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Chandigarh: पीयू में राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र है स्टूडेंट सेंटर की बिल्डिंग, जानें इसका इतिहास
Tue, 27 Aug 2024 01:42 PM IST
निवेदिता वर्मा
प्रियंका ठाकुर, संवाद, चंडीगढ़
प्रियंका ठाकुर, संवाद, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 27 Aug 2024 01:42 PM IST
सार
विभिन्न छात्र संगठनों की जीत हार की साक्षी बनी स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग बनाने के पीछे वरिष्ठ व पीयू के पहले चीफ आर्किटेक्ट भानू प्रताप माथुर का विजन था जिन्होंने 1958 से लेकर 1974 तक कैंपस की कई शानदार इमारतें डिजाइन की।
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स्टूडेंट सेंटर
- फोटो : संवाद/फाइल
विस्तार
पंजाब विश्वविद्यालय के आर्ट्स, साइसं ब्लॉक, पुस्तकालय के बीच बनी स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग पिछले पांच दशकों से कैंपस में होने वाली राजनीतिक और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनी है। हर साल छात्र संगठन स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग से अपने उम्मीदवारों और प्रबंधन विजेता प्रतिनिधियों की घोषणा करते हैं जिससे वहां त्योहार सा माहौल देखा जाता है।
स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग में छात्र परिषद ऑफिस और ऊपर कैंटीन बननी थी जिसे उन्होंने गोल आकार दिया। स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग आर्ट्स, साइसं और पुस्तकालय सभी के बीच में है और इसके गोल आकार होने से इसे किसी भर तरफ से देखें यह खूबसूरत लगती है और यहां से बाहर का 360 डिग्री का नजारा देखने को मिलता है। यही कारण है कि सबसे ऊपर फ्लोर पर दीवार नहीं है। बिल्डिंग में कन्क्रीट मटीरियल का प्रयोग किया है।
ली कार्बुजिए सेंटर की पूर्व निदेशक प्रो. दीपिका ने बताया कि कन्क्रीट को लेकर शहर की बहुत कम इमारतों में काम हुआ है जिसमें कैपिटल कॉप्लेक्स और स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग शामिल है। माथुर के वास्तु विजन के बारे में उनके बेटे तरुण माथुर ने बताया कि वह ब्रासिलिया शहर के वास्तुकार और इटेलियन कला से काफी प्रभावित थे। स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग डिजाइन करते हुए उन्होंने ली कार्बुजिए और ब्रासिलिया के वास्तुकार को मिश्रित किया। स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग की खासियत कन्क्रीट मटीरियल और ली कार्बुजिए के मॉड्यूलर सिस्टम ऑफ प्रपोर्शन का प्रयोग है।
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स्टूडेंट सें बिल्डिंग के प्रारंभिक डिजाइन में छात्र परिषद और डीन छात्र कल्याण का दफतर, एक्टिविटी एरिया और ऊपरी मंजिल पर कैफिटेरिया डिजाइन किया। रैंप की रेलिंग कन्क्रीट की है और ऊपर चलते समय उसकी चौड़ाई को कम ज्यादा होते महसूस कर सकते हैं। हर फ्लोर पर रेलिंग को पतला रखा है जो उसे प्लेन डिजाइन से अलग करती है। प्रो. दीपिका ने बताया इस तरह की बिल्डिंग का एक उदाहरण पुराना संसद भवन है जिसे गोल आकार दिया है जिससे चारों तरफ से भवन समान लगता है।
