Chandigarh: नियमों की धज्जियां... एक लाइसेंस पर लगा रहे तीन फड़ी, कई वेंडर बिना रजिस्ट्रेशन चला रहे दुकानदारी
सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ के गांवों, गलियों और मुख्य बाजारों का एक-एक इंच अवैध वेंडरों को बिक चुका है। यह सब निगम के अफसरों और इन्फोर्समेंट विंग के साथ-साथ कुछ नेताओं की मिलीभगत से चल रहा है।
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पंजाब व हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में अवैध वेडरों का कब्जा है। शहर में वेंडरों की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। कोर्ट ने हलफनामे में स्पष्ट करने को कहा है कि शहर में वेंडर जोन कितने हैं, कितने लाइसेंस जारी किए गए और अवैध वेंडरों पर क्या कार्रवाई की गई।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि शहर के गांवों, गलियों और मुख्य बाजारों का एक-एक इंच अवैध वेंडरों को बिक चुका है। यह सब निगम के अफसरों और इन्फोर्समेंट विंग के साथ-साथ कुछ नेताओं की मिलीभगत से चल रहा है। कुछ महीने पहले इन्फोर्समेंट विंग के एक कर्मचारी ने वीडियो जारी कर इसका खुलासा भी किया था।
जिस मध्यमार्ग से रोजाना प्रशासन के आला अफसर गुजरते हैं, वहां भी अवैध वेंडरों ने कब्जा कर रखा है। सेक्टर-9, 8, 7 और 26 में 40 से ज्यादा अवैध वेंडर बैठे हुए हैं। इन पर निगम का इन्फोर्समेंट विंग कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। कारण...इन वेंडरों को नेताओं और खुद इन्फोर्समेंट विंग के इंस्पेक्टरों ने बैठा रखा है। नगर निगम के सरकारी आंकड़ों की अगर बात करें तो शहर 11,796 लाइसेंसी वेंडर हैं। इसके अलावा 5 हजार मोबाइल वेंडर हैं और ये शहरभर में घूम-घूमकर सामान बेचते हैं। हकीकत ये हैं कि इस समय शहरभर में 25 से 30 हजार अवैध वेंडर बैठे हुए हैं। कोई वेंडर एक लाइसेंस पर तीन जगहों पर रेहड़ी-फड़ी लगा रहा तो कोई दूसरे के लाइसेंस पर बैठा हुआ है।
सेक्टर-9 डी और सी में इन जगहों पर 5 साल से अवैध वेंडरों का कब्जा
- सेक्टर-9 डी के पब्लिक टॉयलेट के साथ पार्किंग में छोले कूलचे वाला बिना लाइसेंस के बैठा है।
- सिटको पेट्रोल पंप के साथ लगती खाली जमीन पर एक लाइसेंसी वेंडर बैठा है लेकिन उसने एक होटल व रेस्टोरेंट की तरह कम से कम 50 लोगों की बैठने के लिए और 10 गैस चूल्हा जलाने के लिए सरकारी जमीन पर कब्जा कर जगह घेर रखी है। बड़ी बात ये कि निगम का इन्फोर्समेंट विंग इस लाइसेंसी वेंडर के पास आकर एक-दो हजार का चालान कर छोड़ देता है।
- सेक्टर-9सी मध्यमार्ग पर सिटको पेट्रोल पंप के आगे बैंकों के आगे दो अवैध वेंडर बैठे हैं। एक का नाम पाटन और दूसरे का नाम जस्सी है। इन दोनों के पास वेंडर लाइसेंस नहीं है। पाटन नाम का वेंडर अपनी दूसरी दुकान के लाइसेंस पर इन्फोर्समेंट विंग के अधिकारियों के सेटिंग के साथ काम कर रहा है। इसी तरह मार्केट में बैंकों के पीछे एक महिला उर्मिला देवी बिना लाइसेंस के चाय-परांठा की दुकान चला रही है।
सेक्टर-8, 7 और 26 में भी चाय, पान, परांठा की अवैध दुकानें
सेक्टर-8, 7 और 26 मध्यमार्ग पर कई होटल, रेस्टोरेंट और टाइल्स व बैंकों के आगे अवैध वेंडर बैठे हुए हैं। इनमें से कई अवैध वेंडरों को तो दुकानदारों ने ही बैठा रखा है। शोरूम के आगे जगह देकर इनसे पांच से 10 हजार रुपये महीना किराया वसूला जा रहा है। इन्फोर्समेंट विंग महीने-डेढ़ महीने में एक बार चक्कर लगाकर छोटा-मोटा सामान जब्त कर और एक से दो हजार रुपये का चालान कर इन अवैध वेंडरों को भूल जाता है। सेक्टर-8 में रिंकू नाम का युवक राजमा-चावल की रेहड़ी लगाता है। सेक्टर-7 में ओवरसीज बैंक के पास एक वेंडर बैठा है। इसी शोरूमों के आगे पब्लिक के चलने वाले कॉरिडोर में भी अवैध कब्जे हो रखे हैं।
पूर्व कर्मचारी ने इन्फोर्समेंट विंग में वसूली को लेकर किया था खुलासा
इन्फोर्समेंट विंग के पूर्व कर्मचारी विकास का बीते अगस्त में एक वीडियो सामने आया था। वीडियो में उसने वसूली के आरोप लगाए थे। विकास ने कहा था कि दो-तीन को छोड़कर सभी इंस्पेक्टर हर महीने वेंडरों से लाखों रुपये कमा रहे हैं। उसने यहां तक कहा था कि वह पिछले ढाई साल से एक इंस्पेक्टर के लिए पैसे इकट्ठा करता था, अब और ज्यादा वसूली का दबाव बनाया जा रहा था। मना करने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया। वीडियो में विकास ने कहा था कि जिन वेंडरों के पास लाइसेंस नहीं है उनसे 2000-3000 रुपये लिए जाते हैं। वो खुद कई लाख रुपये इकट्ठा कर एक इंस्पेक्टर देता था।
क्या कहते हैं अधिकारी
नगर निगम का इन्फोर्समेंट विंग लगातार अवैध वेंडरों पर कार्रवाई कर रहा है। जिन वेंडरों को लाइसेंस मिले हैं उनकी भी चेकिंग कराई जा रही है कि वह अतिक्रमण को तो कहीं बढ़ावा नहीं दे रहे हैं। वेंडरों वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो ऑर्डर किये हैं, वह अभी नहीं मिले हैं। ऑर्डर में जो भी कहा गया होगा उस पर नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। -अमित कुमार, आयुक्त, नगर निगम