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नेशनल हेराल्ड केस में बढ़ी IAS अधिकारियों की परेशानी, सीबीआई ने बनाया आरोपी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 09 Apr 2017 09:21 AM IST
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पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा
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एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड की सहयोगी कंपनी नेशनल हेराल्ड को प्लॉट आवंटन के मामले में सीबीआई ने पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के साथ हरियाणा के आईएएस अधिकारियों की भी दिक्कतें बढ़ा दी हैं। सीबीआई ने इस मामले में राज्य विजिलेंस ब्यूरो की ओर से दर्ज की गई पहली प्राथमिकी को आधार बनाया है, जबकि विजिलेंस जांच में इन अधिकारियों को क्लीन चिट दी जा चुकी है।
सीबीआई ने हाल ही में दर्ज एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के अलावा तत्कालीन हुडा प्रशासक विनीत गर्ग, हुड्डा के मुख्य प्रशासक रहे एसएस ढिल्लो और तत्कालीन वित्तायुक्त शकुंतला जाखू का नाम शामिल किया है। सीबीआई जांच से पहले इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो भी अपनी जांच कर चुका है। हरियाणा सरकार की ओर से यह मामला सीबीआई के हवाले किए जाने से पहले विजिलेंस ब्यूरो ने सरकार को अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी भेजी थी।
सूत्रों के अनुसार विजिलेंस ब्यूरो को इस मामले में दिए गए बयान में उपरोक्त आईएएस अधिकारियों ने कहा था कि उन्होंने अपने पद पर रहते हुए तत्कालीन सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। एक अन्य अधिकारी ने विजिलेंस को कहा था कि जिस समय आवंटन की यह कवायद चल रही थी उस समय वे चुनाव ड्यूटी पर थे। अब सीबीआई की ओर से नया केस दर्ज किए जाने के बाद हुड्डा के साथ-साथ इन अधिकारियों की भी दिक्कतें बढ़ गई हैं, क्योंकि सीबीआई जांच में उक्त अधिकारियाें से भी पूछताछ की जाएगी।
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यहां हुई चूक
दरअसल इस पूरे मामले में चूक यह हुई कि विजिलेंस ब्यूरो ने उक्त अधिकारियों को क्लीन चिट तो दे दी, लेकिन एफआईआर में से इनका नाम नहीं निकाला गया। सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने विजिलेंस से क्लीन चिट मिलने के बाद अपना नाम एफआईआर से निकलवाने के लिए कोशिश भी की थी, लेकिन सफलता हासिल नहीं हुई।
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सीबीआई ने हाल ही में दर्ज एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के अलावा तत्कालीन हुडा प्रशासक विनीत गर्ग, हुड्डा के मुख्य प्रशासक रहे एसएस ढिल्लो और तत्कालीन वित्तायुक्त शकुंतला जाखू का नाम शामिल किया है। सीबीआई जांच से पहले इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो भी अपनी जांच कर चुका है। हरियाणा सरकार की ओर से यह मामला सीबीआई के हवाले किए जाने से पहले विजिलेंस ब्यूरो ने सरकार को अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी भेजी थी।
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सूत्रों के अनुसार विजिलेंस ब्यूरो को इस मामले में दिए गए बयान में उपरोक्त आईएएस अधिकारियों ने कहा था कि उन्होंने अपने पद पर रहते हुए तत्कालीन सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। एक अन्य अधिकारी ने विजिलेंस को कहा था कि जिस समय आवंटन की यह कवायद चल रही थी उस समय वे चुनाव ड्यूटी पर थे। अब सीबीआई की ओर से नया केस दर्ज किए जाने के बाद हुड्डा के साथ-साथ इन अधिकारियों की भी दिक्कतें बढ़ गई हैं, क्योंकि सीबीआई जांच में उक्त अधिकारियाें से भी पूछताछ की जाएगी।
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यहां हुई चूक
दरअसल इस पूरे मामले में चूक यह हुई कि विजिलेंस ब्यूरो ने उक्त अधिकारियों को क्लीन चिट तो दे दी, लेकिन एफआईआर में से इनका नाम नहीं निकाला गया। सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने विजिलेंस से क्लीन चिट मिलने के बाद अपना नाम एफआईआर से निकलवाने के लिए कोशिश भी की थी, लेकिन सफलता हासिल नहीं हुई।