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ये चीज देखी तो दंग रह गए कॉमेडियन घुग्गी
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 17 Dec 2013 05:09 PM IST
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सिटी ब्यूटीफुल एंटीक चीजों का दीवाना है। शहर में लगने वाली प्रदर्शर्नियों एंटीक पीस जरूर देखने को मिल जाते हैं। यही कारण है कि सेक्टर 35 में आयोजित इंटीरियर एग्जीबिशन में एंटीक चीजों की भरमार है।
यहां सबकी आंखों का तारा बन हुआ है अंग्रेजों के जमाने का ताला। इसे अंग्रेजी जेलर काल कोठरी में लगाया करते थे। पंजाबी कॉमेडियन गुरप्रीत घुग्गी भी इस ताले को देखकर दंग रह गए।
गुरप्रीत घुग्गी अपने परिवार के संग सोमवार को सेक्टर-35 में आयोजित प्रदर्शनी में पहुंचे थे।
गुरप्रीत घुग्गी इंटीरियर एग्जीबिशन में आ तो गए पर उनको लगातार यह डर लगता रहा कि कहीं पब्लिक उनको पहचान न ले। इसीलिए वह यहां से फटाफट खरीददारी करके निकल लिए।
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चार चाबियों से खुलता है ताला :
एंटीक ताला लेकर आए मुरादाबाद के मोहम्मद जुबैर। जुबैर का परिवार पिछली कई पीढ़ियों से रॉयल फैमिली और एंटीक पीस को इकट्ठा करता है। ताले को खोलने के लिए चार चाबियों की आवश्यकता होती है।
इसकी खासियत है कि एक चाबी लगाने के बाद दूसरी चाबी को लगाने के लिए गुप्त जगह दिखाई देनी शुरू हो जाती है। जब दूसरी चाबी लगाई जाती है तो तीसरी चाबी लगाने के लिए जगह दिखती है। ताले को बंद भी ऐसे ही किया जाता है।
दमड़ी की कीमत सौ रुपये
जुबैर के पास मुगलकाल की दमड़ी भी है। इसकी कीमत सौ रुपये है। जुबैर ने कहा कि उनके पास एंटीक पीस का जो कलेक्शन है, उसे उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों से कलेक्ट किया है।
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यहां सबकी आंखों का तारा बन हुआ है अंग्रेजों के जमाने का ताला। इसे अंग्रेजी जेलर काल कोठरी में लगाया करते थे। पंजाबी कॉमेडियन गुरप्रीत घुग्गी भी इस ताले को देखकर दंग रह गए।
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गुरप्रीत घुग्गी अपने परिवार के संग सोमवार को सेक्टर-35 में आयोजित प्रदर्शनी में पहुंचे थे।
गुरप्रीत घुग्गी इंटीरियर एग्जीबिशन में आ तो गए पर उनको लगातार यह डर लगता रहा कि कहीं पब्लिक उनको पहचान न ले। इसीलिए वह यहां से फटाफट खरीददारी करके निकल लिए।
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चार चाबियों से खुलता है ताला :
एंटीक ताला लेकर आए मुरादाबाद के मोहम्मद जुबैर। जुबैर का परिवार पिछली कई पीढ़ियों से रॉयल फैमिली और एंटीक पीस को इकट्ठा करता है। ताले को खोलने के लिए चार चाबियों की आवश्यकता होती है।
इसकी खासियत है कि एक चाबी लगाने के बाद दूसरी चाबी को लगाने के लिए गुप्त जगह दिखाई देनी शुरू हो जाती है। जब दूसरी चाबी लगाई जाती है तो तीसरी चाबी लगाने के लिए जगह दिखती है। ताले को बंद भी ऐसे ही किया जाता है।
दमड़ी की कीमत सौ रुपये
जुबैर के पास मुगलकाल की दमड़ी भी है। इसकी कीमत सौ रुपये है। जुबैर ने कहा कि उनके पास एंटीक पीस का जो कलेक्शन है, उसे उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों से कलेक्ट किया है।