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Chandigarh News: नाटक में दिखाया इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म
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नाटक का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में परंपरा आर्ट्स की ओर से सात दिवसीय नाट्य उत्सव के दूसरे दिन सोमवार को नाटक मुकदमा का मंचन हुआ। ज्योति स्वरूप भारद्वाज ने निर्देशन में सृजन आर्ट्स चंडीगढ़ के कलाकारों ने मंचन किया। ज्योति स्वरूप भारद्वाज ने बताया कि नाटक मुकदमा व्यंग्यात्मक अदालती नाटक है। यह मानवता की बात करता है।
नाटक में दिखाया गया कि कई बार बाहर की दुनिया में घटित होने वाली अनेक घटनाएं हमें अंदर से झकझोर देती हैं। इससे हमारा ईश्वर से विश्वास उठ जाता है। हम अपने कर्मों को ईश्वर पर थोप देते हैं। यह नाटक कई प्रश्न उठाता है जैसे ईश्वर का स्वरूप क्या है। धर्म का स्वरूप, आस्तिकता, नास्तिकता क्या है। जब भी कोई इंसान किसी दूसरे इंसान से मिलना चाहता है तो भगवान बीच में आ जाता है और धर्म बीच में आ जाता है लेकिन लोग भूल जाते हैं कि इंसानियत का धर्म सभी धर्मों से ऊपर है। यह एक क्लासिक कोर्ट रूम ड्रामा है जो दोषी के इरादों और हत्या के रहस्य से पर्दा उठाता है।
न्याय की देवी बन एक घंटा खड़ी रही फरहीन शेख
नाटक के दौरान पूरे एक घंटा तक आंखों पर काली पट्टी बांध बाएं हाथ में इंसाफ का तराजू और दाएं हाथ में तलवार लिए खड़ी रही। बात कर रहे हैं पीयू की एमए की मासकॉम की छात्रा फरहीन शेख की। वह हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की रहने वाली है। फरहीन शेख ने बताया कि वह मेडिटेशन करती हैं। इसी से ही एकाग्रता आती है।
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तीन घंटे के मेहनत से बनाया नाटक का सेट
सृजन आर्ट के निर्देशक ज्योति स्वरूप भारद्वाज ने बताया कि तीन घंटे की मेहनत से नाटक का सेट तैयार किया। इसके लिए कोर्ट के फैसले और मुकदमों की अखबारों में छपी खबरों की कटिंग का इस्तेमाल किया गया था।
इन कलाकारों ने निभाई भूमिका
दृष्टि आजाद वकील की भूमिका में, फरहीन शेख ने न्याय की देवी, राज कटारिया जज और ज्योति स्वरूप भारद्वाज ने आरोपी की भूमिका निभाई। चिरायु भारद्वाज लाइट्स पर थे। अंकिता कोहली और गौरव रंगरेज ने सेट डिजाइन की जिम्मेदारी निभाई। कनिका, मीनाक्षी, रोहित, कार्तिक, ईशु, अंगराज कर्ण और रोशन बैकस्टेज में काम किया। अक्षय प्रोडक्शन इंचार्ज रहे।
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नाटक में दिखाया गया कि कई बार बाहर की दुनिया में घटित होने वाली अनेक घटनाएं हमें अंदर से झकझोर देती हैं। इससे हमारा ईश्वर से विश्वास उठ जाता है। हम अपने कर्मों को ईश्वर पर थोप देते हैं। यह नाटक कई प्रश्न उठाता है जैसे ईश्वर का स्वरूप क्या है। धर्म का स्वरूप, आस्तिकता, नास्तिकता क्या है। जब भी कोई इंसान किसी दूसरे इंसान से मिलना चाहता है तो भगवान बीच में आ जाता है और धर्म बीच में आ जाता है लेकिन लोग भूल जाते हैं कि इंसानियत का धर्म सभी धर्मों से ऊपर है। यह एक क्लासिक कोर्ट रूम ड्रामा है जो दोषी के इरादों और हत्या के रहस्य से पर्दा उठाता है।
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न्याय की देवी बन एक घंटा खड़ी रही फरहीन शेख
नाटक के दौरान पूरे एक घंटा तक आंखों पर काली पट्टी बांध बाएं हाथ में इंसाफ का तराजू और दाएं हाथ में तलवार लिए खड़ी रही। बात कर रहे हैं पीयू की एमए की मासकॉम की छात्रा फरहीन शेख की। वह हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की रहने वाली है। फरहीन शेख ने बताया कि वह मेडिटेशन करती हैं। इसी से ही एकाग्रता आती है।
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तीन घंटे के मेहनत से बनाया नाटक का सेट
सृजन आर्ट के निर्देशक ज्योति स्वरूप भारद्वाज ने बताया कि तीन घंटे की मेहनत से नाटक का सेट तैयार किया। इसके लिए कोर्ट के फैसले और मुकदमों की अखबारों में छपी खबरों की कटिंग का इस्तेमाल किया गया था।
इन कलाकारों ने निभाई भूमिका
दृष्टि आजाद वकील की भूमिका में, फरहीन शेख ने न्याय की देवी, राज कटारिया जज और ज्योति स्वरूप भारद्वाज ने आरोपी की भूमिका निभाई। चिरायु भारद्वाज लाइट्स पर थे। अंकिता कोहली और गौरव रंगरेज ने सेट डिजाइन की जिम्मेदारी निभाई। कनिका, मीनाक्षी, रोहित, कार्तिक, ईशु, अंगराज कर्ण और रोशन बैकस्टेज में काम किया। अक्षय प्रोडक्शन इंचार्ज रहे।