{"_id":"651c7b8d15675b4048088b6a","slug":"insurance-company-faces-heavy-costs-for-not-paying-midclaim-will-have-to-pay-compensation-of-rs-25-thousand-chandigarh-news-c-16-sml1026-252769-2023-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: मिडिक्लेम न देना बीमा कंपनी को पड़ा भारी, देना होगा 25 हजार रुपये का हर्जाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: मिडिक्लेम न देना बीमा कंपनी को पड़ा भारी, देना होगा 25 हजार रुपये का हर्जाना
विज्ञापन
चंडीगढ़। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मेडिकल बीमा पॉलिसी लेने के बावजूद उपभोक्ता मरीज को मेडिक्लेम न देने पर ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। साथ ही आयोग ने केस खर्च के तौर पर 15 हजार रुपये और याचिकाकर्ता की ओर से इलाज में खर्च किए 1 लाख 9 हजार 978 रुपये के मेडिक्लेम को 10 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज दर से मरीज को लौटाने के आदेश दिए हैं।
दायर शिकायत के तहत याचिकाकर्ता दिल की समस्या के चलते उपचार के लिए पांच दिन तक मोहाली के अस्पताल में भर्ती रहा। इस दौरान उन्होंने मेडिकल पॉलिसी के तहत कंपनी से कैशलेस उपचार के लिए आवेदन किया जिसे बीमा कंपनी ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता पुरानी बीमारी के पहले से दवा ले रही थी जिससे उन्हें ह्रदय संबंधी समस्या हुई। साथ ही शिकायतकर्ता ने 15 मार्च 2019 से 17 मार्च 2019 तक अस्पताल में भर्ती होने के लिए भी क्लेम किया था। मामले में आयोग ने सामने आए तथ्यों और दलीलों को सुनने के बाद उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी पर हर्जाना लगाने के आदेश दिए हैं।
क्या था मामला
सेक्टर-38बी में रहने वाली वेद नंदा ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में दायर याचिका में बताया कि उन्होंने अपने और पति जेएल नंदा का ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से बीमा पॉलिसी ली थी। बीमा एक अक्टूबर 2017 से 30 सितंबर 2018 तक वैध था। पॉलिसी के बाद जून 2018 में शिकायतकर्ता बीमार हो गई, जिसके बाद उन्होंने स्थानीय डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने उनका चेकअप करने के बाद हालत को देखते हुए मोहाली के फोर्टिस अस्पताल रेफर कर दिया। वहां अस्पताल की ओर से कराई गई जांच के दौरान हृदय रोग के बारे में पता चला। इसके बाद शिकायतकर्ता को 10 जून 2018 को फोर्टिस अस्पताल में ही भर्ती कर लिया गया। यहां उन्हें उपचार के दौरान पांच दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। इस दौरान उन्होंने मेडिकल पॉलिसी के तहत बीमा कंपनी से कैशलेस उपचार के लिए आवेदन किया, लेकिन कंपनी ने आवेदन को स्वीकार कर दिया। याचिकाकर्ता ग्राहक ने उपचार के दौरान 99 हजार 978 रुपये खर्च किए , जिसका भुगतान शिकायतकर्ता ने अपनी जेब से किया। शिकायतकर्ता को अस्पताल कार्ड पर 4,992 रुपये अलग से खर्च करने पड़े। वेद नंदा ने मेडिक्लेम की मांग के लिए 20 सितंबर 2018 को मेडिकल कंपनी के सामने सभी जरूरी दस्तावेज पेश किए, बावजूद इसके कंपनी ने मेडिक्लेम देने से इन्कार कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
दायर शिकायत के तहत याचिकाकर्ता दिल की समस्या के चलते उपचार के लिए पांच दिन तक मोहाली के अस्पताल में भर्ती रहा। इस दौरान उन्होंने मेडिकल पॉलिसी के तहत कंपनी से कैशलेस उपचार के लिए आवेदन किया जिसे बीमा कंपनी ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता पुरानी बीमारी के पहले से दवा ले रही थी जिससे उन्हें ह्रदय संबंधी समस्या हुई। साथ ही शिकायतकर्ता ने 15 मार्च 2019 से 17 मार्च 2019 तक अस्पताल में भर्ती होने के लिए भी क्लेम किया था। मामले में आयोग ने सामने आए तथ्यों और दलीलों को सुनने के बाद उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी पर हर्जाना लगाने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
क्या था मामला
सेक्टर-38बी में रहने वाली वेद नंदा ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में दायर याचिका में बताया कि उन्होंने अपने और पति जेएल नंदा का ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से बीमा पॉलिसी ली थी। बीमा एक अक्टूबर 2017 से 30 सितंबर 2018 तक वैध था। पॉलिसी के बाद जून 2018 में शिकायतकर्ता बीमार हो गई, जिसके बाद उन्होंने स्थानीय डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने उनका चेकअप करने के बाद हालत को देखते हुए मोहाली के फोर्टिस अस्पताल रेफर कर दिया। वहां अस्पताल की ओर से कराई गई जांच के दौरान हृदय रोग के बारे में पता चला। इसके बाद शिकायतकर्ता को 10 जून 2018 को फोर्टिस अस्पताल में ही भर्ती कर लिया गया। यहां उन्हें उपचार के दौरान पांच दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। इस दौरान उन्होंने मेडिकल पॉलिसी के तहत बीमा कंपनी से कैशलेस उपचार के लिए आवेदन किया, लेकिन कंपनी ने आवेदन को स्वीकार कर दिया। याचिकाकर्ता ग्राहक ने उपचार के दौरान 99 हजार 978 रुपये खर्च किए , जिसका भुगतान शिकायतकर्ता ने अपनी जेब से किया। शिकायतकर्ता को अस्पताल कार्ड पर 4,992 रुपये अलग से खर्च करने पड़े। वेद नंदा ने मेडिक्लेम की मांग के लिए 20 सितंबर 2018 को मेडिकल कंपनी के सामने सभी जरूरी दस्तावेज पेश किए, बावजूद इसके कंपनी ने मेडिक्लेम देने से इन्कार कर दिया।
विज्ञापन