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झूठा केस दर्ज करने पर SI और कांस्टेबल को भरना होगा भारी हर्जाना

Tue, 04 Oct 2016 01:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 04 Oct 2016 01:36 AM IST
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In a false cases SI and the constable will fill the damages
कोर्ट - फोटो : Demo Pic
एडवोकेट के खिलाफ एक्सीडेंट का झूठा केस दर्ज करने के मामले में जिला अदालत ने सेक्टर-26 बापूधाम चौकी में तैनात एसआई हरभजन सिंह और कांस्टेबल विजय कुमार को पांच-पांच लाख रुपये हर्जाना भरने का आदेश दिया है। यह रुपये याचिकाकर्ता एडवोकेट को देने होंगे। खरड़ निवासी शिकायतकर्ता एडवोकेट गुरपाल सिंह बैंस जिला अदालत में प्रैक्टिस करते हैं।
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एडवोकेट गुरपाल सिंह के अनुसार, 3 जून, 2006 को बापूधाम चौकी में तैनात एसआई हरभजन तत्कालीन जिला अदालत की बिल्ड़िग, सेक्टर-17 के बार रूम में आए। उन्हाेंने कहा कि उनकी कार सीएच-07जैड 7812 एक सड़क हादसे में शामिल है और उनके खिलाफ केस दर्ज है। इसलिए याचिकाकर्ता एडवोकेट को सरेंडर करने के लिए कहा।
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एडवोकेट के खिलाफ लापरवाही व उतावलेपन में ड्राइविंग कर चोट पहुंचाने व जान लेने की धाराओं के तहत  सेक्टर-26 थाने में केस दर्ज करने का हवाला दिया गया था। कांस्टेबल विजय ने यह एफआईआर दर्ज की थी। इसमें हादसा दो जून 2006 की रात सवा 10 बजे का बताया गया था।
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वहीं, याचिकाकर्ता के मुताबिक उनकी कार पुलिस चौकी, मलोया की कस्टडी में शाम 6 बजे से थी। जो कि 8 जून को रिलीज हुई। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उनके खिलाफ एक्सीडेंट का झूठा केस दर्ज किया गया था। मामले में याचिकाकर्ता ने एसएसपी से केस की दोबारा जांच करने की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

एडवोकेट के खिलाफ दर्ज किया था एक्सीडेंट में जान लेने का झूठा केस

In a false cases SI and the constable will fill the damages
चंडीगढ़ पुलिस - फोटो : file photo
4 जुलाई 2006 को तत्कालीन बापूधाम चौकी इंचार्ज एसआई वेद पाल मलिक ने याचिकाकर्ता को कार के मैकेनिकल चेकअप के लिए बुलाया। वहां पर एसआई हरभजन ने गैरकानूनी तरीके से उन्हें हिरासत में ले लिया। 2 महीने बाद एसआई हरभजन याचिकाकर्ता के पास आया और कहा कि वह मामले में चालान दायर करने वाला है।

वह कोर्ट से जमानत ले लें। कांस्टेबल विजय ने अपने बयान में कोर्ट में कहा था कि याचिकाकर्ता ही घटना के समय कार चला रहा था। ऐसे में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में मामले की रि-इवेस्टिगेशन की मांग करते हुए याचिका दायर की। इसके बाद एसआई हरभजन से अर्जी रद्द करने की मांग की थी। 

आरटीआई में याचिकाकर्ता ने पुलिस एक्ट की धारा 25 के तहत मलोया चौकी द्वारा कब्जे में ली गई उनकी कार की कागजी कार्रवाई व पीसीआर की लॉग बुक एंट्रीज की जानकारी मांगी। बताया गया कि संबंधित कार मलोया चौकी एरिया में मस्जिद के पास लावारिस हालत में खड़ी देख एक व्यक्ति की शिकायत पर कब्जे में ली गई थी। इसे उन्होंने हाईकोर्ट में पेश किया। इस पर हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल, 2008 को दोबारा जांच के आदेश दिए। डीएसपी साउथ और ईस्ट ने जांच कर रिपोर्ट एसीजेएम की कोर्ट में पेश की। इसमें उन्होंने पाया कि याचिकाकर्ता को संबंधित एफआईआर में झूठा फंसाया गया है।

रिपोर्ट के आधार पर एसीजेएम कोर्ट ने 22 अगस्त, 2008 को एडवोकेट गुरपाल सिंह बैंस को संबंधित केस में आरोपमुक्त कर दिया था। इसके बाद एसएसपी को एसआई हरभजन और कांस्टेबल विजय को उन्हें झूठे केस में फंसाने को लेकर कार्रवाई की मांग की गई। इस पर एसएसपी ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने 50 लाख रुपये मुआवजे के लिए केस दायर किया गया था। 
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