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Chandigarh: देश का पहला ‘सेनकॉप्स’ तैयार, साइबर सुरक्षा तंत्र होगा मजबूत, दिसंबर में गृहमंत्री करेंगे उद्घाटन
Wed, 15 Nov 2023 10:27 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 15 Nov 2023 10:27 AM IST
सार
इस केंद्र के चालू होने पर शुरुआती तीन वर्ष तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) इसे चलाएगा। इसके संचालन के अलावा डीआरडीओ कानून लागू करने से जुड़े पेशेवरों को गहन प्रशिक्षण भी देगा। इसके तहत साइबर ठगी के मामलों से जुड़ी जटिलताओं से निपटने और अग्रणी विश्लेषणात्मक तकनीकों के इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाएगी।
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गृह मंत्री अमित शाह।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
देश का पहला साइबर ऑपरेशन एवं सुरक्षा केंद्र ‘सेनकॉप्स’ जल्द ही चालू हो जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री दिसंबर के पहले या तीसरे सप्ताह में इसका उद्घाटन करने चंडीगढ़ पहुंच सकते हैं। सेक्टर-18 भारतीय वायु सेना के विरासत केंद्र की इमारत में इसे बनाया गया है। इसके संचालित होने से भारत का साइबर सुरक्षा तंत्र और भी मजबूत हो जाएगा।
इस केंद्र के जरिए साइबर अपराधों के जटिल मामलों को सुलझाना भी आसान होगा। इससे पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख को भी साइबर अपराधों से निपटने में सहायता प्रदान की जाएगी।
यह भी पढ़ें: खुलासा: पंजाब में पराली प्रबंधन की मशीनें खरीदने में 140 करोड़ का घोटाला, केंद्र ने रोकी सब्सिडी
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88 करोड़ की लागत से हुआ तैयार
लगभग 88 करोड़ रुपये की लागत से इसे तैयार किया गया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसी वर्ष मई में इस केंद्र की आधारशिला रखी थी। इस साइबर सुरक्षा केंद्र में कई विशेषताएं हैं, जिनमें फेशियल रिक्गनिशन, डाटा विश्लेषण, पूर्वानुमानित पुलिस, साक्ष्य इकट्ठे करना और फोरेंसिक जांच क्षमताओं को बढ़ाना आदि है।
डीआरडीओ संभालेगा कमान
इस केंद्र के चालू होने पर शुरुआती तीन वर्ष तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) इसे चलाएगा। इसके संचालन के अलावा डीआरडीओ कानून लागू करने से जुड़े पेशेवरों को गहन प्रशिक्षण भी देगा। इस कार्यक्रम के तहत साइबर ठगी के मामलों से जुड़ी जटिलताओं से निपटने और अग्रणी विश्लेषणात्मक तकनीकों के इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाएगी। वहीं, साइबर अपराध से जुड़ी परिस्थितियों को समझने और संबंधित डाटा के मूल्यांकन की तकनीके भी सिखाई जाएंगी।
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इस केंद्र के जरिए साइबर अपराधों के जटिल मामलों को सुलझाना भी आसान होगा। इससे पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख को भी साइबर अपराधों से निपटने में सहायता प्रदान की जाएगी।
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88 करोड़ की लागत से हुआ तैयार
लगभग 88 करोड़ रुपये की लागत से इसे तैयार किया गया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसी वर्ष मई में इस केंद्र की आधारशिला रखी थी। इस साइबर सुरक्षा केंद्र में कई विशेषताएं हैं, जिनमें फेशियल रिक्गनिशन, डाटा विश्लेषण, पूर्वानुमानित पुलिस, साक्ष्य इकट्ठे करना और फोरेंसिक जांच क्षमताओं को बढ़ाना आदि है।
डीआरडीओ संभालेगा कमान
इस केंद्र के चालू होने पर शुरुआती तीन वर्ष तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) इसे चलाएगा। इसके संचालन के अलावा डीआरडीओ कानून लागू करने से जुड़े पेशेवरों को गहन प्रशिक्षण भी देगा। इस कार्यक्रम के तहत साइबर ठगी के मामलों से जुड़ी जटिलताओं से निपटने और अग्रणी विश्लेषणात्मक तकनीकों के इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाएगी। वहीं, साइबर अपराध से जुड़ी परिस्थितियों को समझने और संबंधित डाटा के मूल्यांकन की तकनीके भी सिखाई जाएंगी।
