फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   I will never forget the 100 rupees I got as a reward for the first time: Ashim Chaudhary

पहली बार मिले इनाम के 100 रुपये कभी नहीं भूलता: अशीम चौधरी

Wed, 12 Nov 2025 12:52 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Nov 2025 12:52 AM IST
विज्ञापन
I will never forget the 100 rupees I got as a reward for the first time: Ashim Chaudhary

विज्ञापन
चंडीगढ़। पहली बार मुझे इनाम के रूप में एक सौ रुपये मिला था। वह कभी भी नहीं भूल पाता, अभी भी याद है। यह बात 1976 की है जब जमशेदपुर में एक सितार वादन प्रतियोगिता में प्रथम रहा। तब मैं बहुत छोटा था। पांच वर्ष की उम्र से ही सितार सीख रहा हूं।
यह बात कोलकाता के प्रसिद्ध सितार वादक पंडित अशीम चौधरी ने कही। उन्होंने सेक्टर-35 के प्राचीन कला केंद्र के एमएल कौसर सभागार में मासिक बैठक के तहत आयोजित कार्यक्रम में मंगलवार को सितार वादन किया।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि कि सितार की तारें भी बात करती हैं। वे दो से तीन मिनट में सितार की तार भी ठीक कर देते हैं। एक बार घर पर ही प्रस्तुति के दौरान तार टूट गई थी। इस दौरान तबला वादक का साथ होता है। अब हर बार नया तार लगाकर ही बैठते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


पंडित अशीम चौधरी भारतीय शास्त्रीय संगीत में महान इमदाद खानी घराने की परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रतिष्ठित और स्थापित सितार वादक हैं। उन्हें संगीत से उनके पिता प्रसिद्ध तबला वादक शिबू चौधरी ने परिचित कराया। पांच वर्ष की आयु में उन्होंने स्वर्गीय उस्ताद बेंजामिन गोम्स के मार्गदर्शन में सितार सीखना शुरू किया। बाद में वे इमदाद खानी घराने के एक प्रमुख व्यक्ति आचार्य पंडित बिमलेंदु मुखर्जी के शिष्य बने।
गणित में स्नातकोत्तर उपाधि (एमएससी) और एमबीए होने के बावजूद उन्होंने खुद को देश के सर्वश्रेष्ठ सितार वादकों में से एक के रूप में सफलतापूर्वक स्थापित किया। वे ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) और दूरदर्शन के टॉप ग्रेड के सितार वादक हैं।
वे भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के एक स्थापित ग्रेड के पैनलबद्ध कलाकार हैं। उन्हें उनकी विलक्षण प्रतिभा के लिए कई पुरस्कार मिले हैं। इनमें पश्चिम बंगाल राज्य संगीत पुरस्कार (1989 में प्रथम स्थान) और श्रृंगेर संसद मुंबई से प्रतिष्ठित सुर मणि उपाधि शामिल है। उनका सितार डीडी अगरतला के सिग्नेचर ट्यून में शामिल था।

कार्यक्रम में अशीम चौधरी ने राग रागेश्री से कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद आलाप से शुरू करके जोड़ झाला का खूबसूरत प्रदर्शन किया। इसके पश्चात तीन ताल से सजी विलंबित गत पेश की। सितार पर खूबसूरत धुनों का प्रदर्शन करते अशीम की उंगलियों के जादू से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इसके बाद द्रुत ताल में निबद्ध मध्य लय तीन ताल में मधुर गतें प्रस्तुत की। कार्यक्रम का अंत इन्होंने भैरवी राग में सजी ठुमरी से किया से किया। पंडित देबाशीष अधिकारी ने तबला पर संगत की।
केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ.शोभा कौसर, सचिव सजल कौसर और मीरा मदान ने कलाकारों को सम्मानित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed