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नायब सूबेदार सतनाम सिंह गलवां घाटी में शहीद, पत्नी-बच्चों को अभी नहीं दी गई शहादत की खबर
Thu, 18 Jun 2020 09:25 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, गुरदासपुर (पंजाब)
अमर उजाला, गुरदासपुर (पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 18 Jun 2020 09:25 AM IST
सार
- आर्मी में तैनात बड़े भाई सूबेदार सुखचैन सिंह बोले- बच्चों को नौकरी दे सरकार
- गांव में चीन के खिलाफ गुस्सा, 24 घंटे में गांव पहुंच सकता है पार्थिव शरीर
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नायब सूबेदार सतनाम सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
थाना घुम्मन कलां के गांव भोजराज में माहौल उस समय गमगीन हो गया, जब लोगों को पता चला कि उनके गांव का बेटा सतनाम सिंह (42) पुत्र जगीर सिंह लद्दाख में सीमा की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। शहीद सतनाम सिंह की शहादत की खबर के बाद लोगों में चीन के खिलाफ गुस्से की लहर है। वहीं शहादत की खबर अभी तक शहीद की पत्नी, माता-पिता और बच्चों को नहीं बताई जा रही है। उन्हें सिर्फ इतना बताया गया है कि सतनाम सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उनका उपचार चल रहा है।
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शहीद नायब सूबेदार सतनाम सिंह 3 मीडियम रेजिमेंट लद्दाख में तैनात थे। सतनाम सिंह का जन्म 18 जनवरी 1979 को हुआ और उन्होंने 23 अगस्त 1995 को आर्मी ज्वाइन की थी। पत्नी जसविंदर कौर और दोनों बच्चों को पिता के शहीद होने की अभी खबर नहीं है। शहीद की बेटी संदीप कौर (17) और बेटा प्रभजोत सिंह (16) दादी कश्मीर कौर के पास बैठे थे। भाई सुखचैन सिंह भी फौज में सूबेदार हैं। वह हैदराबाद से छुट्टी पर घर आए हैं।
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शहादत की खबर सबसे पहले भाई सुखचैन सिंह को अन्य लोगों से रात को मिली। सुखचैन सिंह ने बताया कि आधिकारिक तौर पर भी उन्हें शहादत संबंधी नहीं बताया गया है। उन्होंने परिवार में भी इस संबंध में इतना ही बताया है कि वह घायल हो गए हैं उन्हें चोटें आईं हैं। भाई सुखचैन सिंह ने बताया कि शहीद का पार्थिव शरीर लद्दाख पहुंच चुका है और 24 घंटे के अंदर आने की संभावना है। उन्होंने सरकार से मांग की कि शहीद के बच्चों को नौकरी दी जाए।
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