फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Himofilia nine months, there were no drugs, patients protest

नौ माह से नहीं मिलीं हिमोफिलिया की दवाएं, मरीजों ने किया प्रदर्शन

Fri, 13 Jan 2017 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Fri, 13 Jan 2017 01:10 AM IST
विज्ञापन
Himofilia nine months, there were no drugs, patients protest
नौ माह से नहीं मिलीं हिमोफिलिया की दवाएं
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग हिमोफिलिया के मरीजों को पिछले 9 महीने से दवाएं उपलब्ध नहीं करा पाया है। ऐसे में राज्य में करीब 30 से 40 प्रतिशत मरीज हिमोफिलिया की जीवनरक्षक दवा न मिलने के कारण पूर्ण या आंशिक रूप से दिव्यांग की तरह जी रहे हैं। हेमोफिलिया के मरीज नौ माह से दवाएं न मिल पाने से परेशान हैं। लेकिन हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है।
विज्ञापन


हिमोफिलिया बीमारी से पीड़ित करीब 50 मरीज वीरवार को सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल में हरियाणा के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. प्रवीण गर्ग से इस अमानवीय तकलीफ के खिलाफ शिकायत करने पहुंचे। गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों ने स्वास्थ्य महानिदेशक प्रवीण को बताया कि हरियाणा सरकार ने मार्च 2016 में हिमोफिलिया से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये बजट प्रस्तावित किए थे। इसके बावजूद पिछले 9 महीने से हिमोफिलिया के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग दवाएं उपलब्ध नहीं करा पाया। इसके चलते मरीजों की स्थित गंभीर है।
विज्ञापन


मरीजों ने महानिदेशक के जरिये हरियाणा स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री से दरकार लगाई है कि हरियाणा के सभी जिला अस्पतालों में हिमोफिलिया मरीजों के लिए ‘कैरियर डिटेक्शन टेस्ट’ की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा हिमोफिलिया के मरीजों के लिए अस्पतालों में अलग से फिजीयोथैरेपी वार्ड बनाया जाए। ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। उन्होंने बताया कि मार्केट में क्लॉटिंग फैक्टर के इंजेक्शन की कीमत बहुत अधिक होने से इलाज में आने वाला खर्च अधिक है। इस पर कोर्ट ने जनहित याचिका के फैसले के बाद से क्लॉटिंग फैक्टर के इंजेक्शन जिला अस्पतालों में उपलब्ध कराए जा रहे थे। लेकिन जून 2016 से लेकर अब तक मरीजों को दवाएं उपलब्ध नहीं हुईं। इस कारण हिमोफिलिया के मरीजों की जान जोखिम में है।
विज्ञापन
विज्ञापन

हिमोफिलिया क्या है?

Himofilia nine months, there were no drugs, patients protest
नौ माह से नहीं मिलीं हिमोफिलिया की दवाएं
मरीजों ने स्वास्थ्य महानिदेशक से कहा कि पूरे हरियाणा में हेमोफिलिया के करीब 600 मरीज है। लेकिन सरकार कागजों में सिर्फ 467 मरीज ही दर्ज किए हुए है। इस संदर्भ में सरकार को हिमोफिलिया के मरीजों की लगातार बढ़ रही संख्या को देखते हुए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं, मरीजों ने डा. प्रवीण गर्ग से कहा कि जिस प्रकार टीबी, एड्स व अन्य रोगों के बारे में सरकार समय समय पर जागरूक अभियान चलाती है। इसी प्रकार हिमोफिलिया के मरीजों व अन्य लोगों को जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियाना चलाया जाना चाहिए।

हिमोफिलिया क्या है
हिमोफिलिया एक आनुवंशिक रोग है। जिसमें शरीर के अंदर या शरीर के बाहर रक्तप्रस्वाव शुरू हो जाता है। इस हिमोफिलिया रोग में सबसे भयावह रूप यह है कि शरीर के अंदर रक्तप्रस्वाव बिना किसी कारण के भी शुरू हो जाता है। इस रोग में चोट लगने पर यह रोग जानलेवा साबित हो सकता है। या फिर पूर्ण रूप से विकलांग भी हो सकता है।

 सरकार हिमोफिलिया मरीजों को केवल तीन माह तक रख पाई ध्यान
दरअसल, हरियाणा सरकार ने 2016 में विधानसभा की बैठक में हिमोफिलिया से पीड़ित मरीजों के लिए 5 करोड़ रुपये प्रस्तातिव किए थे। सरकार द्वारा हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग को मार्च 2016 में इसके लिए 5 करोड़ रुपये दिए गए थे। लेकिन हरियाणा सरकार व स्वास्थ्य विभाग मरीजों का केवल तीन माह तक ही ध्यान रख सकी। जून 2016 से लेकर अब तक हिमोफिलिया के मरीज क्लाटिंग फैक्ट इंजैक्शन व अन्य दवाईंया उपलब्ध करवाए जाने को लेकर दर-दर भटकते नजर आ रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed