed, 13 Nov 2024 09:04 PM IST
अंकेश ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Wed, 13 Nov 2024 09:04 PM IST
सार
सेक्टर-18 स्थित टेगौर थिएटर में चल रहे तीन दिवसीय नेशनल क्लासिकल डांस फेस्टिवल के अंतिम दिन दिल्ली की प्रख्यात नृत्यांगना संगीता शर्मा व उनके ग्रुप और कोलकाता के प्रख्यात कथक नर्तक असीम बंधु भट्टाचार्य व उनके समूह ने शानदार प्रस्तुति दी।
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आदि अनंत को प्रस्तुति देते कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ के सेक्टर-18 स्थित टेगौर थिएटर में चल रहे तीन दिवसीय नेशनल क्लासिकल डांस फेस्टिवल का बुधवार को समापन हो गया। अंतिम दिन दिल्ली की प्रख्यात नृत्यांगना संगीता शर्मा व उनके समूह एवं कोलकाता के प्रख्यात कथक नर्तक असीम बंधु भट्टाचार्य व उनके समूह की मनमोहक प्रस्तुति दी।
कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। टैगोर थिएटर में आयोजित कार्यक्रम में सबसे पहले असीम बंधु भट्टाचार्य ने कथक की प्रस्तुति दी।
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आज की प्रस्तुति या कथा मूनस्ट्रक है। यह एक अभिनव प्रस्तुति है। इसमें कथक के सौंदर्यशास्त्र और मापदंडों को पूरी तरह से शुद्ध रखा गया है। प्रस्तुति में नृत्य रूप की बारीकियों की सीमाओं के भीतर प्रयोग किया गया है। यहां उन्होंने समरूप विशेषताओं को बनाए रखते हुए मुखौटे का उपयोग करके पश्चिम बंगाल का एक प्रसिद्ध लोक नृत्य छऊ जैसे अन्य रूपों को भी शामिल किया है।
मूनस्ट्रक एक अविश्वसनीय वार्तालाप है। एक अति-भयभीत अकेले अंतर्मुखी बच्चे और उसके मित्र चंद्रमा के बीच वार्ता है। इसमें पौराणिक और साथ ही हाल के प्रक्षेपों की एक श्रृंखला जुड़ी हुई है। जो सदा सुंदर रहने वाले चंद्रमा की अत्यंत भेद्यता को उजागर करती है।
उनके सह कलाकार रंजनी, अविक, रितोप्रतिम, शुभ्रदीप, संदीप, गोबिंद, त्रिशा मधुका, अन्विता और देबस्मिता ने इस नृत्य नाटिका में अपने गुरु के साथ एक खूबसूरत रचना को नृत्य के माध्यम से पेश किया। प्रस्तुति के दौरान दर्शको ने खूब तालियां बजाई।
दूसरी प्रस्तुति में संगीता शर्मा और उनकी मंडली ने आदि अनंत को प्रस्तुत की। इसमें शिव की तीन कहानियाँ हैं। शिव आह्वान यानी त्रिपुरांतक, गंगा अवतरण और किरात अर्जुन की प्रस्तुति दी। किरात अर्जुन महाभारत से लिया गया था। तारकासुर की मृत्यु के बाद उसके तीनों पुत्रों ने ब्रह्मा जी की तपस्या की और साथ में उन्होंने ब्रह्म देव की साधना की और जब वे प्रकट हुए तो उन्होंने अमरत्व मांगा।
ब्रह्म देव ने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि जो भी जन्म लेता है उसे मरना ही पड़ता है। तब इन भाइयों ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा कि उनमें से प्रत्येक का एक विशेष नगर होगा जो हमेशा समृद्ध रहेगा। अंतरिक्ष में अलग-अलग तैरता रहेगा और उनका विनाश तभी हो सकता है जब तीनों नगर एक पंक्ति में एक के नीचे एक आ जाएं।
शिव ने अपना धनुष और बाण निकाला और तीनों राक्षसों पर निशाना साधा। उन्होंने एक ही बाण के प्रहार से तीनों को जलाकर राख कर दिया। वह त्रिपुरांतक थे। इस प्रकार उन्होंने देवताओं को उनके दुखों से मुक्ति दिलाई और हमारी दुनिया को तीन शक्तिशाली राक्षसों से मुक्त कराया। और शिव को त्रिपुरांतक के रूप में जाना जाने लगा।
