पंजाब में फिर उथल पुथल: नया नहीं है सिद्धू और कैप्टन के बीच विवाद, सिद्धू के कांग्रेस में आने के समय से हैं तल्खियां
कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके पीछे कारण उनका पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह विवाद बताया जा रहा है।
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क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया है।
उन्होंने अपने इस्तीफे में भी बिना नाम लिए संदेश दिया है।
उन्होंने लिखा, मैं कांग्रेस की सेवा करता रहूंगा
उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि समझौता करने से व्यक्ति का चरित्र खत्म हो जाता है। मैं पंजाब के भविष्य और पंजाब की जनता के कल्याण के एजेंडा से कभी समझौता नहीं कर सकता हूं। उन्होंने आगे लिखा, इसलिए मैं पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं। मैं कांग्रेस की सेवा करता रहूंगा।
कैप्टन और सिद्धू में विवाद लंबे समय से है। इस घटनाक्रम में पिछले दिनों कैप्टन ने पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी दे दिया था। इसके बाद प्रदेश की कमान चरणजीत सिंह चन्नी को दी गई थी।
पार्टी की जीत के साथ ही विवाद भी हुए शुरू
आज पंजाब कांग्रेस जिस समस्या से जूझ रही है, उसकी शुरुआत 2017 चुनाव में पार्टी की जीत के साथ ही हुई थी। दरअसल नवजोत सिंह सिद्धू 2017 चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे। बेबाक अंदाज वाले सिद्धू राहुल और प्रियंका वाड्रा की पसंद थे। पार्टी जीती तो सिद्धू को डिप्टी सीएम बनाने की चर्चाएं तेज हो गई। लेकिन जब कैप्टन सीएम बने तो उन्होंने साफ कर दिया कि पंजाब को डिप्टी सीएम की जरूरत नहीं है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि अति महत्वाकांक्षी सिद्धू के लिए ये पहला झटका था और कैप्टन सिद्धू विवाद की शुरुआत यहीं से हो गई थी।
जब सिद्धू ने कहा-मेरे कैप्टन राहुल गांधी हैं
दूसरी बार अगस्त 2018 में विवाद उठा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बने तो उन्होंने अपने 'यार' सिद्धू को शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया। कैप्टन सिद्धू के पाकिस्तान जाने के खिलाफ थे। इसके बावजूद सिद्धू पाकिस्तान गए और वहां पाक सेना प्रमुख कमर बाजवा के गले भी मिले। इसके बाद पूरे देश में उनकी आलोचना हुई। कैप्टन ने कहा कि सिद्धू को अभी समझ नहीं है। बवाल बढ़ा तो सिद्धू ने मामले पर सफाई दी। इसके बाद नवंबर 2018 में सिद्धू ने कहा कि 'कौन कैप्टन', कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ही उनके कैप्टन हैं और अमरिंदर सिंह तो सेना के कैप्टन रहे हैं।
पत्नी को टिकट न मिलने पर नाराज हुए थे सिद्धू
तीसरी बार 2019 के लोकसभा चुनाव में विवाद खड़ा हुआ। इस विवाद की जड़ बनी पटियाला संसदीय सीट। टिकट न मिलने पर सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने कैप्टन के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई। सिद्धू ने भी इसका समर्थन किया। इसके बाद नाराज हुए अमरिंदर ने कहा कि मुझे लगता है कि शायद सिद्धू की ख्वाहिश मुख्यमंत्री बनने की है।
सक्रिय राजनीति से हुए दूर
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पंजाब में आठ ही सीटें जीती। हार का ठीकरा सिद्धू के सिर पर फोड़ा गया। लोकसभा चुनाव के बाद कैप्टन ने मंत्रीमंडल की बैठक ली। हार के जिम्मेदार बताए जाने से आहत सिद्धू उसमें नहीं आए। नाराज कैप्टन ने उनसे स्थानीय निकाय विभाग छीन लिया और उन्हें बिजली मंत्री बना दिया। भड़के सिद्धू ने जुलाई 2019 में मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया और लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर हो गए।
हाईकोर्ट के फैसले से आया पंजाब कांग्रेस में भूचाल
अपने वनवास के दौरान उन्होंने ‘जीतेगा पंजाब’ यूट्यूब चैनल खोला जिसमें वह पंजाब से जुड़े मुद्दे उठाने लगे। पिछले साल शुरू हुए किसान आंदोलन के बाद सिद्धू सक्रिय राजनीति में लौटे। इसके बाद अप्रैल में हाईकोर्ट ने 2015 में बेअदबी घटना का विरोध कर रहे लोगों पर कोटकपूरा में फायरिंग मामले की जांच कर रही एसआईटी को रद्द कर रिपोर्ट को खारिज कर दिया। इसी फैसले ने पंजाब कांग्रेस में कलह की नींव रख दी।
हाशिये पर गए सिद्धू को कैप्टन का घेराव करने का मौका मिल गया। जोर शोर से कैप्टन के खिलाफ उतरे सिद्धू ने उन्हें अयोग्य मुख्यमंत्री तक कह डाला। इससे नाराज कैप्टन ने उन्हें पटियाला से चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी। लेकिन इस बार मामला पेचीदा हो गया क्योंकि सिद्धू के साथ कई मंत्री और विधायक भी कैप्टन के खिलाफ खड़े हो गए। कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तो मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ही मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा थमा दिया था। वहीं कैप्टन के खिलाफ आवाज उठाने वाले विधायक परगट सिंह और चरणजीत चन्नी के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तो मामला और भड़क गया।