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HCS पेपर लीक केस में पहली गिरफ्तारी, 3 दिन के रिमांड पर महिला, जानें मामला
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 09 Nov 2017 02:29 PM IST
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एचसीएस (ज्यूडिशियल) पेपर लीक
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हरियाणा में जजों की नियुक्ति के लिए 16 जुलाई को हुई एचसीएस (ज्यूडिशियल) पेपर लीक मामले पहली गिरफ्तारी हुई है, जिसे तीन दिन के रिमांड पर लिया गया है। सुनीता नाम की महिला को मामले की जांच कर रही एसआईटी दिल्ली के नजफगढ़ से ट्रांजिट रिमांड पर लाई थी। महिला को आज कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे तीन दिन के रिमांड पर भेजा गया है। अब टीम उसे लेकर रोहतक और दिल्ली जाएगी, जहां से लैपटॉप और पैनड्राइव की रिकवरी करानी है।
बता दें कि मामला 5 अगस्त को सामने आया था। पंचकूला के पिंजौर निवासी एडवोकेट सुमन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके मामले की जानकारी दी थी। 15 सितंबर को मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जांच का जिम्मा चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी को सौंपने का निर्णय लिया। साथ ही तत्काल प्रभाव से रजिस्ट्रार (रिक्रूटमेंट) बलविंदर शर्मा को निलंबित करने के भी निर्देश दिए।
उस समय जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस राजन गुप्ता एवं जस्टिस जीएस संधावालिया की बेंच ने चंडीगढ़ में ही मामले की एफआईआर दर्ज करने और चंडीगढ़ पुलिस द्वारा गठित एसआईटी से जांच कराने के आदेश दिए। इस मामले में हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के गृह विभाग को भी पक्ष बना लिया है। आरोपी रजिस्ट्रार (रिक्रूटमेंट) बलविंदर शर्मा, दोनों टॉपरों सुनीता और सुशीला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।
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बता दें कि मामला 5 अगस्त को सामने आया था। पंचकूला के पिंजौर निवासी एडवोकेट सुमन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके मामले की जानकारी दी थी। 15 सितंबर को मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जांच का जिम्मा चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी को सौंपने का निर्णय लिया। साथ ही तत्काल प्रभाव से रजिस्ट्रार (रिक्रूटमेंट) बलविंदर शर्मा को निलंबित करने के भी निर्देश दिए।
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उस समय जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस राजन गुप्ता एवं जस्टिस जीएस संधावालिया की बेंच ने चंडीगढ़ में ही मामले की एफआईआर दर्ज करने और चंडीगढ़ पुलिस द्वारा गठित एसआईटी से जांच कराने के आदेश दिए। इस मामले में हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के गृह विभाग को भी पक्ष बना लिया है। आरोपी रजिस्ट्रार (रिक्रूटमेंट) बलविंदर शर्मा, दोनों टॉपरों सुनीता और सुशीला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।
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सीबीआई ने जांच करने को याचिका दायर की, हाईकोर्ट ने ठुकराई
कोर्ट
- फोटो : सांकेतिक चित्र
दूसरी ओर, मामला देखते हुए सीबीआई ने पक्ष बनाए जाने की मांग को लेकर अर्जी दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केस की जांच सीबीआई को सौंपे जाने से इंकार कर दिया। हाईकोर्ट ने इस अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में चंडीगढ़ में एफआईआर दर्ज होनी है और चंडीगढ़ पुलिस द्वारा मामले की जांच के लिए पहले ही तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया जा चुका है। इसे देखते हुए फिलहाल मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द करने की जरूरत नहीं है।
जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस जीएस संधावलिया की फुल बेंच ने 20 सितंबर को सुनवाई शुरू होते ही पूछ लिया कि इस मामले में एफआईआर किसकी तरफ से दर्ज की जाए। इस पर याचिकाकर्ता सुमन के वकील मंजीत सिंह ने कहा कि पहले भी उनकी शिकायत पर ही जांच हुई है, इसलिए उन्हें ही एफआईआर दर्ज कराने की इजाजत दी जाए।
