अमृतसर आईं थीं क्वीन एलिजाबेथ: जलियांवाला बाग गई थीं, नंगे पांव शहीदों को दी थी श्रद्धांजलि
जलियांवाला बाग में महारानी का स्वागत जलियांवाला बाग ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव एसके मुखर्जी ने किया था। महारानी जूते-मोजे उतारकर शहीदी लाट पर पहुंची थीं और फूल चढ़ाकर शहीदों को नमन किया और दो मिनट का मौन भी रखा था।
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ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ का गुरुवार देर रात को निधन हो गया। 96 साल की एलिजाबेथ 70 साल तक ब्रिटेन की क्वीन रहीं। अक्तूबर 1997 में भारत दौरे के समय 14 अक्तूबर को क्वीन एलिजाबेथ अमृतसर पहुंची थीं और नंगे पांव जलियांवाला बाग के अंदर पहुंचकर भारत के शहीदों को नमन किया था। हालांकि उनका पहले श्री दरबार साहिब में नतमस्तक होने का प्रोग्राम था लेकिन 14 अक्तूबर की सुबह 11:30 बजे प्लेन के एयरपोर्ट पर लैंड होने के बाद उनके सुरक्षाकर्मियों ने अचानक ही क्वीन के प्रोग्राम में बदलाव कर दिया था।
उनका काफिला श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से सीधा जलियांवाला बाग के सामने आकर रुका, जहां बाग के तत्कालीन सचिव एसके मुखर्जी ने उनका स्वागत किया था। एयरपोर्ट से जलियांवाला बाग तक स्कूली बच्चों ने तिरंगे लहराकर क्वीन एलिजाबेथ का स्वागत किया। उस समय प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री थे।
जलियांवाला बाग में महारानी का स्वागत जलियांवाला बाग ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव एसके मुखर्जी ने किया था। महारानी जूते-मोजे उतारकर शहीदी लाट पर पहुंची थीं और फूल चढ़ाकर शहीदों को नमन किया और दो मिनट का मौन भी रखा था। महारानी ने करीब 15 मिनट जलियांवाला बाग में बिताए थे। यहां से निकलकर महारानी का काफिला श्री दरबार साहिब पहुंचा।
पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने श्री दरबार साहिब में महारानी एलिजाबेथ का स्वागत किया। जहां शिअद के सीनियर नेता मनजीत सिंह कलकत्ता ने महारानी को श्री दरबार साहिब के इतिहास की जानकारी दी। क्वीन एलिजाबेथ गुरुघर में नतमस्तक होने के बाद श्री दरबार साहिब परिसर में पैदल घूमीं।
इस अवसर महारानी को श्री दरबार साहिब का सम्मान चिन्ह देकर सम्मानित किया गया था। महारानी भी खासतौर पर ब्रिटेन से श्री दरबार साहिब के लिए तोहफा लेकर आई थीं। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को कांच का एक फूलदान भेंट किया, जो आज भी श्री दरबार साहिब के म्यूजियम में रखा है।
श्री दरबार साहिब जाने वाले व्यक्ति को नंगे पैर ही प्रवेश करने की इजाजत है लेकिन महारानी एलिजाबेथ के लिए पहली बार इस नियम में बदलाव किया गया। उन्हें मोजे पहनकर ही श्री दरबार साहिब परिसर में आने की विशेष तौर पर इजाजत दी गई, जो महारानी के सुरक्षा सलाहकारों के अनुरोध के बाद दी गई थी।
महारानी जब श्री दरबार साहिब में पहुंची तो उन्होंने केसरिया रंग की ड्रेस पहनी थी। गोल्डन टेंपल प्लाजा में पहुंचने के बाद महारानी ने वहां बने जोड़ा घर में जूते तो उतारे लेकिन सफेद रंग के मोजे पहने रखे। उनके हाथों में भी सफेद रंग के दस्ताने थे और क्वीन ने हैट पहन रखी थी। इसे लेकर विवाद भी उठा लेकिन महारानी को मोजे पहनकर आने की इजाजत दिए जाने पर आज तक एसजीपीसी के अधिकारियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
अगर महारानी को श्री दरबार साहिब के नियमों और आस्था बाबत सही से बताया जाता तो वह नंगे पांव आकर ही माथा टेकतीं क्योंकि वह जलियांवाला बाग में भी शहीदों को नमन करने नंगे पांव ही गई थीं। इस मामले में उनके सुरक्षा अधिकारियों ने जो आग्रह किया, उसकी जरूरत नहीं थी।
श्री दरबार साहिब में नंगे पैर आने के नियम की गंभीरता इससे भी समझी जा सकती है कि वर्ष 2007 में यहां ऑस्ट्रेलियन नागरिक बेवर्ली को सिर्फ इसलिए माथा टेकने से रोक दिया गया, क्योंकि उसने पैरों में डॉक्टर की ओर से दी गई बैंडेज पहन रखी थी। श्री दरबार साहिब परिसर में हर समय मौजूद रहने वाले एसजीपीसी टास्क फोर्स के सदस्य श्रद्धालुओं को नंगे पांव रहने और सिर ढकने के बारे में लगातार टोकते रहते हैं।