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रिटायर्ड जस्टिस से खास बातचीत, बोले- सादे कागज पर दें शिकायत, होगी मानवाधिकारों की रक्षा
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 31 May 2018 03:47 PM IST
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रिटायर्ड जस्टिस एसके मित्तल
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मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ही मानवाधिकार आयोग बनाया गया है और यहां बिना फीस सादे कागज पर शिकायत सौंपी जा सकती है। हालांकि नागरिकों को झूठी शिकायतें दर्ज करने से बचकर अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करना चाहिए। अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन जस्टिस एसके मित्तल ने मानवाधिकारों को लेकर चर्चा के दौरान यह बात कही। जस्टिस मित्तल ने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आयोग आने वालों की संख्या अभी संतोषजनक नहीं है और इसका कारण जानकारी का अभाव है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से आयोग में दस्तक देने वालों की संख्या कम है और उनके बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जस्टिस मित्तल ने कहा कि आयोग का गठन लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है और बिना किसी झिझक सादे कागज पर अपनी शिकायत लिखें और इसे आयोग को भेज दें। यहां पर अपनी पैरवी खुद कर सकते हैं और साथ ही यहां शिकायत भेजने और अपने केस की सुनवाई के लिए किसी प्रकार की फीस का भुगतान भी नहीं करना पड़ता है।
आयोग के समक्ष 25 सौ मामले लंबित
वर्तमान में लंबित मामलों की संख्या 2500 के करीब है। जस्टिस मित्तल ने बताया कि अभी उन्हें आयोग का पद संभाले महीने भर हुआ है और इस दौरान उन्होंने 700 के करीब मामलों का निपटारा कर दिया है। आयोग के स्वत: संज्ञान लेने की शक्ति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि आयोग लगातार प्रबंधन पर निगरानी रखता है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और न ही उनके अधिकारों का हनन हो। जस्टिस मित्तल ने कहा कि अधिकारियों को यह डर होना चाहिए कि यदि वे अपना कार्य सही प्रकार से नहीं करेंगे तो उसकी निगरानी करने वाले भी मौजूद हैं।
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झूठी शिकायतों से बचें
जस्टिस मित्तल ने कहा कि बड़ी संख्या में आयोग में शिकायतें पहुंचती हैंऔर उनका निपटारा भी किया जाता है लेकिन ऐसे मामले भी पहुंच रहे हैं जहां शिकायतें झूठी पाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए खड़ा होना जरूरी भी है और सही भी लेकिन आयोग को ढाल बनाकर अधिकारियों को परेशान करने से बचें। ऐसा करने पर शिकायतकर्ता खुद मुश्किल में पड़ सकते हैं।
गुड़गांव, फरीदाबाद से ज्यादा शिकायतें
जस्टिस मित्तल से पूछा गया कि आखिर कौन से ऐसे क्षेत्र हैं जहां से मानवाधिकार हनन की सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं। इस पर चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। फरीदाबाद, गुरुग्राम सहित दक्षिण हरियाणा से शिकायतें ज्यादा आती हैं, जो हरियाणा के सबसे ज्यादा विकसित क्षेत्रों में गिना जाता है। हालांकि इस क्षेत्र से ज्यादा शिकायतें आने का कारण मानवाधिकारों का हनन अधिक होना ही नहीं हो सकता यह भी हो सकता है कि यहां जागरूकता का स्तर अधिक है। इसके लिए एक स्टडी की जानी चाहिए कि आखिर किस क्षेत्र में किस प्रकार के मानवाधिकारों का हनन हो रहा है और उसके कारण क्या हैं।
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उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से आयोग में दस्तक देने वालों की संख्या कम है और उनके बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जस्टिस मित्तल ने कहा कि आयोग का गठन लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है और बिना किसी झिझक सादे कागज पर अपनी शिकायत लिखें और इसे आयोग को भेज दें। यहां पर अपनी पैरवी खुद कर सकते हैं और साथ ही यहां शिकायत भेजने और अपने केस की सुनवाई के लिए किसी प्रकार की फीस का भुगतान भी नहीं करना पड़ता है।
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आयोग के समक्ष 25 सौ मामले लंबित
वर्तमान में लंबित मामलों की संख्या 2500 के करीब है। जस्टिस मित्तल ने बताया कि अभी उन्हें आयोग का पद संभाले महीने भर हुआ है और इस दौरान उन्होंने 700 के करीब मामलों का निपटारा कर दिया है। आयोग के स्वत: संज्ञान लेने की शक्ति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि आयोग लगातार प्रबंधन पर निगरानी रखता है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि नागरिकों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और न ही उनके अधिकारों का हनन हो। जस्टिस मित्तल ने कहा कि अधिकारियों को यह डर होना चाहिए कि यदि वे अपना कार्य सही प्रकार से नहीं करेंगे तो उसकी निगरानी करने वाले भी मौजूद हैं।
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झूठी शिकायतों से बचें
जस्टिस मित्तल ने कहा कि बड़ी संख्या में आयोग में शिकायतें पहुंचती हैंऔर उनका निपटारा भी किया जाता है लेकिन ऐसे मामले भी पहुंच रहे हैं जहां शिकायतें झूठी पाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए खड़ा होना जरूरी भी है और सही भी लेकिन आयोग को ढाल बनाकर अधिकारियों को परेशान करने से बचें। ऐसा करने पर शिकायतकर्ता खुद मुश्किल में पड़ सकते हैं।
गुड़गांव, फरीदाबाद से ज्यादा शिकायतें
जस्टिस मित्तल से पूछा गया कि आखिर कौन से ऐसे क्षेत्र हैं जहां से मानवाधिकार हनन की सबसे ज्यादा शिकायतें आती हैं। इस पर चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। फरीदाबाद, गुरुग्राम सहित दक्षिण हरियाणा से शिकायतें ज्यादा आती हैं, जो हरियाणा के सबसे ज्यादा विकसित क्षेत्रों में गिना जाता है। हालांकि इस क्षेत्र से ज्यादा शिकायतें आने का कारण मानवाधिकारों का हनन अधिक होना ही नहीं हो सकता यह भी हो सकता है कि यहां जागरूकता का स्तर अधिक है। इसके लिए एक स्टडी की जानी चाहिए कि आखिर किस क्षेत्र में किस प्रकार के मानवाधिकारों का हनन हो रहा है और उसके कारण क्या हैं।