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कोरोना से बचाव के लिए आईएमए ने गठित की समन्वय समिति
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चंडीगढ़। कोरोना के बढ़ते चक्र को रोकने के लिए आईएमए अब स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर व्यापक स्तर पर जागरूक कार्य करेगा। इसके लिए आईएमए ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर एक समन्वय समिति का गठन किया है। इस समिति में शामिल डॉक्टर लोगों को जागरूक करने के साथ ही कोरोना से बचाव की रणनीति पर मिलकर मंथन करेंगे, ताकि मरीजों की बढ़ती संख्या पर काबू पाया जा सके।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश धीर ने बताया कि लोगों को सबसे पहले अपने दिमाग से यह बात निकालनी होगी कि कोरोना से बचाव संभव नहीं है। एहतियात से इस बीमारी से पूरी तरह बचाव संभव है। बस मास्क, सैनिटाइज के प्रयोग के साथ ही व्यक्तिगत साफ सफाई का ध्यान रखना होगा। आईएमए के वरिष्ठ सदस्य डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि प्रशासके वीपी सिंह बदनौर के कुशल नेतृत्व में चंडीगढ़ प्रशासन ने बड़ी तत्परता और बुद्धिमत्ता के साथ स्थिति का सामना किया है। स्वास्थ्य विभाग ने जल्दी पता लगाने के लिए ट्रेसिंग और उचित उपचार के लिए कई कदम उठाए हैं, जिससे आम जनता में भारी विश्वास पैदा हुआ है।
चंडीगढ़ में कोरोना के संदिग्ध व्यक्तियों के घर के बाहर स्टिकर चिपकाना एक अनूठा विचार था जिसे अन्य राज्यों द्वारा भी व्यापक रूप से सराहा और कार्यान्वित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के प्रयास से ही सरकारी के साथ ही सभी निजी अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। आईएमए डॉक्टर अपने मरीजों का टेली मेडिसिन के जरिये इलाज करने के साथ ही उन्हें कोरोना से बचाव की जानकारी भी दे रहे हैं। इससे पहले कोरोना वारियर्स की सुरक्षा के लिए डायरेक्ट हेल्थ डॉ. जी दिवान को 1000 लीटर हैंड सैनिटाइजर भी दान किया है।
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आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश धीर ने बताया कि लोगों को सबसे पहले अपने दिमाग से यह बात निकालनी होगी कि कोरोना से बचाव संभव नहीं है। एहतियात से इस बीमारी से पूरी तरह बचाव संभव है। बस मास्क, सैनिटाइज के प्रयोग के साथ ही व्यक्तिगत साफ सफाई का ध्यान रखना होगा। आईएमए के वरिष्ठ सदस्य डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि प्रशासके वीपी सिंह बदनौर के कुशल नेतृत्व में चंडीगढ़ प्रशासन ने बड़ी तत्परता और बुद्धिमत्ता के साथ स्थिति का सामना किया है। स्वास्थ्य विभाग ने जल्दी पता लगाने के लिए ट्रेसिंग और उचित उपचार के लिए कई कदम उठाए हैं, जिससे आम जनता में भारी विश्वास पैदा हुआ है।
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चंडीगढ़ में कोरोना के संदिग्ध व्यक्तियों के घर के बाहर स्टिकर चिपकाना एक अनूठा विचार था जिसे अन्य राज्यों द्वारा भी व्यापक रूप से सराहा और कार्यान्वित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के प्रयास से ही सरकारी के साथ ही सभी निजी अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। आईएमए डॉक्टर अपने मरीजों का टेली मेडिसिन के जरिये इलाज करने के साथ ही उन्हें कोरोना से बचाव की जानकारी भी दे रहे हैं। इससे पहले कोरोना वारियर्स की सुरक्षा के लिए डायरेक्ट हेल्थ डॉ. जी दिवान को 1000 लीटर हैंड सैनिटाइजर भी दान किया है।
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