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मैं हर पल रहूंगा तुम्हारे शब्दकोष में..... डा. ललित
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Sun, 22 Dec 2013 09:22 AM IST
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मैं हर पल रहूंगा तुम्हारे शब्दकोश में, जिसे तुम बार-बार पढ़ना चाहोगी और तुम्हें पता चलेगा तुमसे कहां गलती हुई। कवि एवं नेशनल बुक ट्रस्ट के संपादक डॉ. लालित्य ललित की इन पंक्तियों से सेक्टर-14 स्थित अकादमी भवन ने खूब तारीफें बटोरी।
मौका था हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से अकादमी सभागार में 17वीं मासिक काव्य गोष्ठी के आयोजन का।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ और इसकी अध्यक्षता गोष्ठी की अध्यक्षता समालोचक एवं चिंतक डॉ. एमपी भारद्वाज ने की।
अकादमी के निदेशक डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ ने कार्यक्रम में शरीक हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान उर्मिला कौशिक ‘सखी’ की काव्य-कृति ‘कागज की पीठ पर’ का लोकार्पण सुप्रसिद्घ समालोचक व चिंतक डॉ. एमपी भारद्वाज, कवि डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ और कवि डॉ. लालित्य ललित की मौजूदगी में किया गया।
कागज की पीठ में 78 कविताओं का समावेश है, जो नारी सशक्तिकरण, सामाजिक व राजनीतिक विद्रूपताओं का स्वर मुखरित होता है व इन कविताओं में पारिवारिक स्तर पर जुड़ाव का आह्वान है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. एमपी भारद्वाज ने कहा इसके जरिए नए लेखकों को एक मंच मिलता है, जहां प्रौढ़ लेखकों के अनुभव से भी उन्हें अनुभव की प्राप्ति होती है।
उन्होंने रचना की उत्पत्ति के पीछे की व्याकुलता, प्रेरणा को कवियों से जानने का प्रयास अपने एक प्रश्न के माध्यम से किया कि क्या सृजनशीलता किसी व्याकुलता या बेचैनी का परिणाम है या यह कोई पराचेतना शक्ति है जो अभिव्यक्ति के लिए विवश करती है।
विशेष आमंत्रित कवि डॉ. लालित्य ललित ने अपनी साहित्यिक रचनाओं से श्रोताओं से खूब तारीफें बटोरी।
इस अवसर पर स्थानीय कवियों में विनोद कश्यप, गणेश दत्त, लक्ष्मी रूपल, संतोष, देवी दयाल सैनी, सतनाम सिंह एवं संदीप ने कविता पाठ किया।
अकादमी निदेशक के डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ ने धन्यवाद ज्ञापन किया और कविता की पंक्तियां भी सुनाई, जबकि मंच संचालन डॉ. विजेन्द्र ने किया।
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मौका था हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से अकादमी सभागार में 17वीं मासिक काव्य गोष्ठी के आयोजन का।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ और इसकी अध्यक्षता गोष्ठी की अध्यक्षता समालोचक एवं चिंतक डॉ. एमपी भारद्वाज ने की।
अकादमी के निदेशक डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ ने कार्यक्रम में शरीक हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान उर्मिला कौशिक ‘सखी’ की काव्य-कृति ‘कागज की पीठ पर’ का लोकार्पण सुप्रसिद्घ समालोचक व चिंतक डॉ. एमपी भारद्वाज, कवि डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ और कवि डॉ. लालित्य ललित की मौजूदगी में किया गया।
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कागज की पीठ में 78 कविताओं का समावेश है, जो नारी सशक्तिकरण, सामाजिक व राजनीतिक विद्रूपताओं का स्वर मुखरित होता है व इन कविताओं में पारिवारिक स्तर पर जुड़ाव का आह्वान है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. एमपी भारद्वाज ने कहा इसके जरिए नए लेखकों को एक मंच मिलता है, जहां प्रौढ़ लेखकों के अनुभव से भी उन्हें अनुभव की प्राप्ति होती है।
उन्होंने रचना की उत्पत्ति के पीछे की व्याकुलता, प्रेरणा को कवियों से जानने का प्रयास अपने एक प्रश्न के माध्यम से किया कि क्या सृजनशीलता किसी व्याकुलता या बेचैनी का परिणाम है या यह कोई पराचेतना शक्ति है जो अभिव्यक्ति के लिए विवश करती है।
विशेष आमंत्रित कवि डॉ. लालित्य ललित ने अपनी साहित्यिक रचनाओं से श्रोताओं से खूब तारीफें बटोरी।
इस अवसर पर स्थानीय कवियों में विनोद कश्यप, गणेश दत्त, लक्ष्मी रूपल, संतोष, देवी दयाल सैनी, सतनाम सिंह एवं संदीप ने कविता पाठ किया।
अकादमी निदेशक के डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ ने धन्यवाद ज्ञापन किया और कविता की पंक्तियां भी सुनाई, जबकि मंच संचालन डॉ. विजेन्द्र ने किया।