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Chandigarh: खानपान में लापरवाही सिर्फ पेट ही नहीं, दिल से दिमाग तक को कर देगी बीमार, बरतें एहतियात

Mon, 02 Oct 2023 02:11 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 02 Oct 2023 02:11 AM IST
सार

सिर्फ मोटापा से बचाव या फिगर मेंटेन करने के उद्देश्य से आहार का चुनाव न करें बल्कि आंतों को ताकत देने वाला आहार लीजिए। बीमारियों के कारणों की तलाश करने पर पता चलता है कि महज 5 प्रतिशत में आनुवांशिक कारण जिम्मेदार हैं जबकि 95 प्रतिशत मामलों में हमारा खानपान और रहन-सहन बीमारियों के लिए जिम्मेदार है।

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It will make you sick not only in the stomach but also in the heart and mind.
food - फोटो : iStock

विस्तार

खानपान में लापरवाही सिर्फ पेट संबंधी मर्ज नहीं देती बल्कि इससे दिल से दिमाग तक प्रभावित हो सकता है। पहले यह लगता था कि आंत के अंदर की बैक्टीरिया का सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन शोध से साबित हो चुका है कि आंत से अगर लीकेज शुरू हो गई तो वहां से निकलने वाला प्रोटीन खून के साथ ही अपने पहुंच वाले सभी अंगों को चपेट में ले सकता है।

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सिर्फ मोटापा से बचाव या फिगर मेंटेन करने के उद्देश्य से आहार का चुनाव न करें बल्कि आंतों को ताकत देने वाला आहार लीजिए। यह कहना है बंगलूरू के एस्टर हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. नरेश भट्ट का। वह पीजीआई में आयोजित 7वें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इमरजेंसी अपडेट में रविवार को बतौर वक्ता मौजूद थे।
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डॉ. भट्ट ने बताया कि हमारे गट में असंख्य अच्छे और खराब बैक्टेरिया होते हैं। इस बैक्टेरिया के संतुलन से गट हेल्दी रहता है तो वह अच्छी तरह काम कर पाता है। वहीं, जब किसी कारण से संतुलन बिगड़ जाता है तो कई प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं। लीकी गट सिंड्रोम भी बैक्टीरिया का बैलेंस बिगड़ने से होने वाली समस्या है। इसमें गट में सूजन बढ़ने लगती है और गट सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाता। लीकी गट की समस्या के कारण इसमें आंत की अंदरूनी लाइनिंग से पोषक तत्वों के साथ-साथ विषैले तत्व भी नसों में चले जाते हैं। ब्लड सर्कुलेशन के साथ ये तत्व नसों में घूमते रहते हैं। इन हानिकारक तत्वों का शरीर पर प्रभाव पड़ता है, शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचता है।


95 प्रतिशत मर्ज में लाइफ स्टाइल मुख्य कारण
डॉ. नरेश ने बताया कि बीमारियों के कारणों की तलाश करने पर पता चलता है कि महज 5 प्रतिशत में आनुवांशिक कारण जिम्मेदार हैं जबकि 95 प्रतिशत मामलों में हमारा खानपान और रहन-सहन बीमारियों के लिए जिम्मेदार है। युवा हर वक्त के भोजन में प्रॉसेस फूड खा रहा है। यह भोजन आंत के माइक्रोबायोम को बदल रहा है। इन्हीं कारणों से मोटापा, मधुमेह और ऐसी अन्य समस्याएं शुरू हो रही हैं। इसलिए भाप से पकाए भोजन का सेवन करें। प्रिजर्व, डीप फ्राई, तंदूर वाले, माइक्रोवेव वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।

लिकी गट दे सकता है ये मर्ज
पेट फूलने की समस्या या ब्लोटिंग
पेट में गैस होना
डायरिया
घुटनों, कुहनी और अन्य जोड़ वाली जगहों पर दर्द
पिम्पलंस और फोड़े-फुंसियां
शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति कम होना
बार-बार सिरदर्द
बहुत अधिक थकान
एलर्जी
त्वचा पर चकत्ते बनना
घबराहट, छोटी-छोटी जानकारियां भूल जाना और ब्रेन फॉग जैसी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं

प्रो. विवेक ने बढ़ाया उत्साह
उद्घाटन समारोह में पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने रेजिडेंट डॉक्टरों को सलाह दी कि वे रोगी को अपने विचारों और कार्य के केंद्र में रखें। उन्होंने कहा कि करुणा और नैदानिक निर्णय एक अच्छे डॉक्टर के दो महत्वपूर्ण लक्षण हैं। समारोह में पूर्व निदेशक प्रो. योगेश चावला के साथ ही एसजीपीजीआई लखनऊ के पूर्व निदेशक प्रो. करतार सिंह भी उपस्थित थे।

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