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चर्चा में अशोक खेमका: ट्वीट कर व्यक्त की मन की पीड़ा, लिखा- घूसखोरी करने वाले व्यवस्था को खरीदकर पा रहे पदोन्नति
Thu, 14 Apr 2022 04:43 PM IST
ajay kumar
डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 14 Apr 2022 04:43 PM IST
सार
सरकारी अधिकारियों में खेमका ईमानदारी का एक पर्याय माने जाते हैं। 1991 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मे खेमका ने आईआईटी खड़गपुर से 1988 में बीटेक किया था।
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आईएएस अशोक खेमका
- फोटो : फाइल
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विस्तार
हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका फिर चर्चा में हैं। इस बार भ्रष्टाचार और व्यवस्था को लेकर उनका दर्द झलका है। उनके पोस्ट पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है। अशोक खेमका ने ट्वीट किया कि भ्रष्टाचार को काबू करेंगे सब कहते हैं। लेकिन इसके लिए काफी जूझना पड़ता है। जो सब के बूते की बात नहीं। भ्रष्टाचार न हो तो देश कहां पहुंच गया होता। ऐसे लोग जिन पर घूसखोरी का मुकदमा चल रहा हो, वे भी उसी काले धन से व्यवस्था खरीद लेते है और प्रमोशन पाते है। कैसे रुकेगा भ्रष्टाचार?
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यूजर्स ने कुछ यूं दी प्रतिक्रिया
कई यूजर्स ने अशोक खेमका को आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि व्यवस्था को लीड कर ही आप इस गंदगी को खत्म कर सकते हैं। एक यूजर्स ने लिखा कि आप जैसे अधिकारी हर मंत्रालय में हो जाएं तो भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा। एक ने लिखा कि हरियाणा में आप के सीएम उम्मीदवार की कुर्सी आपका इंतजार कर रही है।
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कौन हैं अशोक खेमका
सरकारी अधिकारियों में खेमका ईमानदारी का एक पर्याय माने जाते हैं। 1991 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मे खेमका ने आईआईटी खड़गपुर से 1988 में बीटेक किया था। इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की। वह बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में एमबीए करने के साथ-साथ वकालत की डिग्री भी ले चुके हैं।
अपने तेज-तर्रार कार्यशैली की बदौलत लोगों के दिलोदिमाग में छाए रहे हैं। गुरुग्राम में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की जमीन सौदे से जुड़ी जांच के कारण अशोक खेमका ने अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं। वे भ्रष्टाचार को उजागर करने और अपने तबादले को लेकर हमेशा चर्चा में रहे हैं।
कहा जाता है कि वे जिस विभाग में जाते हैं, उनसे पहले उस विभाग की फाइलें समेटी जाने लगती हैं यानी वे जहां भी रहते हैं भ्रष्टाचार और घपलों को उजागर करते हैं। यही वजह है कि वह सिस्टम के निशाने पर आ जाते हैं और उन्हें तबादले का ‘ईनाम’ मिलता है। अशोक खेमका अप्रैल 2025 में सेवानिवृत्त होंगे।