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एक पोस्ट जो आज भी भारत के कब्जे में है, पाकिस्तान की हिम्मत नहीं कि छुड़ा सकें...

Wed, 13 Dec 2017 09:38 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 13 Dec 2017 09:38 AM IST
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Indian occupied pakistan post, indian army bravery
India Pakistan Border
कश्मीर घाटी स्थित एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) के नौशेरा सेक्टर में इंडियन आर्मी के पराक्रम की एक मिसाल आज भी कायम है। यह मिसाल जहां पाकिस्तान के लिए पिछले 34 सालों से टीस बनी हुई है, वहीं इस बात से खिझा पाकिस्तान आज भीइस सेक्टर को हमेशा डिर्स्टब करने में लगा रहता है। पाक इस सेक्टर में आए दिन सीज फायर का उल्लंघन कर फायरिंग व गोलाबारी करता रहता है। जबकि भारतीय सेना भी पाक की इस गुस्ताखियों का जवाब देने में पीछे नहीं रहती।
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घुसपैठ, तस्करी का सेफ जोन थी नौशेरा सेक्टर की चौकी
पाकिस्तान ने नौशेरा सेक्टर में एलओसी पार अपनी हद में एक चौकी स्पेशल घुसपैठियों और नशा तस्करों को सेफ कवर देने के लिए बनाई हुई थी। इस चौकी से पाकिस्तान आए दिन फायरिंग और गोलाबारी करता रहता था। इंडियन फोर्स भी इससे डिस्टर्ब होती और इसी आड़ में घुसपैठिए और नशा तस्कर  भारतीय सीमाओं में घुस जाते थे। काफी समय तक यह सिलसिला चलता रहा।
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अंतत: भारतीय सरकार ने 1983 में फैसला किया कि इस चौकी को नेस्तनाबूद कर दिया जाए। इसके लिए इंडियन फोर्स की दो विभिन्न रेजिमेंटों की टुकड़ियों को यह जिम्मेवारी दी गई थी। लेकिन इस चौकी के थोड़ी दूरी पर ही पाकिस्तान की एक और चौकी होने की वजह से इस पोस्ट पर कब्जा करना मुश्किल था। अंतत: यह टास्क गोरखा रेजिमेंट को दी गई और जनवरी 1983 में गोरखा रेजिमेंट ने इस चौकी पर हमला कर अपने कब्जे में ले लिया।
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तीन पाक जवान मारे, सात भाग खड़ हुए थे

Indian occupied pakistan post, indian army bravery
भारत-पाकिस्तान बार्डर - फोटो : File Photo
तीन पाक जवान मारे, सात भाग खड़ हुए थे
इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाली गोरखा रेजिमेंट के तत्कालीन कैप्टन (अब रिटायर्ड कर्नल) अमरेक सिंह वाले ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि यह पोस्ट बहुत ज्यादा प्राब्लम बनती जा रही थी।

पाकिस्तान यहां से फायरिंग और गोलाबारी कर इंडियन फोर्स का ध्यान अपनी ओर खींचते थे और इसकी आड़ में घुसपैठिये और नशा तस्कर एलओसी पार कर देश में दाखिल हो जाते थे। इसलिए हाईकमान के आदेश पर इस चौकी पर हमला कर अपने कब्जे में लिया गया। उनके अनुसार इस ऑपरेशन में पाक के 3 जवान मार गिराए थे और 7 से 8 जवान भाग खड़े हुए थे।

जबकि गोरखा रेजिमेंट की टुकड़ी का सिर्फ एक जवान घायल हुआ था। उनके अनुसार आज भी इस सेक्टर की संबंधित पोस्ट पर भारतीय सेना का कब्जा है, जिसे लेकर पाकिस्तान खिझा बैठा है, इसलिए आज भी इसी सेक्टर को लगातार डिस्टर्ब करने की कोशिशों में लगा हुआ है।
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