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पेरेंट्स एक्ट के तहत ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला

Fri, 26 Jun 2015 12:58 PM IST
दविंदर पाल सिंह/अमर उजाला, मोगा
दविंदर पाल सिंह/अमर उजाला, मोगा Updated Fri, 26 Jun 2015 12:58 PM IST
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historical decision by tribunal welfare under parents act

ट्रिब्यूनल वेलफेयर ऑफ सीनियर सिटीजन-कम-उप मंडल मजिस्ट्रेट मोगा सुरिंदर कौर ने सीनियर सिटीजन मेंटिनेंस ऑफ वेलफेयर पैरेंट्स एक्ट 2007 के अंतर्गत ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए रिटायर अध्यापक के वारिस को धोखे से नाम करवाई गई संपत्ति वापस करने का आदेश दिया है।

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बच्चों को नायक बनाने वाले माता-पिता जिंदगी के मुश्किल पड़ाव में भी उनकी हर खुशी पूरी करने का प्रयास करते हैं और वह अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव में बच्चों को सहारा के रूप में देखते हैं। लेकिन सहारा बनने आई एक विधवा ने वृद्ध दंपति को बेसहारा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उसने धोखे से रिटायर अध्यापक का मकान अपने नाम करा लिया और इसके बाद उनकी देखभाल बंद कर दी।

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धोखे से अपने नाम करा ली थी प्रॉपर्टी

historical decision by tribunal welfare under parents act

धूड़कोट कलां निवासी और हाल आबाद मोहल्ला किशनपुरा रिटायर अध्यापक तारा सिंह ने ट्रिब्यूनल वेलफेयर ऑफ सीनियर सिटीजन-कम-उप मंडल मजिस्ट्रेट सुरिंदर कौर की अदालत में सीनियर सिटीजन मेंटीनेंस ऑफ वेलफेयर पेरेंट्स एक्ट 2007 के अंतर्गत अर्जी में बताया था कि बेऔलाद होने के कारण उन्होंने एक विधवा को बुढ़ापे का सहारा बनाकर पास रखा।

महिला ने धोखे से 21 फरवरी 2013 को उनका मकान अपने नाम करवा लिया और इसके बाद उनकी और उनकी पत्नी की देखभाल बंद कर दी। सेवा संभाल न होने के कारण उनकी पत्नी जसवीर कौर की मौत हो गई। इस अर्जी पर सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने मकान की धोखे से करवाई गई रजिस्ट्री (सेल डीड) रद्द करने का आदेश दिया है।

क्या है पैरेंट्स एक्ट

historical decision by tribunal welfare under parents act

डीसी परमिंदर सिंह गिल ने बताया कि अपनी औलाद से दुखी माता-पिता सीनियर सिटीजन मेंटिनेंस ऑफ वेलफेयर पैरेंट्स एक्ट 2007 के अंतर्गत संबंधित उप मंडल मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी दायर कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस एक्ट के अंतर्गत बुजुर्ग अपनी औलाद से गुजारा भत्ता लेने के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को बुढापे में औलाद बेसहारा नहीं छोड़ सकती और औलाद के लिए बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना अब कानूनी तौर पर जरूरी हो गया है।

उन्होंने बताया कि ट्रिब्यूनल के द्वारा पीड़ित बुजुर्ग को गुजारा भत्ता, भत्ता में बढातरी, आदेशों को तामील करवाना, ब्याज सहित भत्ते दिलाने आदि कार्य कराए जाते हैं।

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