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चंडीगढ़ में गारबेज प्लांट का अब तक नहीं निकला कोई हल
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Thu, 17 Mar 2016 09:55 AM IST
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गरबेज प्लांट
- फोटो : file photo
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जेपी कंपनी डड्डूमाजरा स्थित गारबेज प्लांट को 31 मार्च तक बंद करने का अल्टीमेटम दे चुकी है। प्लांट को चलाने के लिए नगर निगम की ओर से अब तक नई कंपनी की तलाश नहीं की गई है। आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण निगम इस प्लांट को चलाने में सक्षम नहीं है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि एक बार जेपी कंपनी के अधिकारियों से बात की जाएगी।
कंपनी निगम से गारबेज प्रोसेस के बदले में टिपिंग फीस की मांग कर रही है, जबकि वह शिमला से यह फीस लेने में कामयाब रही है। एनजीटी के निर्देश पर 210 रुपये प्रति टन के हिसाब से हिमाचल की ओर से प्रोसेसिंग फीस जेपी प्लांट को दिए जा रहे हैं। पिछले माह कंपनी नगर निगम को लिखित में प्लांट बंद करने का अल्टीमेटम दे चुकी है। जेपी प्लांट के प्रभारी आरडी शर्मा का कहना है कि अब तक निगम की ओर से कंपनी के उच्च अधिकारियों से संपर्क नहीं किया गया है।
शर्मा का कहना है कि हर माह कंपनी को 50 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। अब 31 मार्च के बाद सिर्फ एक शर्त पर ही कंपनी प्लांट चलाने को तैयार है, नगर निगम उन्हें टिपिंग फीस अदा करे। मेयर अरुण सूद का कहना है कि अधिकारी इस मामले का हल निकालने का प्रयास कर रहे हैं। अन्य कंपनी की भी तलाश की जा रही है।
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दो लाख ले चुका है हिमाचल
कंपनी अब तक हिमाचल से उनके कूड़ा प्रोसेस करने के बदले में दो लाख रुपये की राशि ले चुकी है, कंपनी ने और 10 लाख रुपये की मांग की है। कंपनी ने जो अब तक का कूड़ा प्रोसेस किया है। उसके लिए इस राशि की मांग की है।
250 टन कूड़ा प्रतिदिन होता है प्रोसेस
जेपी प्लांट में इस समय शहर का प्रतिदिन 250 टन गारबेज प्रोसेस के लिए पहुंच रहा है, जबकि 100 टन गारबेज सीधा डंपिंग ग्राउंड में पहुंच रहा है। गारबेज प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 370 टन तक कूड़ा प्रोसेस करने की है।
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कंपनी निगम से गारबेज प्रोसेस के बदले में टिपिंग फीस की मांग कर रही है, जबकि वह शिमला से यह फीस लेने में कामयाब रही है। एनजीटी के निर्देश पर 210 रुपये प्रति टन के हिसाब से हिमाचल की ओर से प्रोसेसिंग फीस जेपी प्लांट को दिए जा रहे हैं। पिछले माह कंपनी नगर निगम को लिखित में प्लांट बंद करने का अल्टीमेटम दे चुकी है। जेपी प्लांट के प्रभारी आरडी शर्मा का कहना है कि अब तक निगम की ओर से कंपनी के उच्च अधिकारियों से संपर्क नहीं किया गया है।
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शर्मा का कहना है कि हर माह कंपनी को 50 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। अब 31 मार्च के बाद सिर्फ एक शर्त पर ही कंपनी प्लांट चलाने को तैयार है, नगर निगम उन्हें टिपिंग फीस अदा करे। मेयर अरुण सूद का कहना है कि अधिकारी इस मामले का हल निकालने का प्रयास कर रहे हैं। अन्य कंपनी की भी तलाश की जा रही है।
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दो लाख ले चुका है हिमाचल
कंपनी अब तक हिमाचल से उनके कूड़ा प्रोसेस करने के बदले में दो लाख रुपये की राशि ले चुकी है, कंपनी ने और 10 लाख रुपये की मांग की है। कंपनी ने जो अब तक का कूड़ा प्रोसेस किया है। उसके लिए इस राशि की मांग की है।
250 टन कूड़ा प्रतिदिन होता है प्रोसेस
जेपी प्लांट में इस समय शहर का प्रतिदिन 250 टन गारबेज प्रोसेस के लिए पहुंच रहा है, जबकि 100 टन गारबेज सीधा डंपिंग ग्राउंड में पहुंच रहा है। गारबेज प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 370 टन तक कूड़ा प्रोसेस करने की है।