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BJP सरकार और जाटों के बीच इन 10 एजेंडों पर बनी सहमति

Mon, 20 Jun 2016 12:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़/रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़/रोहतक Updated Mon, 20 Jun 2016 12:24 PM IST
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हरियाणा जाट नेता यशपाल मलिक - फोटो : फाइल फोटो
आरक्षण को लेकर पिछले 16 दिनों से हरियाणा के 12 जिलों में चल रहा जाटों का धरना 10 एजेंडों पर सहमति के साथ खत्म हो गया। नई दिल्ली के हरियाणा भवन में सरकार और यशपाल मलिक समेत जाट नेताओं के बीच शनिवार देर रात तक चली बैठक में इस पर सहमति बन गई है। हालांकि जाटों ने अब सरकार को 31 अगस्त तक का वक्त दिया है।
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सहमति बनने के बाद यशपाल मलिक जींद पहुंचे और उन्होंने जूस पिलाकर अनशन खत्म कराया। इस दौरान मलिक ने कहा कि सरकार को 31 अगस्त तक का वक्त दिया गया है। इसके बाद भी अगर हमारी मांगें नहीं मानी गई तो 13 सितंबर से फिर से आंदोलन और धरने-प्रदर्शन शुरू कर दिए जाएंगे और इस बार धरनों की शुरुआत हिसार के गांव मय्यड़ से होगी।
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गौरतलब है कि नई दिल्ली में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक और सरकार की ओर से परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार के बीच बातचीत हुई थी। वार्ता के दौरान परिवहन मंत्री पंवार ने समिति की अधिकतर मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया, जिस पर अभी से कार्रवाई शुरू हो जाएगी। इसके बाद आज सवेरे
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यह था बातचीत का दस सूत्री एजेंडा

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जसिया में जाट समाज का आरक्षण के लिए आंदोलन आठवें भी रहा जारी - फोटो : amar ujala
-सरकार हाईकोर्ट में जाट आरक्षण मामले की गम्भीरतापूर्वक पैरवी करे और उसे संविधान की नौवीं सूची में डालने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करे।
-आरक्षण आन्दोलन के दौरान तथा उसके बाद जेल में बंद निर्दोष लोगों को छोड़ जाए।
-आन्दोलनों के दौरान (वर्तमान व पिछले आन्दोलन में दर्ज) मुकदमों को वापस करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। किसी निर्दोष आन्दोलनकारी को गिरफ्तार न किया जाए। जींद में जिन 130 लोगों पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था, उस मामले की निष्पक्ष जांच हो। निर्दोष पाए जाने पर तुरंत मुकदमा वापस लिया जाए तथा जांच के दौरान किसी को भी गिरफ्तार न किया जाए।
-आरक्षण आन्दोलन के दौरान शहीद हुए सभी लोगों व घायलों को मुआवजा व सरकारी नौकरी दी जाए।
-हिंसा का षड्यंत्र रचने वाले सांसद राजकुमार सैनी की ओबीसी ब्रिगेड द्वारा जाट समाज के महापुरुषों की मूर्तियों को खण्डित करने वाले तथा जाट धर्मशालाओं व उनके प्रतिष्ठानों पर हमला करने वालों पर कार्रवाई हो।
- 5 जून से शुरू हुए आन्दोलन की तैयारियों के दौरान सरकार द्वारा जारी सभी नोटिसों व दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाए। जिन जिला उपायुक्तों द्वारा जाट जनप्रतिनिधियों (सरपंचों) की ग्रांट रोकी गई, वह अविलम्ब जारी की जाए।
-केन्द्र में जाट आरक्षण के लिये वैंकया नायडू की अध्यक्षता में गठित कमेटी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वित्तमन्त्री अरुण जेटली से वार्ता के लिए समय निर्धारित किया जाए।
-अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा बैठकों, सम्मेलनों पर प्रतिबंध के साथ-साथ समिति के पदाधिकारियों को प्रताड़ित करने की कार्रवाई पर रोक लगाने और बैठकों व रैलियों की 24 घंटे में अनुमति प्रदान की जाए।
-निर्दोष लोगों की रिहाई, मुकदमों की वापसी व जाटों के साथ हो रहे सरकारी भेदभाव को दूर करने के लिए सरकार द्वारा 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय एक कमेटी गठित की जाए, जिसके साथ मिलकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा गठित 21 सदस्यीय कमेटी के लोग अपने साथ हो रहे भेदभावों को बताएं और उस कमेटी की सिफारिशों कएवं समिति द्वारा गठित कमेटी की सहमति के आधार पर राज्य सरकार सभी समस्याओं को दूर करें।
-सभी मांगों पर कार्रवाई के लिए समय सीमा का निर्धारण किया जाए।

सभी मांगों को कानूनी सीमा में रहकर समय पर पूरा करना होगा

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पहली बार जसिया धरने में शामिल हुए कई गांवों के जाट - फोटो : amar ujala
सरकार ने 17 जून को चंडीगढ़ में वार्ता के लिए जाट संगठनों और खापों को बुलाया था,लेकिन यशपाल मलिक गुट ने इस वार्ता में शामिल होने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि मलिक को  बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया। ऐसे में कोई भी इस वार्ता में शामिल नहीं होगा। इसके बाद सरकार ने मलिक को दिल्ली में वार्ता के लिए बुलाया।

सरकार के प्रतिनिधि के रूप में परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार वार्ता करने पहुंचे। बैठक के दौरान यशपाल मलिक ने लिखित में 10 सूत्री एजेंडा पंवार के सामने रखा और जाट बिरादरी के लोगों पर हो रही कार्रवाई को लेकर विरोध भी जताया।

मलिक ने कहा कि सभी मांगों को सरकार कानूनी सीमा के तहत तय समय में पूरा करे। जिस पर पंवार ने आश्वासन दिया कि सरकार समिति की सभी वैधानिक मांगों पर विचार करेगी और उनका समाधान किया जाएगा।

 
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