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स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग में छात्र परिषद ऑफिस और ऊपर कैंटीन बननी थी जिसे उन्होंने गोल आकार दिया। स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग आर्ट्स, साइसं और पुस्तकालय सभी के बीच में है और इसके गोल आकार होने से इसे किसी भर तरफ से देखें यह खूबसूरत लगती है और यहां से बाहर का 360 डिग्री का नजारा देखने को मिलता है। यही कारण है कि सबसे ऊपर फ्लोर पर दीवार नहीं है। बिल्डिंग में कन्क्रीट मटीरियल का प्रयोग किया है।
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ली कार्बुजिए सेंटर की पूर्व निदेशक प्रो. दीपिका ने बताया कि कन्क्रीट को लेकर शहर की बहुत कम इमारतों में काम हुआ है जिसमें कैपिटल कॉप्लेक्स और स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग शामिल है। माथुर के वास्तु विजन के बारे में उनके बेटे तरुण माथुर ने बताया कि वह ब्रासिलिया शहर के वास्तुकार और इटेलियन कला से काफी प्रभावित थे। स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग डिजाइन करते हुए उन्होंने ली कार्बुजिए और ब्रासिलिया के वास्तुकार को मिश्रित किया। स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग की खासियत कन्क्रीट मटीरियल और ली कार्बुजिए के मॉड्यूलर सिस्टम ऑफ प्रपोर्शन का प्रयोग है।
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स्टूडेंट सें बिल्डिंग के प्रारंभिक डिजाइन में छात्र परिषद और डीन छात्र कल्याण का दफतर, एक्टिविटी एरिया और ऊपरी मंजिल पर कैफिटेरिया डिजाइन किया। रैंप की रेलिंग कन्क्रीट की है और ऊपर चलते समय उसकी चौड़ाई को कम ज्यादा होते महसूस कर सकते हैं। हर फ्लोर पर रेलिंग को पतला रखा है जो उसे प्लेन डिजाइन से अलग करती है। प्रो. दीपिका ने बताया इस तरह की बिल्डिंग का एक उदाहरण पुराना संसद भवन है जिसे गोल आकार दिया है जिससे चारों तरफ से भवन समान लगता है।
छात्र प्रदर्शन के चलते कभी बिल्डिंग का उद्घाटन नहीं हुआ
1974 में बिल्डिंग बन कर तैयार हो गई लेकिन इसका कभी उद्घाटन नहीं हुआ। पूर्व सांसद और भारत सरकार के एडिशनल सॉलिसटर जनरल सत्यपाल जैन ने बताया 1974 में वह पीयू में पढ़ाई कर रहे थे और राजनीतिक गतिविधियों में काफी एक्टिव थे। जैन ने बताया उस समय के कुलपति लाला सूरज मान इंदिरा गांधी से बिल्डिंग का उद्घाटन करवाना चाहते थे लेकिन उनसे समय नहीं मिल पा रहा था।बिल्डिंग तैयार थी पर बंद पड़ी थी, इसके विरोध में छात्रों ने मिलकर बिल्डिंग के शीशे तोड़ दिए जिसके बाद अगले दिन से बिना उद्घाटन के वह शुरू हो गई। वहीं एक अन्य जानकार ने बताया कि पीयू में छात्र एक्टिविजम के चलते कुलपति इंदिरा गांधी से स्टूडेंट सेंटर की बिल्डिंग का उद्घाटन करवा कर उन्हें तवज्जो नहीं देना चाहते थे इसलिए उन्होंने उद्घाटन समारोह करने पर जोर नहीं दिया गया।
स्टूडेंट सेंटर बिल्डिंग इस बात का बहुत अच्छा सबूत है कि किस तरह भारत के वास्तुकारों ने मॉर्डन आर्किटेक्ट को समझा और ऐसी इमारतें बनाईं। बीपी माथुर ने कार्बुजिए के काम के साथ उसमें अपने आईडिया को भी डाला जिसके चलते स्टूडेंट सेंटर समेत उन्होंने कई इनोवेटिव बिल्डिंग डिजाइन की जो पीयू के आर्किटेक्ट को खास बनाती है। पीयू बनाने में ली कार्बुजिए और पीयरे जॉन्रे का ही नहीं बल्कि बीपी माथुर का भी बहुत बड़ा योगदान है जिसे स्वीकार और संरक्षित करने की जरूरत है। - प्रो. दीपिका गांधी, ली कार्बुजिए सेंटर पूर्व निदेशक