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जाट आंदोलन हिंसाः झा आयोग का कार्यकाल बढ़ाने में गृह मंत्री विज का अड़ंगा, पूछा- क्यों बढ़ाएं

Fri, 31 Jul 2020 10:17 AM IST
खुशबू गोयल प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 31 Jul 2020 10:17 AM IST
सार

  • आयोग ने की थी समय सीमा बढ़ाने की पेशकश
  • अब तक कई बार बढ़ाया जा चुका है आयोग का समय
  • आयोग का मुख्यालय गुरुग्राम में बनाया गया है

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Jat Agitation, Haryana Home Minister Anil Vij Raised Questions on to Extend Jha Commission Working Period
गृह मंत्री अनिल विज

विस्तार

हरियाणा में आरक्षण के लिए जाट आंदोलन में हुई हिंसा की जांच कर रहे झा आयोग का कार्यकाल बढ़ाने पर गृह मंत्री अनिल विज ने सवालिया निशान लगा दिया है। आयोग ने समय सीमा बढ़ाने की पेशकश की थी। पिछले दिनों पहुंची आयोग की इस फाइल पर गृह मंत्री ने पूछा है कि ऐसा क्यों किया जाए। उन्होंने इस पर टिप्पणी भी की है कि क्या कारण है कि बार-बार आयोग की समय सीमा बढ़ाई जा रही है।
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गठन के बाद से ही अब तक कई बार आयोग का समय बढ़ाया जा चुका है। हरियाणा में वर्ष 2016 में आरक्षण की मांग को लेकर जाट समुदाय ने आंदोलन शुरू किया था, लेकिन अचानक इस आंदोलन ने नेतृत्वहीन होकर हिंसा की शक्ल ले ली थी। इसकी वजह से चार दिन तक प्रदेश के आठ जिलों में तोड़फोड़ और लूटपाट हुई थी। इस दौरान संपत्ति का भी काफी नुकसान हुआ और 32 लोगों की मौत हो गई थी।
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इस पूरे मामले में आंदोलन के दौरान राज्य सरकार के अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल के लिए यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की अगुवाई में कमेटी बनाई थी। कमेटी ने 13 मई, 2016 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसमें अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे जिसके बाद कई अफसरों पर गाज गिरी थी। कुछ वक्त बाद प्रकाश सिंह कमेटी पर विवाद खड़ा हो गया। इस पर विपक्ष की ओर से कई सवाल खड़े किए गए।
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चौतरफा घिरी बीजेपी सरकार ने फिर मामले की जांच के लिए झा आयोग बना दिया था। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एसएन झा की अगुवाई में बने इस आयोग का मुख्यालय गुरुग्राम में बनाया गया है।

100 से ज्यादा ने दर्ज कराए बयान

इस आयोग को रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, हिसार, कैथल और भिवानी में दंगों से हुए जानमाल के नुकसान का पूरा आकलन करने, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं और तथ्यों को सार्वजनिक करने को कहा गया था। इसके अलावा सामाजिक ताने-बाने को खराब करने के लिए रचे गए कथित षड्यंत्र को बेनकाब करते हुए सरकार को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था। आयोग को इस मामले में लिप्त सभी नेताओं, अधिकारियों समेत आम लोगों से पूछताछ करने की छूट भी दी गई। सूत्रों के अनुसार अब तक आयोग के सामने 100 से ज्यादा लोगों ने अपने बयान दर्ज कराए हैं।
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