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इनेलो से बिदका यूथ तो बढ़ सकती है पार्टी की मुसीबतें, दुष्यंत ने किया शक्ति प्रदर्शन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 14 Oct 2018 04:37 PM IST
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इनेलो
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इनेलो कुनबे की जंग अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला द्वारा इनेसो और यूथ इकाई को भंग करने के बावजूद दोनों इकाइयों में सक्रियता बरकरार दिख रही है। इनेसो अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला जहां अप्रत्यक्ष चुनाव के खिलाफ अपना झंडा बुलंद रखने का एलान कर चुके हैं, वहीं सांसद दुष्यंत चौटाला ने भी शनिवार को अपने दिल्ली आवास 18 जनपथ पर आपातकालीन बैठक के रूप में यूथ शक्ति का प्रदर्शन किया।
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दादा ओपी चौटाला द्वारा पार्टी से सस्पेंड दोनों भाई हालांकि खुलकर तो बगावत नहीं कर रहे हैं, लेकिन अपनी छात्र शक्ति और यूथ शक्ति का प्रदर्शन कर दोनों ने पार्टी को अपनी ताकत का अप्रत्यक्ष रूप से अहसास करवा दिया है। अब कुनबे की इस जंग में जो समीकरण सामने आ रहे हैं, उससे ये बात साफ हो रही है कि इनेलो ने यदि जल्द दुष्यंत और दिग्विजय का निलंबन वापस न लेते हुए इस विवाद का पटाक्षेप नहीं किया, तो बड़ी संख्या में इनेलो से यूथ और छात्र शक्ति अलग हो सकती है।
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अगर ऐसा होता है तो न केवल पार्टी के लिए और मुसीबत खड़ी जो जाएगी, बल्कि लोकसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ी इनेलो की कमर भी टूट जाएगी। फिलहाल अभी दुष्यंत और दिग्विजय दोनों भाइयों ने अपने समर्थकों को शांत रहते हुए ओमप्रकाश चौटाला के फैसला का सम्मान करने और उनके कंधे मजबूत करने का आह्वान किया है।
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तंवर बोले, सियासी दरिद्रता का शिकार हुआ इनेलो
उधर इनेलो में चल रहे विवाद पर टिप्पणी करते हुए डा. तंवर ने कहा कि पार्टी आज पूरी तरह से सियासी दरिद्रता का शिकार हो गई है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह एक पारिवारिक पार्टी के परिवार का मामला है। इसमें कांग्रेस पार्टी का कुछ लेना-देना नहीं हैं। इनेलो में यह उठापठक पार्टी पर कब्जा करने के लिए ही है और इसमें राज्य के लोगों का कोई हित नहीं है।
राजनीतिक दरिद्रता के चलते यह विवाद पनपा है क्योंकि पिछले 15 सालों से इनेलो सत्ताहीन रही है और इनका भविष्य भी अंधकारमय है। तंवर ने कहा कि आज की परिस्थितियों में लोग भाजपा और उसकी बी टीम इनेलो से विमुख हो चुके हैं और आशा व विश्वास से कांग्रेस की ओर देख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य के लोग आगामी लोक सभा चुनावों में सभी 10 सीटों पर और विधान सभा के चुनावों में 80 से अधिक सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को विजयी बनाएंगे।