फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   indian soldiar relu ram honoured british army at first world war

जिसे ब्रिटिश सेना ने 'नवाजा', वे रिकार्ड में भी नहीं

Fri, 17 Apr 2015 10:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, भिवानी।
ब्यूरो/अमर उजाला, भिवानी। Updated Fri, 17 Apr 2015 10:16 AM IST
विज्ञापन
indian soldiar relu ram honoured british army at first world war

अपनी बहादुरी के बल पर जिस शख्स ने अंग्रेजी सेना को भी कायल कर लिया था, उनका नाम सेना के रिकार्ड तक में नहीं है। उसे अपनी सरकार भूल गई है। प्रथम विश्व युद्ध में विक्टोरिया क्रॉस जीतने वाले छैलू राम को कोई जानने वाला नहीं है।

विज्ञापन


न तो सेना के रिकार्ड में उनका नाम दर्ज है और न ही कहीं और। देश-दुनिया और जिला तो दूर खुद गांव के लोग भी आसलवास मलेहठा के इस सख्श की बहादुरी से अनजान हैं। वर्ल्ड वार के 100 वर्ष बाद पिता के नाम को पहचान दिलाने के लिए अब पुत्र ने संघर्ष शुरू किया है।
विज्ञापन


आसलवास मलेहठा गांव निवासी 65 वर्षीय रतन सिंह पेशे से किसान हैं। इनके पिता छैलू राम ब्रिटिश सेना में जमादार (वर्तमान नायब सूबेदार के समकक्ष) के पद पर थे। वर्ष 1914 से 1918 तक चले प्रथम विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश उपनिवेश रहे भारत की ओर से हिस्सा लेते हुए रतन सिंह ने अपने पराक्रम का प्रदर्शन किया था। सेना के 48 पायनियर ब्रिगेड में तैनात रहे छैलू राम के वीरता से कायल होकर ब्रिटिश सेना ने उन्हें सर्वोच्च पुरस्कार विक्टोरिया क्रॉस से नवाजा गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसकी निशानी आज भी उनके परिजनों के पास मौजूद है। मगर दुर्भाग्य है कि सरकारी रिकार्ड में छैलू राम का कहीं कोई नाम नहीं है। बताते हैं कि तत्कालीन त्रुटियों के कारण छैलू राम का नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं हो पाया और फिर आज तक वही स्थिति है। युद्ध के सौ वर्ष पूरे होने के बाद अब अपने पिता के नाम को पहचान दिलाने के लिए रतन सिंह ने कवायद शुरू की है।

न पेंशन बना, न कोई रिकार्ड

indian soldiar relu ram honoured british army at first world war

रतन सिंह के मुताबिक उनके पिता का निधन वर्ष 1947 में हुआ था, तब वह महज 11 माह के थे। परिवार में मां अकेली थी। कोई अन्य सहारा न होने के कारण न तो मां की पेंशन बन पाई और न ही कोई अन्य रिकार्ड। बाद में वह भी इसे भूल गए थे।

बीते वर्ष प्रथम विश्व युद्ध के सौ वर्ष पूरे होने के बाद सैनिक परिवारों को सम्मानित किया गया, लेकिन उन्हें कोई निमंत्रण तक नहीं आया। इस बारे में जब जानकारी ली तो पता चला कि पिताजी का नाम कहीं किसी रिकार्ड में ही नहीं है।

रतन के मुताबिक अब उनके जीवन का यही मकसद है। पिता के नाम को रिकार्ड में दर्ज कराना है। उन्हें कोई और सुविधा नहीं चाहिए, बस सम्मान मिल जाए, यही बहुत है। वह जल्द ही इसके लिए उपायुक्त से भी मिलेंगे।

सेकेंड वर्ल्ड वार में विक्टोरिया क्रॉस विजेता छैलू राम के नाम से यहां रेस्ट हाउस बना है। फर्स्ट वर्ल्ड वार में भी इस नाम के किसी को यह मेडल मिला था, यह फिलहाल मेरे संज्ञान में नहीं है। रिकार्ड चेक कराएंगे। सम्बन्धित परिजनों के पास भी कोई रिकार्ड है तो उसे भी देखकर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
-लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) सरिता यादव, सेक्रेट्री, जिला सैनिक बोर्ड।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed