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जानिए, क्या है स्क्रब टाइफस और कैसे करें बचाव?

Sun, 21 Sep 2014 11:19 AM IST
आशीष वर्मा /अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा /अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 21 Sep 2014 11:19 AM IST
know here about scrub typhus and its treatment

अब तक पहाड़ों की बीमारी समझी जाने वाली स्क्रब टाइफस अब मैदानी इलाकों में भी तेजी से पांव पसार रही है। पीजीआई की माइक्रोबायोलॉजी लैब में ढाई महीने में 186 पाजिटिव केस सामने आए हैं। इसमें चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और दिल्ली के केस शामिल हैं। खास बात यह है कि चंडीगढ़ में भी इसकी दस्तक हो गई है।



पहली बार चंडीगढ़ से दो पाजिटिव मरीजों की पुष्टि हुई है। पीजीआई ने इसकी सूचना चंडीगढ़ प्रशासन को देकर जरूरी हिदायत बरतने को कहा है। अलर्ट मिलने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने सभी डिस्पेंसरी और सिविल हॉस्पिटल के डाक्टरों को फीवर को गंभीरता से लेने के निर्देश जारी किए हैं।


दरअसल एक हफ्ते के भीतर यदि बीमारी का पता लग जाए तो उसका इलाज किया जा सकता है। वरना कई सारी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। यह मल्टीपल आर्गन डैमेज कर सकती है जिससे मौत भी हो सकती है। यह बीमारी हिमालयी क्षेत्रों, शिमला, असम और पश्चिम बंगाल के लोगों में आम पाई जाती है। हिमाचल में तो इससे कई लोगों की मौत भी हो चुकी है।

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क्या है स्क्रब टाइफस

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पीजीआई माइक्रोबायोलाजी के एडिशनल प्रोफेसर डा. सुनील सेठी के मुताबिक यह बीमारी तालाब में पनपने वाले ओरिएंटा सुसुगामुशी नामक परजीवी के काटने से हो रही है। इसकी लार में बैक्टीरिया होते हैं। यह इम्यून सिस्टम पर अटैक करता है।

यह परजीवी लेप्टोट्रांबिडियम आकामुशी प्रजाति का है। खटमल से भी छोटा बैक्टीरिया जहां भी काटता है, वहां निशान बन जाता है। बरसात से लेकर सर्दियों के आने तक इसका प्रकोप जारी रहता है।

संभावना जताई जा रही है कि इंफेक्टेड व्यक्ति के ट्रैवलिंग के दौरान बैक्टीरिया एक दूसरे के संपर्क में आया हो और इससे केस में बढ़ोतरी हुई। फिलहाल इसके पुख्ता सुबूत नहीं है। पार्क की घास और आसपास की झाड़ियों में भी यह मौजूद रहता है।

ये होते हैं लक्षण

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इसके लक्षण पूरी तरह से बुखार जैसे ही होते हैं। इसमें तेज बुखार के अलावा सांस लेने में परेशानी, पीलिया, उल्टी, जी मिचलाता है। कीड़ा काटने से उस जगह पर हल्का सा निशान भी पड़ जाता है।

बुखार न उतरे तो लैब में भेजे सैंपल:
पीजीआई में डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलॉजी के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुनील सेठी का कहना है कि डेंगू और मलेरिया कंफर्म न होने के बावजूद यदि मरीज का बुखार नहीं उतर रहा है तो ब्लड का सैंपल माइक्रोबायोलाजी के लैब में भिजवाएं।

एक हफ्ते में पता चलने पर उसे डोक्सीसाइक्लाइन का डोज देना चाहिए। इससे मरीज पूरी तरह से फिट हो जाता और बीमारी से बचाव हो जाता है।

ऐसे करें बचाव

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- पार्क में टहलते वक्त जूते पहनें।
- चूहों में यह कीड़ा होता है, इसलिए इनसे दूरी बरतें।
- अपने पालतू पशुओं को साफ रखें।
- पार्क या पेड़-पौधों के बीच जाने से पहले पूरी बाजू के कपड़े पहने।
- बुखार तीन-चार दिनों से अधिक हो तो तुरंत डॉक्टर से मिले।

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