अंतिम कथा गंगा अवतरण मां गंगा धरती पर आने को तैयार नहीं थी, लेकिन उन्होंने एक युक्ति सोची और शर्त रखी कि वह बहुत तेज गति से धरती पर आएंगी और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा ले जाएंगी। तब भगवान शिव ने कहा कि वह गंगा को अपनी जटाओं में समाहित कर लेंगे। इससे धरती पर कोई विनाश नहीं होगा। इसके बाद भगवान शंकर ने गंगा को अपनी जटाओं में समाहित कर लिया। इस तरह गंगा नदी धरती पर प्रकट हुई। खूबसूरत प्रस्तुति, कथा और सधी हुई कोरियोग्राफी द्वारा संगीता शर्मा और उनके समूह ने शानदार प्रस्तुति दी।
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कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। टैगोर थिएटर में आयोजित कार्यक्रम में सबसे पहले असीम बंधु भट्टाचार्य ने कथक की प्रस्तुति दी।
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आज की प्रस्तुति या कथा मूनस्ट्रक है। यह एक अभिनव प्रस्तुति है। इसमें कथक के सौंदर्यशास्त्र और मापदंडों को पूरी तरह से शुद्ध रखा गया है। प्रस्तुति में नृत्य रूप की बारीकियों की सीमाओं के भीतर प्रयोग किया गया है। यहां उन्होंने समरूप विशेषताओं को बनाए रखते हुए मुखौटे का उपयोग करके पश्चिम बंगाल का एक प्रसिद्ध लोक नृत्य छऊ जैसे अन्य रूपों को भी शामिल किया है।
मूनस्ट्रक एक अविश्वसनीय वार्तालाप है। एक अति-भयभीत अकेले अंतर्मुखी बच्चे और उसके मित्र चंद्रमा के बीच वार्ता है। इसमें पौराणिक और साथ ही हाल के प्रक्षेपों की एक श्रृंखला जुड़ी हुई है। जो सदा सुंदर रहने वाले चंद्रमा की अत्यंत भेद्यता को उजागर करती है।
उनके सह कलाकार रंजनी, अविक, रितोप्रतिम, शुभ्रदीप, संदीप, गोबिंद, त्रिशा मधुका, अन्विता और देबस्मिता ने इस नृत्य नाटिका में अपने गुरु के साथ एक खूबसूरत रचना को नृत्य के माध्यम से पेश किया। प्रस्तुति के दौरान दर्शको ने खूब तालियां बजाई।
दूसरी प्रस्तुति में संगीता शर्मा और उनकी मंडली ने आदि अनंत को प्रस्तुत की। इसमें शिव की तीन कहानियाँ हैं। शिव आह्वान यानी त्रिपुरांतक, गंगा अवतरण और किरात अर्जुन की प्रस्तुति दी। किरात अर्जुन महाभारत से लिया गया था। तारकासुर की मृत्यु के बाद उसके तीनों पुत्रों ने ब्रह्मा जी की तपस्या की और साथ में उन्होंने ब्रह्म देव की साधना की और जब वे प्रकट हुए तो उन्होंने अमरत्व मांगा।
ब्रह्म देव ने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि जो भी जन्म लेता है उसे मरना ही पड़ता है। तब इन भाइयों ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा कि उनमें से प्रत्येक का एक विशेष नगर होगा जो हमेशा समृद्ध रहेगा। अंतरिक्ष में अलग-अलग तैरता रहेगा और उनका विनाश तभी हो सकता है जब तीनों नगर एक पंक्ति में एक के नीचे एक आ जाएं।
शिव ने अपना धनुष और बाण निकाला और तीनों राक्षसों पर निशाना साधा। उन्होंने एक ही बाण के प्रहार से तीनों को जलाकर राख कर दिया। वह त्रिपुरांतक थे। इस प्रकार उन्होंने देवताओं को उनके दुखों से मुक्ति दिलाई और हमारी दुनिया को तीन शक्तिशाली राक्षसों से मुक्त कराया। और शिव को त्रिपुरांतक के रूप में जाना जाने लगा।
अंतिम कथा गंगा अवतरण मां गंगा धरती पर आने को तैयार नहीं थी, लेकिन उन्होंने एक युक्ति सोची और शर्त रखी कि वह बहुत तेज गति से धरती पर आएंगी और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा ले जाएंगी। तब भगवान शिव ने कहा कि वह गंगा को अपनी जटाओं में समाहित कर लेंगे। इससे धरती पर कोई विनाश नहीं होगा। इसके बाद भगवान शंकर ने गंगा को अपनी जटाओं में समाहित कर लिया। इस तरह गंगा नदी धरती पर प्रकट हुई। खूबसूरत प्रस्तुति, कथा और सधी हुई कोरियोग्राफी द्वारा संगीता शर्मा और उनके समूह ने शानदार प्रस्तुति दी।