साइबर अपराध के पैटर्न को गहराई से समझा जा सकेगा
सेनकॉप्स एक बहु-कार्यात्मक साइबर विश्लेषण केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके तहत साइबर अपराध की पहचान की दिशा में गहराई से काम किया जा सकेगा। इसके तहत डाटा की निरीक्षण होगा। इसके तहत पैटर्न के जरिए समझा जाएगा कि किस प्रकार से अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है। वहीं, ऑनलाइन धोखाधड़ी में और कौन से नए ट्रेंड आ रहे हैं, यहां से जुटाई गई जानकारी को कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा ताकि वह संबंधित कार्रवाई कर सकें।
साइबर अपराधियों के इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों का होगा विश्लेषण
सेनकॉप्स में साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों के हार्डवेयर का विश्लेषण भी किया जाएगा। इनमें मोबाइल फोन, लेपटॉप, कैमरा और ड्रोन आदि शामिल होंगे। ऐसे में ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी के मामलों को जल्द सुलझाने में मदद मिलेगी। सेनकॉप्स सोशल मीडिया की भी निगरानी करेगा। वहीं विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डाटा का मूल्यांकन किया जागा ताकि पूर्वानुमानित पुलिस के प्रयास किए जा सकें।
हैकिंग के प्रयास में अलर्ट जारी होगा
सेनकॉप्स के जरिए डाटा भी सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसके लिए केंद्र कई विभागों के साथ मिल कर काम करेगा। इनमें कई संस्थाएं और सरकारी संगठन भी शामिल होंगे। ऐसे में डाटा को हैकर्स से बचाया जा सकेगा और संवेदनशील जानकारी को लीक होने से बचाया जा सकेगा। जानकारी के मुताबिक सभी सरकारी विभाग इस केंद्र से लिंक होंगे और किसी भी प्रकार की हैकिंग के प्रयास पर एक अलर्ट जारी होगा।
सेनकॉप्स एक बहु-कार्यात्मक साइबर विश्लेषण केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके तहत साइबर अपराध की पहचान की दिशा में गहराई से काम किया जा सकेगा। इसके तहत डाटा की निरीक्षण होगा। इसके तहत पैटर्न के जरिए समझा जाएगा कि किस प्रकार से अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है। वहीं, ऑनलाइन धोखाधड़ी में और कौन से नए ट्रेंड आ रहे हैं, यहां से जुटाई गई जानकारी को कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा ताकि वह संबंधित कार्रवाई कर सकें।
साइबर अपराधियों के इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों का होगा विश्लेषण
सेनकॉप्स में साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों के हार्डवेयर का विश्लेषण भी किया जाएगा। इनमें मोबाइल फोन, लेपटॉप, कैमरा और ड्रोन आदि शामिल होंगे। ऐसे में ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी के मामलों को जल्द सुलझाने में मदद मिलेगी। सेनकॉप्स सोशल मीडिया की भी निगरानी करेगा। वहीं विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डाटा का मूल्यांकन किया जागा ताकि पूर्वानुमानित पुलिस के प्रयास किए जा सकें।
हैकिंग के प्रयास में अलर्ट जारी होगा
सेनकॉप्स के जरिए डाटा भी सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसके लिए केंद्र कई विभागों के साथ मिल कर काम करेगा। इनमें कई संस्थाएं और सरकारी संगठन भी शामिल होंगे। ऐसे में डाटा को हैकर्स से बचाया जा सकेगा और संवेदनशील जानकारी को लीक होने से बचाया जा सकेगा। जानकारी के मुताबिक सभी सरकारी विभाग इस केंद्र से लिंक होंगे और किसी भी प्रकार की हैकिंग के प्रयास पर एक अलर्ट जारी होगा।