उन्होंने कहा कि वैसे भी ज्यादातर केसों में शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद ही एफआईआर दर्ज करके जांच का काम शुरू किया जाता है। इस पर फुल बेंच ने पूछा कि कहीं वे बाद में किसी दबाव का जिक्र करते हुए अपना बयान तो नहीं बदलेंगे। इस पर मंजीत सिंह ने कहा कि उन पर दबाव जरूर है। तब बेंच ने पूछा कि उन पर कौन दबाव बना रहा है, मंजीत सिंह ने कहा कि आरोपी उन पर दबाव बना रहे हैं। इसके बावजूद वे इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने को तैयार हैं।
जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस जीएस संधावलिया की फुल बेंच ने 20 सितंबर को सुनवाई शुरू होते ही पूछ लिया कि इस मामले में एफआईआर किसकी तरफ से दर्ज की जाए। इस पर याचिकाकर्ता सुमन के वकील मंजीत सिंह ने कहा कि पहले भी उनकी शिकायत पर ही जांच हुई है, इसलिए उन्हें ही एफआईआर दर्ज कराने की इजाजत दी जाए।
उन्होंने कहा कि वैसे भी ज्यादातर केसों में शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद ही एफआईआर दर्ज करके जांच का काम शुरू किया जाता है। इस पर फुल बेंच ने पूछा कि कहीं वे बाद में किसी दबाव का जिक्र करते हुए अपना बयान तो नहीं बदलेंगे। इस पर मंजीत सिंह ने कहा कि उन पर दबाव जरूर है। तब बेंच ने पूछा कि उन पर कौन दबाव बना रहा है, मंजीत सिंह ने कहा कि आरोपी उन पर दबाव बना रहे हैं। इसके बावजूद वे इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने को तैयार हैं।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया
सुप्रीम कोर्ट
जांच चल ही रही थी कि सुप्रीम कोर्ट ने केस में स्वतः संज्ञान लेते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की फुल बेंच से यह मामला अपने पास मंगवा लिया है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की बजाय सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई 10 अक्तूबर को होनी थी, पर सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई से पहले ही मामले में संज्ञान लेते हुए 20 नवंबर से सुनवाई शुरू करने का निर्णय लिया।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पंचकूला की पिंजौर निवासी सुमन ने बताया था कि उसने एचसीएस ज्यूडिशियल के लिए अप्लाई किया था। परीक्षा की तैयारी के लिए एक कोचिंग सेंटर भी ज्वाइन किया। इस दौरान उसकी दोस्ती सुशीला नामक लड़की से हो गई। उसने गलती से याची को एक ऐसी ऑडियो क्लिप भेज दी, जिसमें वह अन्य लड़की से डेढ़ करोड़ में नियुक्ति की बात कर रही थी। जोर देकर पूछने पर पेपर लीक होने की बात पता चली।
सुशीला ने याचिकाकर्ता को 6 सवाल भी बताए जो परीक्षा में आए। 16 जुलाई को हुई परीक्षा में जैसे ही याची को प्रश्नपत्र मिला वह हैरान रह गई क्योंकि जो प्रश्न बताए गए थे वे क्रम संख्या 9 17, 18, 27 व 111 पर मौजूद थे। इसके बारे में सुमन ने अपने पति को बताया और उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस को व हाईकोर्ट को एडमिनस्ट्रेटिव साइट पर दी। इसके बाद रजिस्ट्रार विजिलेंस ने मामले की प्रारंभिक जांच की।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पंचकूला की पिंजौर निवासी सुमन ने बताया था कि उसने एचसीएस ज्यूडिशियल के लिए अप्लाई किया था। परीक्षा की तैयारी के लिए एक कोचिंग सेंटर भी ज्वाइन किया। इस दौरान उसकी दोस्ती सुशीला नामक लड़की से हो गई। उसने गलती से याची को एक ऐसी ऑडियो क्लिप भेज दी, जिसमें वह अन्य लड़की से डेढ़ करोड़ में नियुक्ति की बात कर रही थी। जोर देकर पूछने पर पेपर लीक होने की बात पता चली।
सुशीला ने याचिकाकर्ता को 6 सवाल भी बताए जो परीक्षा में आए। 16 जुलाई को हुई परीक्षा में जैसे ही याची को प्रश्नपत्र मिला वह हैरान रह गई क्योंकि जो प्रश्न बताए गए थे वे क्रम संख्या 9 17, 18, 27 व 111 पर मौजूद थे। इसके बारे में सुमन ने अपने पति को बताया और उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस को व हाईकोर्ट को एडमिनस्ट्रेटिव साइट पर दी। इसके बाद रजिस्ट्रार विजिलेंस ने मामले की प्रारंभिक जांच की।