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चंडीगढ़ को नियमों में संशोधन की बलि चढ़कर ढहने नहीं दिया जाएगा: हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 19 Dec 2017 10:18 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में अपार्टमेंट के प्रावधान को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन और केंद्र सरकार को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि जैसे साउथ दिल्ली बनने केबाद ढहाया गया, वैसा हाल चंडीगढ़ का होते नहीं देखना चाहते हैं। इसलिए प्रावधानों को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने अपार्टमेंट को लेकर सुझाव व इसकी कानूनी स्थिति में अगली सुनवाई पर सभी को पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।
सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट में एमिक्स क्यूरी ने कहा कि हरियाणा में हुडा ने अपार्टमेंट मामले का हल निकाल लिया, परंतु अभी तक चंडीगढ़ इस मामले का हल नहीं निकाल पाया। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि लगातार प्रतिशत के आधार पर प्रापर्टी को बांटने को लेकर विवाद होता आ रहा है। अदालतों में इस प्रकार के मामले बढ़ते जा रहे हैं। क्या कोई ऐसा प्रावधान है जिससे इन मामलों की संख्या को कम किया जा सके। इस दौरान हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से उनका पक्ष पूछा।
यूटी प्रशासन ने कहा कि वे अभी भी अपार्टमेंट के खिलाफ हैं और इंडीव्यूजवल यूनिट का समर्थन करते हैं। कोर्ट ने कहा कि सिटी ब्यूटीफुल में जिस प्रकार अपार्टमेंट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है उससे स्थिति विकट हो सकती है। वैसे भी यदि कोई व्यक्ति अपनी प्रापर्टी के बारे में निर्णय लेता है और उसे आवश्यकता के समय बेचना चाहता है तो उसे कैसे रोका जा सकता है। इस मामले को लेकर सेक्टर-10 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से उसके सचिव और अन्य सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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याचिका में बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों से सेक्टर-10 सहित कई जगहों पर रिहाइशी प्लॉट्स का अवैध तरीके से निर्माण कर उन्हें अपार्टमेंट्स के तौर पर आगे बेचा जा रहा है। यह न सिर्फ चंडीगढ़ के मास्टर प्लान के खिलाफ है, बल्कि प्रशासन के कई बायलॉज और निर्देशों का उल्लंघन भी है। अगर अपार्टमेंट के प्रावधान को मंजूरी दी गई है तो इससे शहर के इंफ्रास्ट्रर पर बोझ काफी बढ़ जायेगा, क्योंकि जब एक ही प्लॉट्स की अगल-अलग मंजिल को अलग-अलग लोगों को बेचा जायेगा तो उस जगह पर जनसँख्या का घनत्व काफी बढ़ जायेगा।
ग्राउंड फ्लोर को पार्किंग बना इसके ऊपर तीन मंजिल का है प्रस्ताव
मामले की सुनवाई के दौरान पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल को लेकर और उसके हिस्से को लेकर विभिन्न तरह की दलीलें दी गई। इस दौरान कहा गया कि दिल्ली में भी अब ग्राउंड फ्लोर को पार्र्किंग के तौर पर रखने तथा ऊपर एक मंजिल को बढ़ाने की अनुमति हो गई है। ऐसे में अब यूटी में भी इसी तर्ज पर काम किया जाना जरूरी हो गया है क्योंकि पार्किंग की समस्या तेजी से बढ़ रही इन मु्द्दों को लेकर अगली सुनवाई पर सुझाव आने हैं।
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सुनवाई आरंभ होते ही हाईकोर्ट में एमिक्स क्यूरी ने कहा कि हरियाणा में हुडा ने अपार्टमेंट मामले का हल निकाल लिया, परंतु अभी तक चंडीगढ़ इस मामले का हल नहीं निकाल पाया। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि लगातार प्रतिशत के आधार पर प्रापर्टी को बांटने को लेकर विवाद होता आ रहा है। अदालतों में इस प्रकार के मामले बढ़ते जा रहे हैं। क्या कोई ऐसा प्रावधान है जिससे इन मामलों की संख्या को कम किया जा सके। इस दौरान हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से उनका पक्ष पूछा।
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यूटी प्रशासन ने कहा कि वे अभी भी अपार्टमेंट के खिलाफ हैं और इंडीव्यूजवल यूनिट का समर्थन करते हैं। कोर्ट ने कहा कि सिटी ब्यूटीफुल में जिस प्रकार अपार्टमेंट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है उससे स्थिति विकट हो सकती है। वैसे भी यदि कोई व्यक्ति अपनी प्रापर्टी के बारे में निर्णय लेता है और उसे आवश्यकता के समय बेचना चाहता है तो उसे कैसे रोका जा सकता है। इस मामले को लेकर सेक्टर-10 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से उसके सचिव और अन्य सदस्यों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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याचिका में बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों से सेक्टर-10 सहित कई जगहों पर रिहाइशी प्लॉट्स का अवैध तरीके से निर्माण कर उन्हें अपार्टमेंट्स के तौर पर आगे बेचा जा रहा है। यह न सिर्फ चंडीगढ़ के मास्टर प्लान के खिलाफ है, बल्कि प्रशासन के कई बायलॉज और निर्देशों का उल्लंघन भी है। अगर अपार्टमेंट के प्रावधान को मंजूरी दी गई है तो इससे शहर के इंफ्रास्ट्रर पर बोझ काफी बढ़ जायेगा, क्योंकि जब एक ही प्लॉट्स की अगल-अलग मंजिल को अलग-अलग लोगों को बेचा जायेगा तो उस जगह पर जनसँख्या का घनत्व काफी बढ़ जायेगा।
ग्राउंड फ्लोर को पार्किंग बना इसके ऊपर तीन मंजिल का है प्रस्ताव
मामले की सुनवाई के दौरान पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल को लेकर और उसके हिस्से को लेकर विभिन्न तरह की दलीलें दी गई। इस दौरान कहा गया कि दिल्ली में भी अब ग्राउंड फ्लोर को पार्र्किंग के तौर पर रखने तथा ऊपर एक मंजिल को बढ़ाने की अनुमति हो गई है। ऐसे में अब यूटी में भी इसी तर्ज पर काम किया जाना जरूरी हो गया है क्योंकि पार्किंग की समस्या तेजी से बढ़ रही इन मु्द्दों को लेकर अगली सुनवाई पर सुझाव आने हैं।