एक डोली उठनी थी, उठ गए 8 जनाजे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिस घर में चार दिन बाद ही शहनाइयां बजनीं थीं, उस घर के आठ लोगों की मौत के बाद उन्हें एक साथ कफन नसीब हुआ। ढल्ला गांव के मंगल सिंह के परिवार में 10 सितंबर को तय उसकी बेटी मोना की शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन कुदरत को शायद कुछ और ही मंजूर था। अनहोनी से बेखबर पूरा परिवार शुक्रवार रात सो तो गया, मगर उन्हें मौत मिली।
किसी को क्या पता था कि बेटी के हाथों में मेहंदी लगने से पहले ही परिवार काल के गाल में समा जाएगा। शनिवार को 20 वर्षीय मोना कोतेल चढ़ाने की परंपरा निभाई जानी थी, लेकिन हादसे के बाद शनिवार को यहां शवों के अंतिम संस्कार की तैयारियां की गईं। ग्रामीणों ने बताया कि मंगल सिंह की तीन बेटियों की शादी हो चुकी थी।
अब सिर्फ मोना को ही उन्हें विदा करना था। शुक्रवार रात मोना की शादी के बारे में सलाह-मशविरा करने के बाद ही सभी मकान के एक ही हिस्से में सो गए थे।
दूसरी तरफ इस हादसे में बची महिला सरबजीत कौर को हादसे का कोई इल्म नहीं है। उधर, गांव के कुछ लोग हादसे का जिम्मेदार गरीबी को मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर मंगल सिंह की माली हालत ठीक होती तो ऐसे हादसे की नौबत नहीं आती।
तीन दिन से लगातार बारिश
पंजाब के बटाला जिले में शहनाई के बीच एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत हो गई। घटना के वक्त पूरा परिवार सो रहा था। हादसे में परिवार की एक मात्र महिला सदस्य बची है। गंभीर रूप से घायल हालत में उसे स्थानीय सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया है।
क्षेत्र में तीन दिन से लगातार हो रही बारिश के बीच शुक्रवार रात भी बरसात का सिलसिला नहीं थमा। इसी दौरान गांव के मंगल सिंह के जर्जर मकान की छत धराशाई हो गई। बावजूद इसके किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। लोगों को हादसे का पता शनिवार सुबह चला, तो सभी अवाक रह गए।
रात को सोए, सोते ही रह गए
लोगों ने देखा की मंगल सिंह के मकान की छत ढहने से परिवार के सभी सदस्य मलबे में दबे हैं। कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। लोग सामूहिक प्रयास से मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने में जुट गए।
उन्होंने मलबे से 56 वर्षीय मंगल सिंह, 48 वर्षीय तोशी पत्नी मंगल सिंह, 20 वर्षीय मोना पुत्री मंगल सिंह, 28 वर्षीय बिक्रम सिंह पुत्र मंगल सिंह, तीन वर्षीय अंशदीप पुत्र बिक्रम सिंह, 20 वर्षीय थोमस सिंह पुत्र मंगल सिंह, 15 वर्षीय अंजू बाला पुत्री तरसेम सिंह, छह वर्षीय आंचल पुत्री विक्की को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
मलबे में दबी परिवार की एक मात्र सदस्य 26 वर्षीय सरबजीत कौर पत्नी बिक्रम सिंह की सांसें चल रही थीं। उसे ग्रामीणों ने गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया। ग्रामीणों के मुताबिक सभी मृतक मकान के एक ही हिस्से में सो रहे थे।
शहनाई में दब गई चीखें
मंगल सिंह के रिश्तेदार और पड़ोसी सभी सदमे में हैं। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि मंगल सिंह के परिवार में एक मात्र बहू सरबजीत कौर पत्नी बिक्रम सिंह को छोड़ और कोई नहीं बचा।
शनिवार को मलबे से शवों को निकालने के दौरान मौके पर जुटे लोगों में शामिल महिलाओं ने विलाप करना शुरू कर दिया। भारी भीड़ के बीच महिलाओं के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बताया जाता है कि शुक्रवार रात गांव में ही किसी के घर में शादी समारोह का आयोजन था।
रात को डीजे और आतिशबाजी की आवाज तथा बारिश के कारण हादसा कब हुआ इसकी किसी को भनक तक नहीं लगी। ग्रामीणों का कहना था कि यदि हादसे का पता उन्हें रात में चला होता तो शायद उसी दौरान मलबे में रबे लोगों को बाहर निकाला जा सकता था। यदि ऐसा होता तो उनकी जान बच सकती थी।
हादसे से सिहर उठा ढल्ला गांव
शुक्रवार रात हुए हादसे से समूचा ढल्ला गांव सिहर उठा। एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत से पूरे गांव में मातम छा गया। मंगल सिंह के रिश्तेदार और पड़ोसी सभी सदमे में हैं। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि मंगल सिंह के परिवार में एक मात्र बहू सरबजीत कौर पत्नी बिक्रम सिंह को छोड़ और कोई नहीं बचा।
शनिवार को मलबे से शवों को निकालने के दौरान मौके पर जुटे लोगों में शामिल महिलाओं ने विलाप करना शुरू कर दिया। भारी भीड़ के बीच महिलाओं के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
बताया जाता है कि शुक्रवार रात गांव में ही किसी के घर में शादी समारोह का आयोजन था। रात को डीजे और आतिशबाजी की आवाज तथा बारिश के कारण हादसा कब हुआ इसकी किसी को भनक तक नहीं लगी।
ग्रामीणों का कहना था कि यदि हादसे का पता उन्हें रात में चला होता तो शायद उसी दौरान मलबे में रबे लोगों को बाहर निकाला जा सकता था। यदि ऐसा होता तो उनकी जान बच सकती थी।
सिर्फ बहू ही बची नामलेवा
इसे कुदरत का करिश्मा ही कहेंगे कि जिस छत के मलबे में दबकर एक ही परिवार के आठ लोगों की मौत हो गई, उसी मलबे में दबी परिवार की बहू सरबजीत कौर की जान बच गई। हालांकि अभी गंभीर रूप से घायल होने के कारण उसकी हालत नाजुक बताई गई है।
बटाला के सिविल अस्पताल में भर्ती सरबजीत कौर को शायद अभी इस बात की जानकारी नहीं है कि उसके परिवार के सभी सदस्य अब इस दुनिया नहीं रहे। शुक्रवार देर रात ढल्ला गांव में हुए हादसे के बाद पोस्टमार्टम के लिए सभी आठ शवों को बटाला के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया।
सूचना मिलते ही बटाला पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी घटना स्थल पर पहुंचे। इसमें एसडीएम बटाला और विधान सभा बटाला के हल्का इंचार्ज लखबीर सिंह लोधीनंगल शामिल थे। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।