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महिलाओं को होता है एचआईवी का ज्यादा खतरा
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 02 Dec 2013 01:52 PM IST
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भारतीय महिलाओं में एचआईवी संक्रमण की चपेट में आने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
यह कहना है फोर्टिस अस्पताल की कंसलटेंट गायनोकोलॉजी डा. रितंभरा भल्ला का। वे बापूधाम कालोनी में एचआईवी प्रीवेंशन एंड प्रोटेक्शन के कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रही थीं।
यह कार्यक्रम फोर्टिस अस्पताल की ओर से आयोजित किया गया था। डा. भल्ला ने कहा, ‘यह बीमारी अब महामारी का विकराल रूप ले चुकी है और हमारा फर्ज बनता है कि इस पर नकेल कसने के लिए प्रयास किए जाएं।
न सिर्फ उनके मानवाधिकारों के नाते, बल्कि उनकी जनन क्षमता के मद्देनजर भी महिलाओं को इस संक्रमण की चपेट में आने से बचाव के तौर-तरीकों और साधनों के बारे में समझ पैदा करनी होगी।
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यह भी पढ़ें- एड्स के मरीजों में टीबी होने का सबसे ज्यादा खतरा
ज्यादातर मामलों में यह संक्रमण असुरक्षित यौन संबंधों से होता है, पर करीब 20 फीसदी मरीज ड्रग के मार्फत इसकी चपेट में आते हैं’।
इस दौरान परिचर्चा में सर्वाइकल कैंसर और अन्य अनुवांशिक कैंसरों के बारे में भी विचार किया गया। यह परिचर्चा विशेष रूप से महिलाओं के लिए ही आयोजित कराई गई।
फोर्टिस अस्पताल में ब्लड बैंक टीम के अशोक कुमार ने ‘एचआईवी को लेकर जारी भ्रम और गलत अवधारणा’ विषय पर चर्चा की। इस चर्चा में सिर्फ पुरुष ही शामिल रहे।
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यह कहना है फोर्टिस अस्पताल की कंसलटेंट गायनोकोलॉजी डा. रितंभरा भल्ला का। वे बापूधाम कालोनी में एचआईवी प्रीवेंशन एंड प्रोटेक्शन के कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रही थीं।
यह कार्यक्रम फोर्टिस अस्पताल की ओर से आयोजित किया गया था। डा. भल्ला ने कहा, ‘यह बीमारी अब महामारी का विकराल रूप ले चुकी है और हमारा फर्ज बनता है कि इस पर नकेल कसने के लिए प्रयास किए जाएं।
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न सिर्फ उनके मानवाधिकारों के नाते, बल्कि उनकी जनन क्षमता के मद्देनजर भी महिलाओं को इस संक्रमण की चपेट में आने से बचाव के तौर-तरीकों और साधनों के बारे में समझ पैदा करनी होगी।
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ज्यादातर मामलों में यह संक्रमण असुरक्षित यौन संबंधों से होता है, पर करीब 20 फीसदी मरीज ड्रग के मार्फत इसकी चपेट में आते हैं’।
इस दौरान परिचर्चा में सर्वाइकल कैंसर और अन्य अनुवांशिक कैंसरों के बारे में भी विचार किया गया। यह परिचर्चा विशेष रूप से महिलाओं के लिए ही आयोजित कराई गई।
फोर्टिस अस्पताल में ब्लड बैंक टीम के अशोक कुमार ने ‘एचआईवी को लेकर जारी भ्रम और गलत अवधारणा’ विषय पर चर्चा की। इस चर्चा में सिर्फ पुरुष ही शामिल रहे।