फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   How 'grounded' Sakshi carved sporting history

3 महीने तक न कोच मिला न विदेशी ट्रेनिंग, फिर भी इतिहास की 'साक्षी'

Wed, 24 Aug 2016 11:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Updated Wed, 24 Aug 2016 11:10 AM IST
विज्ञापन
How 'grounded' Sakshi carved sporting history
साक्षी मलिक - फोटो : PTI
ओलंपिक क्वालिफायर की तैयारियों से लेकर रियो जाने तक साक्षी मलिक ने विषम परिस्थितियों में अभ्यास किया। पहले तीन महीने तक कोच नहीं मिला। किसी तरह कोच मिला तो विदेश में ट्रेनिंग तक नहीं दी। ऐसी चुनौतियों से पार पाकर साक्षी ने देश के लिए रियो ओलंपिक में पहला मेडल जीता।
विज्ञापन


जब ओलंपिक क्वालिफायर का दौर शुरू हुआ तो सर छोटूराम स्टेडियम से कुश्ती कोच का तबादला पानीपत हो गया। दिसंबर 2015 में कोच का तबादला होने के बाद वहां कोच की तैनाती नहीं हुई तो पहलवानों को प्रैक्टिस में परेशानी होने लगी। सीनियर खिलाड़ी ही प्रैक्टिस कराते थे, इससे खेल जारी रहे। साक्षी मलिक समेत कई पहलवान जब खेलमंत्री अनिल विज के पास तक पहुंचे तो उन्होंने भी उस समय कोई तवज्जो नहीं दी।
विज्ञापन


बाद में जिला स्तर के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कुश्ती कोच की तैनाती हुई। तीन महीने तक कोच नहीं होने के बावजूद साक्षी ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। उसके बाद भी समस्याएं खत्म नहीं हुईं। ओलंपिक में विदेशियों के दांवपेंच इस्तेमाल कर सके, उसके लिए प्रैक्टिस करने को पुरुष पहलवानों को जार्जिया भेजा गया। महिला पहलवानों को साई सेंटर सोनीपत में प्रैक्टिस कराई गई। प्रैक्टिस में बाधाएं आने के बाद भी साक्षी ने हार नहीं मानी और रियो ओलंपिक में देश के लिए पहला मेडल जीता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रेलवे करेगा प्रमोशन, सरकार देगी ढाई करोड़ व नौकरी

How 'grounded' Sakshi carved sporting history
साक्षी मलिक - फोटो : PTI
साक्षी मलिक के ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतते ही तोहफों की बरसात होने लगी है। रेलवे में कार्यरत साक्षी मलिक का प्रमोशन करने की बात अधिकारी कह रहे है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं खेल नीति के तहत हरियाणा सरकार ने साक्षी को ढाई करोड़ रुपये और सरकारी नौकरी देने की बात कही है। साक्षी चाहे तो रेलवे की जगह प्रदेश सरकार की नौकरी को अपना सकती है।

साक्षी मलिक के गुरु और खेल विभाग में जिला खेल अधिकारी रहे ईश्वर सिंह दहिया भी साक्षी से काफी प्रभावित हैं। वह कहते हैं कि उन्होंने साक्षी को कुश्ती का क, ख, ग... सिखाया है और उनको शुरुआत में दिख गया था कि साक्षी कुछ कर सकती है। वह हर परिस्थितियों में बेहतर खेल सकती है। महिला पहलवानों को न विदेश में ट्रेनिंग कराई गई और न ही विशेष कोचिंग दी गई। उसके बावजूद उसने मेडल जीता है जो उसकी हिम्मत और विषम परिस्थितियों में खेलने का जज्बा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed