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'वह दया के लायक नहीं है', रामपाल को सजा सुनाते समय जज चालिया ने की कई तल्ख टिप्पणियां

Thu, 18 Oct 2018 12:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार(हरियाणा) Updated Thu, 18 Oct 2018 12:07 PM IST
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Judge Deshraj Chalia Statements during Verdiction to Rampal of Satlok Ashram
rampal
उसकी प्रकृति में कोई दया नहीं, तो वह दया के लायक ही नहीं। दो मर्डर केसों में सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को सजा सुनाते हुए जज चालिया ने कई तल्ख टिप्पणियां की हैं। उन्होंने नेताओं, बाबाओं के गठजोड़ को समाज के लिए खतरनाक बताया है। जज ने लिखा है कि स्वयंभू बाबा नेताओं के लिए अपने अनुयायियों को वोटर के तौर पर प्रयोग करते हैं। नेता ऐसे बाबाओं को सत्ता चलाने की छूट दे देते हैं। ऐसे बाबा खुद को कल्याणकारी दिखाकर आम लोगों को अपनी आय के साधन के तौर पर उपयोग करते हैं।
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जज ने अपनी टिप्पणी में यह भी लिखा है कि 21वीं शताब्दी में जहां काफी लोगों को एक वक्त का खाना नहीं मिल पा रहा है, वहीं 30 प्रतिशत लोग अनपढ़ हैं। स्वयंभू बाबा ऐसे लोगों को खाना और शेल्टर उपलब्ध कराकर उनका शोषण करते हैं। अस्पताल, स्कूल-कालेज खोल कर कल्याणकारी होने का दंभ भी भरते हैं। ऐसा करके वह लोगों का भला नहीं करते बल्कि अपना कारोबार करते हैं। इस तरह वह आम लोगों को आय के साधन के तौर पर प्रयोग करते हैं। ऐसे लोग मानव तस्करी और देह व्यापार जैसे काम भी करते हैं। 
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जज चालिया ने अपनी टिप्पणी में लिखा है कि न केवल चमत्कारी बल्कि भविष्य बताने वाला पंडित, पारिवारिक सलाहकार, मनोवैज्ञानिक और अध्यात्मिक गुरु भी तथाकथित बाबा बन जाते हैं। ऐसे लोग कष्टों से भरे संसार में हर समस्या के समाधान बताकर लोगों को जोड़ लेते हैं। एक बार अनुयायी जुड़ जाता है तो नैतिक जुड़ाव मान लेता है। सामाजिक और आर्थिक बदलाव से ही ऐसे तथाकथित  को उभरने से रोका जा सकता है।
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समाज में ऐसे बाबाओं की जड़ें गहरी पर इन्हें उखाड़ना संभव

Judge Deshraj Chalia Statements during Verdiction to Rampal of Satlok Ashram
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ऐसे बाबाओं ने समाज में अपनी जड़ें गहरी कर ली हैं, लेकिन इन्हें उखाड़ा जा सकता है। हम अपने समाज और सभ्यता को दांव पर नहीं लगा सकते, क्योंकि गांधीजी, मदर टेरेसा और अन्य की इसके लिए दी गईं कुर्बानियां व्यर्थ चली जाएंगी। भारत ऐसा देश है जो सभ्यता के लिए जाना जाता था और विश्वास है कि हमारी भावी पीढ़ियां भी इसे सभ्यता के लिए जानेंगी।

भ्रष्ट कारोबारी भी डेरों के माध्यम से काला धन कर रहे सफेद
उद्योगपतियों और भ्रष्ट लोगों ने ऐसे लोगों के जरिये काले धन को सफेद करने का जरिया बनाया है, जो समाज के लिए दान देने के नाम पर ऐसा करते हैं। ये बाबा समाज की आर्थिकता को भी अस्थिर कर रहे हैं। ये बाबा हथियारों और खुद की बनाई फोर्स के साथ समाज में गड़बड़ी पैदा करते देखे जा सकते हैं। ये हमारे समाज और सभ्यता के लिए असल में खतरा हैं।

वह दया के लायक नहीं है : न्यायाधीश
तथ्यों से यह साबित हो गया है कि रामपाल ने अन्य दोषियों के साथ मिलकर साजिश करके अपने पवित्र शिष्यों को भी नहीं छोड़ा। इन्होंने अवैध तरीके से कार्य किया इसलिए वे किसी दया के लायक नहीं हैं। एक आदमी जो मानवता की चिंता नहीं करता, न ही उसकी प्रकृति में कोई दया है, वह अदालत से किसी भी दया के लायक नहीं है। अभियुक्तों के बर्बरतापूर्ण कृत्य, जो न केवल समाज के खिलाफ, बल्कि निर्दोषों के विश्वास को भी खराब कर देता है, के लिए सजा देता हूं।

रहस्यवादी गतिविधियों से जाल में फंसाते हैं लोगों को

Judge Deshraj Chalia Statements during Verdiction to Rampal of Satlok Ashram
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जज लिखते हैं कि स्वयंभू बाबा न केवल बेहद चालाक होते हैं, बल्कि कुशल वक्ता भी होते हैं। देश में फैले अंधविश्वास की वजह से वह लोगों को आसानी से अपने जाल में फंसा लेते हैं। ऐसे लोग इतिहास की अपने तरीके से व्याख्या करते हैं। साथ ही रहस्यवादी गतिविधियां करते हैं। इससे लोगों का उन पर विश्वास मजबूत हो जाता है। विज्ञान जिन रहस्यों से पर्दा नहीं उठा पाता स्वयंभू बाबा अपने तरीके से उसकी व्याख्या करते हैं और चमत्कार के नाम पर लोगों को भ्रमित करते हैं।

ये अभियुक्त दोनों केसों में सजायाफ्ता
रामपाल सहित छह अभियुक्त ऐसे हैं जो केस नंबर 429 और केस नंबर 430 में शामिल हैं। दरअसल, उस दिन सतलोक आश्रम में हुई हिंसा में छह महिलाओं समेत एक डेढ़ साल के बच्चे की मौत हो गई थी, जिसमें दो केस दर्ज किए गए थे। केस नंबर 429 में 15 अभियुक्तों को अदालत ने आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई।

इस केस में सजायाफ्ता रामपाल, उसका बेटा बिजेंद्र उर्फ विरेंद्र, जोगेंद्र उर्फ बिल्लू, प्रीतम उर्फ राजकपूर, राजेंद्र और बबीता को केस नंबर -430 में भी आजीवन कारावास की कठोर सजा दी गई है। इन पर 2.05 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने दोनों सजाएं एक साथ लेकिन अंतिम सांस तक चलाने का आदेश दिया है। दोनों केसों में जुर्माने के रूप में प्रति अभियुक्त को चार लाख 10 हजार रुपये भरने होंगे। ऐसा नहीं करने पर इनकी संपत्ति जब्त करके वसूली की जाएगी।
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