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Lumpy Skin Disease: क्या है लंपी त्वचा रोग? जिससे पंजाब में 10000 पशु संक्रमित, कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द

Fri, 05 Aug 2022 07:43 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 05 Aug 2022 07:43 PM IST
सार

यह रोग एक वायरस के चलते मवेशियों में फैलता है। इसे गांठदार वायरस (एलएसडीवी) भी कहा जाता है। इसकी तीन प्रजातियां हैं, जिसमें पहली प्रजाति कैप्रिपॉक्स वायरस, दूसरी गोटपॉक्स वायरस और तीसरी शीपपॉक्स वायरस है।

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Know about Lumpy skin disease Vet team in affected districts of Punjab
लंपी त्वचा रोग। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गुजरात और राजस्थान के बाद अब पंजाब में लंपी संक्रमण को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। सूबे में अब तक 10000 पशुओं में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। 300 मवेशियों की संक्रमण से मौत होने की खबर है। सबसे ज्यादा सीमावर्ती जिलों में इस संक्रमण का प्रभाव है। इन जिलों में फाजिल्का, मुक्तसर और फरीदकोट शामिल हैं। अलर्ट के बाद विभाग ने कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। साथ ही प्रभावित जिलों में दौरा करने का निर्देश भी जारी कर दिया गया है।

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पंजाब में इस संक्रमण के आने के बाद सरकार की चिंता बढ़ गई है। हालांकि जरूरी दवाओं और उपचार के लिए पशु पालन विभाग ने 75 लाख रुपये जारी किया है। संक्रमण से ज्यादा प्रभावित जिलों को 5-5 लाख रुपये और कम प्रभावित जिलों को 3-3 लाख रुपये जारी किए गए हैं। सरकार ने हालात पर नियंत्रण के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। 
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पशु पालन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने प्रभावित जिलों का दौरा शुरू कर दिया है। उन्होंने जिलों में तैनात डिप्टी डायरेक्टरों को बड़े डेयरी फार्मों का दौरा कर अपेक्षित उपाय करने का निर्देश दिया है। सरकार ने यह भी कहा है कि पशु पालकों को किसी प्रकार की दिक्कत आने नहीं दी जाएगी। हर संभव मदद की जाएगी।
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क्या है लंपी चमड़ी रोग
यह रोग एक वायरस के चलते मवेशियों में फैलता है। इसे गांठदार वायरस (एलएसडीवी) भी कहा जाता है। इसकी तीन प्रजातियां हैं, जिसमें पहली प्रजाति कैप्रिपॉक्स वायरस, दूसरी गोटपॉक्स वायरस और तीसरी शीपपॉक्स वायरस है।


क्या हैं लक्षण

  • 105 से 107 डिग्री सेल्सियस तक तेज बुखार
  • त्वचा पर निशान बनते हैं, बाद में घाव हो जाता है
  • पशुओं के मुंह से लार टपकनी शुरू हो जाती है
  • गायों में सबसे ज्यादा संक्रमण की अब तक पुष्टि

उपाय
यह एक तरह का वायरस है। इसका कोई ठोस उपाय नहीं है। पालकों को अपने पशुओं को संक्रमित पशुओं से दूर रखना चाहिए। साथ ही एंटीबायोटिक्स, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीहिस्टामिनिक दवाओं को चिकित्सकों की सलाह पर देना चाहिए।

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