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शरीर पर तेजाब गिर जाए तो जानिए क्या करें

Tue, 14 Oct 2014 12:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 14 Oct 2014 12:16 PM IST
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If Acid burn Body, Immediatly do that

शरीर पर यदि तेजाब गिर जाए या व्यक्ति आग से झुलस जाए तो उसे करीब एक घंटे तक पानी की धार के नीचे बैठा देना चाहिए। ऐसा करने से अंदरूनी टिश्यू डैमेज होने से बच जाएंगे। इससे काफी हद तक घाव से बचाव किया जा सकता है। उसके बाद ही उसे पास के प्लास्टिक सर्जन से दिखाएं।

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यह कहना है पीजीआई प्लास्टिक सर्जन के एचओडी डा. रमेश कुमार शर्मा का। उन्होंने बताया कि जब तेजाब या कोई केमिकल शरीर में गिरता है तो वह ऊपर ही नहीं रहता, बल्कि अंदर जाता रहता है। जब यह अंदर चला जाता तो अंदरूनी टिश्यू को डैमेज करने लगता है।
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इसलिए जब भी ऐसी कोई दुर्घटना हो तो लोगों को सबसे पहले प्राथमिक इलाज के तौर पर उसे पानी की धार के नीचे बैठा देना चाहिए। कम से कम एक घंटे तो जरूर बैठाना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि पीजीआई की बर्न यूनिट वार्ड में ऐसे कुछ शॉवर भी बनाए गए हैं। जब भी ऐसा कोई पेशेंट आता है तो उससे शॉवर के नीचे बैठा दिया जाता है।

ऐसे कटा हाथ भी जुड़ जाएगा

If Acid burn Body, Immediatly do that

डा. रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि पंजाब व चंडीगढ़ के पेरीफेरी में कटाई की मशीन में हाथ फंसने के कई केस आते हैं। पीजीआई को ऐसे केस ठीक करने में महारत हासिल है।

उन्होंने बताया कि कई बार लोग कटे हाथ को बर्फ व ठंडे में पानी में डालकर ले आते हैं। इससे कटे हाथ के टिश्यू खराब हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि जब भी ऐसी कोई स्थिति बने तो लोगों को कटे हाथ को साफ पालीथिन में रखकर एक बाक्स में रखना चाहिए।

पालीथिन के चारों तरफ बर्फ रखे और बाक्स को बंद रख दें। आदर्श स्थिति यही है कि छह घंटे के अंदर उसे पीजीआई में पहुंच जाना चाहिए। यदि तय समय में पेशेंट आ जाता है तो उसके हाथ के जुड़ने की सौ फीसदी संभावनाएं रहती हैं।

जन्मजात विकृतियों से मिलेगा छुटकारा

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पीजीआई का प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट जल्द ही पल्स डाई लेजर ट्रीटमेंट शुरू करने जा रहा है। यह तकनीक देश के गिने-चुने संस्थानों में ही उपलब्ध है। इसके तहत बच्चों की जन्मजात विकृतियों को दूर करने में किया जाता है।

इसका प्रपोजल और रुपया भी पास हो चुका है। इसका प्रयोग किसी कट के लिए भी किया जा सकता है। इसी तरह से वरसा जेट का भी इंतजाम किया जा रहा है। इसमें डेड टिश्यू को हटाने में कारगर साबित होगा।

कुछ इस तरह की हो रही हैं प्लास्टिक सर्जरी
डा. रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट के पास 80 प्रतिशत केस ट्रामा व दूसरी सर्जरी के करता है, जबकि 20 प्रतिशत सर्जरी कास्मेटिक की।

इसमें प्रमुख रूप में से पुरुष की ब्रेस्ट सर्जरी, कैंसर पेशेंट और ब्रेस्ट सर्जरी केस आते हैं। उनके मुताबिक दस साल पहले 50 से 100 मरीज ओपीडी में आते थे, लेकिन अब इनकी संख्या 300 से ज्यादा पहुंच गई है।

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