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इच्छामृत्यु मांग रही ये महिला, राष्ट्रपति को लिखा पत्र, जानिए क्या है वजह
ब्यूरो/अमर उजाला, उकलाना मंडी(हरियाणा)
Updated Thu, 07 Dec 2017 05:04 PM IST
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एचआईवी संक्रमित महिला
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
देश में रहने वाली एक महिला ने इच्छामृत्यु मांगी है और इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा है। इसके पीछे की वजह जानेंगे तो चौंक जाएंगे। मामला हरियाणा का है। उकलाना मंडी के गांव भेरी अकबरपुर की एचआईवी संक्रमित महिला ने उकलाना के नायब तहसीलदार से मुलाकात कर इच्छा मृत्यु की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम पर एक पत्र सौंपा।
महिला ने उकलाना के सरकारी अस्पताल की एक नर्स, चिकित्सक और एक निजी अस्पताल के चिकित्सक पर उसकी सामान्य डिलीवरी के 15 हजार रुपये वसूलने, बंधक बनाने, उनके एचआईवी संक्रमित होने की बात सार्वजनिक करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने उकलाना पुलिस पर भी धमकाने के आरोप लगाए है। पीड़िता ने मुख्यमंत्री से भी मिलकर अपनी व्यथा सुनाने की मांग की है।
पीड़िता ने शिकायत पत्र में आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई न होने पर आत्मदाह करने की धमकी भी दी है। नायब तहसीलदार अनिल परूथी ने पीड़िता को भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायत तत्काल सरकार को भेजी जा रही है। स्थानीय सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक राजेश ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। दोनों पक्षों को बुलाया गया है।
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महिला ने उकलाना के सरकारी अस्पताल की एक नर्स, चिकित्सक और एक निजी अस्पताल के चिकित्सक पर उसकी सामान्य डिलीवरी के 15 हजार रुपये वसूलने, बंधक बनाने, उनके एचआईवी संक्रमित होने की बात सार्वजनिक करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने उकलाना पुलिस पर भी धमकाने के आरोप लगाए है। पीड़िता ने मुख्यमंत्री से भी मिलकर अपनी व्यथा सुनाने की मांग की है।
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पीड़िता ने शिकायत पत्र में आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई न होने पर आत्मदाह करने की धमकी भी दी है। नायब तहसीलदार अनिल परूथी ने पीड़िता को भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायत तत्काल सरकार को भेजी जा रही है। स्थानीय सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक राजेश ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। दोनों पक्षों को बुलाया गया है।
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पत्र में कुछ यूं लिखी अपनी व्यथा
एचआईवी संक्रमित महिला
- फोटो : सांकेतिक चित्र
नायब तहसीलदार को सौंपी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह 29 नवंबर को उकलाना के सरकारी अस्पताल में चेकअप के लिए गई थी वहां उपस्थित स्टाफ नर्स के बताया कि उसे कुछ ही घंटों बाद बच्चा पैदा होने वाला है परंतु सरकारी अस्पताल में सुविधाएं नहीं है, इसलिए वह एक प्राईवेट अस्पताल में प्रसूति करवा देगी और मात्र तीन-चार हजार का खर्चा आएगा।
वह नर्स उसे शहर के एक निजी अस्पताल में ले गई जहां उसकी डिलीवरी हो गई। मौजूद महिला चिकित्सक ने उससे बदले में 17 हजार रुपये मांगे, इतने पैसे उसके परिवार के पास नहीं थे, इस बारे में उसके परिजनों ने पूछताछ की तो चिकित्सक व अन्य स्टाफ के लोगों ने उनके साथ धक्कामुक्की की तथा उसे बंधक बनाए रखा, कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर 15 रुपये दिए तब जाकर उसे छुट्टी दी गई।
पीड़िता ने यह आरोप भी लगाए कि सरकारी नर्स, डॉक्टर व निजी अस्पताल वालों ने लोगों को यह भी बता दिया कि वह एचआईवी की संक्रमित है। यह बात मेरे गांव व आसपास के गांवों में फैल गई है, समाज मुझे घृणा की नजर से देखने लगा है।
वह नर्स उसे शहर के एक निजी अस्पताल में ले गई जहां उसकी डिलीवरी हो गई। मौजूद महिला चिकित्सक ने उससे बदले में 17 हजार रुपये मांगे, इतने पैसे उसके परिवार के पास नहीं थे, इस बारे में उसके परिजनों ने पूछताछ की तो चिकित्सक व अन्य स्टाफ के लोगों ने उनके साथ धक्कामुक्की की तथा उसे बंधक बनाए रखा, कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर 15 रुपये दिए तब जाकर उसे छुट्टी दी गई।
पीड़िता ने यह आरोप भी लगाए कि सरकारी नर्स, डॉक्टर व निजी अस्पताल वालों ने लोगों को यह भी बता दिया कि वह एचआईवी की संक्रमित है। यह बात मेरे गांव व आसपास के गांवों में फैल गई है, समाज मुझे घृणा की नजर से देखने लगा है।