किसान आंदोलन में शामिल पंजाब के वकील ने की आत्महत्या, 'सुसाइड नोट' में लिखी वजह
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आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में आए फाजिल्का के वकील ने रविवार सुबह बहादुरगढ़ में जहरीला पदार्थ खाकर लिया। पीजीआई, रोहतक में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उनके पास से प्रधानमंत्री मोदी को लिखा एक पत्र भी मिला है। इसमें उन्होंने कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताया है। पत्र में लिखा है कि किसान मजदूर और आम आदमी की रोटी मत छीनिए, न्यायालय भी अपनी विश्वसनीयता खो चुका है।
नेशनल हाईवे पर टीकरी बॉर्डर से करीब सात किलोमीटर दूर पकौड़ा चौक के पास किसान आंदोलन में शामिल वकील अमरजीत सिंह (55) ने सुबह करीब नौ बजे जहरीला पदार्थ खा लिया। इस पर उनके साथी उन्हें तुरंत बहादुरगढ़ के नागरिक अस्पताल ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें रोहतक स्थित पीजीआई में रेफर कर दिया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। जिला फाजिल्का की जलालाबाद बार एसोसिएशन के सदस्य वकील अमरजीत सिंह अपने साथी आंदोलनकारियों के साथ नयागांव चौक के निकट 15 दिन से धरना दे रहे थे।
पत्र में लिखा - कृषि कानूनों के खिलाफ बलिदान दे रहा हूं
एडवोकेट अमरजीत के पास से प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र मिला है। इसमें उन्होंने लिखा है कि वे तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों आंदोलन के समर्थन में बलिदान दे रहे हैं। टाइप किए हुए इस पत्र के नीचे हस्ताक्षर के साथ हरे रंग की स्याही वाले पेन से 18 दिसंबर की तारीख लिखी है। पत्र में कहा गया है कि भारत की आम जनता ने आपको उनके जीवन को बचाने और समृद्ध करने के लिए पूर्ण बहुमत, शक्ति और विश्वास दिया है। बहुत दुख और पीड़ा के साथ लिख रहा हूं कि आप अंबानी और अडानी आदि जैसे विशेष समूहों के प्रधानमंत्री बन गए हैं।
किसान और मजदूर जैसे आम लोग आपके काले तीन कृषि कानूनों से ठगे हुए महसूस कर रहे हैं। आम आदमी का जीवन खराब और व्यर्थ हो रहा है। जनता वोटों के लिए नहीं बल्कि अपने परिवारों और पीढ़ियों की आजीविका के लिए पटरियों और सड़कों पर है। कुछ पूंजीपतियों को खिलाने के लिए आपने आम लोगों और कृषि को नष्ट कर दिया है, जो भारत की रीढ़ है।
पत्र में आगे लिखा है कि कुछ पूंजीपतियों के लिए किसानों, मजदूरों और आम लोगों की रोजी और रोटी को मत छीनिए। यह स्थिति उन्हें सल्फास खाने के लिए मजबूर कर रही है। सामाजिक रूप से आपने जनता को धोखा दिया है। राजनीतिक रूप से आपने अपने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल को धोखा दिया है। सुनो, लोगों की आवाज ईश्वर की आवाज है। मैं आपके बहरे और गूंगेपन को होश में लाने के लिए इस विश्वव्यापी आंदोलन के समर्थन में अपना बलिदान देता हूं। पत्र के अंत में पेन से लिखा है कि न्यायालय भी आम जन में अपनी विश्वसनीयता खो चुका है।
नयागांव चौक के पास जहरीला पदार्थ निगलने के कारण आंदोलनकारी की मौत हो गई। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतक के पास जो पत्र मिला है, उसकी जांच की जाएगी। - अशोक कुमार, डीएसपी