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चंडीगढ़ः धड़ल्ले से चल रहे 'मौत के पीजी', मात्र एक ने ली अनुमित, प्रशासन बोला- नहीं मिली कोई सूची

Sun, 23 Feb 2020 09:25 AM IST
ajay kumar नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 23 Feb 2020 09:25 AM IST
सार

  • शहर में धड़ल्ले से चल रहे पीजी, मात्र एक ने ली है अनुमति।
  • 100 से ज्यादा पीजी संचालकों के खिलाफ एसडीएम कोर्ट में चल रहे हैं केस।

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Illegal PGs run in Chandigarh
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में धड़ल्ले से प्रशासन की आंखों के सामने घरों में पीजी चल रहे हैं और अफसर केस की सुनवाई तक ही सीमित हैं। एस्टेट ऑफिस के मुताबिक आज तक मात्र एक ही पीजी को प्रशासन से अनुमति दी गई है। अन्य किसी भी व्यक्ति ने आवेदन ही नहीं किया है। फिलहाल शहर के तीनों एसडीएम कोर्ट में 100 से ज्यादा पीजी संचालकों के खिलाफ केस चल रहे हैं। सबसे ज्यादा केस एसडीएम साउथ की अदालत में हैं।

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शहर के लोगों की लापरवाही और अधिकारियों की अनदेखी का परिणाम शनिवार को तीन छात्राओं को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। सेक्टर 32 में जिस पीजी में लड़कियां रह रहीं थीं, संचालक ने उसकी अनुमति नहीं ली थी। समय रहते अधिकारी चेत जाते तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता। असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर मनीष लोहान ने बताया कि समय-समय पर अधिकारी चेकिंग अभियान चलाते हैं। पिछले एक साल में लगभग 100 से ज्यादा पीजी संचालकों के खिलाफ नोटिस जारी कर एसडीएम कोर्ट में केस भेज दिया है। अन्य लोगों के खिलाफ भी जांच चल रही है।
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फायर ब्रिगेड विभाग ने नहीं दी किसी पीजी को एनओसी
प्रशासन के अलावा नगर निगम के फायर ब्रिगेड विभाग में आज तक किसी भी पीजी संचालक ने न तो फायर सेफ्टी एनओसी के लिए अप्लाई किया और न अधिकारियों ने चेकिंग की जहमत उठाई, जबकि फायर सेफ्टी विभाग की भी सेक्टरों में लगातार मॉकड्रिल करने और चेकिंग करने की जिम्मेदारी होती है। मॉकड्रिल के नाम पर भी विभाग के कर्मचारी सिर्फ खानापूर्ति करके आ जाते हैं।

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इन सेक्टरों में धड़ल्ले से चल रहे पीजी

Illegal PGs run in Chandigarh

शहर के सेक्टर 15, 20, 32, 22, 37, 38 में तीन मंजिल घरों में हॉस्टल की तर्ज पर धड़ल्ले से पीजी चल रहे हैं। एक कमरे में तीन से चार छात्र-छात्राएं रहती हैं। उसी कमरे में एक-एक अलमारी दे दी जाती है। किसी-किसी पीजी में अंदर मकान मालिक थोड़ा सामान रखकर एक रसोई भी दे देते हैं।

जहां सभी छात्र-छात्राएं मिलकर नाश्ता व खाना बना लेते हैं। मकान मालिक सभी से प्रति बेड के हिसाब से किराया लेते हैं। मकान मालिक बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के छात्र-छात्राओं रख रहे हैं। इसकी खबर अधिकारियों को भी है लेकिन चेकिंग या कार्रवाई की जहमत कौन उठाए।

दो परिवार से ज्यादा रहने पर होता है कॉमर्शियल प्रयोग
साल 2006 में बनाए गए नियमानुसार तीन मंजिल के मकान में एक या दो परिवारों को रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की श्रेणी में रखा जाता है। उससे ज्यादा संख्या में कहीं लोग रहते हैं तो वह लॉजिंग रूमिंग हाउस या डोरमेट्री की श्रेणी में रखे जाते हैं। यहां कॉमर्शियल उपयोग माना जाता है। इसकेलिए मकान मालिक को प्रशासन से अनुमति लेनी जरूरी होती है। उसके बाद फायर सेफ्टी एनओसी लेनी होती है।

सूरत हादसे के बाद 50 लोगों ने ली एनओसी

बीते मई माह में सूरत में एक कोचिंग संस्थान में आग लगने के बाद कई छात्र-छात्राओं की मौत हो गई थी। हादसे के बाद तत्परता दिखाते हुए चंडीगढ़ फायर ब्रिगेड विभाग ने शहर में 250 लोगों को नोटिस जारी किए थे। उसमें से अब तक मात्र 150 लोगों ने आवेदन किया है। वहीं, मात्र 50 लोगों को ही एनओसी दी गई है। शेष लोगों ने अब तक क्यों नहीं आवेदन किया, इसका विभाग के पास कोई जबाव नहीं है।

हमारी टीम लगातार चेकिंग करती है। कई पीजी संचालकों को हमने नोटिस भी दिए हैं। आरडब्ल्यूए के सदस्य व क्षेत्रीय लोग हमें सहयोग करेंगे तो गैर कानूनी तरीके से चल रहे पीजी को बंद किया जा सकता है। -मनीष लोहान, एईओ, चंडीगढ़

हमारी तरफ से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। लोगों को आग से बचाव के बारे में भी जागरूक किया जाता है। प्रशासन की तरफ से कोई ऐसी गैरकानूनी पीजी की सूची नहीं मिली, जहां कार्रवाई की जा सके। -अनिल गर्ग, चीफ फायर ऑफिसर

वर्ष 2006 के अनुसार ये हैं पीजी के नियम

- मकान मालिक को भी पीजी में रहने वाले व्यक्ति के साथ रहना जरूरी है। साथ ही साफ सफाई रखनी होगी।
- पीजी में एक व्यक्ति के लिए कम से कम 50 वर्ग फीट की जगह होनी जरूरी है।
- पब्लिक हेल्थ विभाग के नियमानुसार टॉयलेट भी अनिवार्य है। एक टॉयलेट केवल पांच लोगों के लिए ही होना चाहिए।
- पीजी के लिए एस्टेट ऑफिस से रजिस्ट्रेशन जरूरी है। इसमें मकान के पूरा रिकॉर्ड के साथ ही पेइंग गेस्ट की पूरी जानकारी पुलिस को होना जरूरी है।
- 10 मरले से कम जगह में पीजी नहीं बनना चाहिए।
- पीजी के लिए सरकार से अनुमति जरूरी है और उसके साथ ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी जरूरी है।
- मकान मालिक को अनुशासन बनाए रखना होगा ताकि आसपास के लोगों को समस्या न हो।
- पीजी के अंदर रहने वाले लोगों की लिस्ट भी लगानी होगी ताकि आपातकाल में जानकारी हो सके।
- पीजी में रह रहे लोगों के कर्मचारियों की जानकारी भी पुलिस में होनी चाहिए।
- पीजी में रहने वाले लोग भी मकान में होने वाली समस्या के लिए जिम्मेदार होंगे।
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