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अलॉट भूमि पर उद्योग की जगह काटी कॉलोनी: हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से मांगा जवाब, लुधियाना का है मामला
Sat, 08 Feb 2025 10:13 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 08 Feb 2025 10:13 AM IST
सार
लुधियाना निवासी रविंदर कटारिया ने एडवोकेट दीपक अरोड़ा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उद्योग विभाग ने मान एंड महावीर स्पिनिंग एंड जनरल मिल्स को ढंडारीकलां में 1994 में 60 एकड़ भूमि औद्योगिक मकसद से अलॉट की थी।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वर्धमान एंड महावीर स्पिनिंग एंड जनरल मिल्स लुधियाना को औद्योगिक उद्देश्य के लिए दी गई भूमि पर रिहायशी कॉलोनी स्थापित करने व तय भूमि से अधिक अलॉटमेंट को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी रविंदर कटारिया ने एडवोकेट दीपक अरोड़ा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उद्योग विभाग ने मान एंड महावीर स्पिनिंग एंड जनरल मिल्स को ढंडारीकलां में 1994 में 60 एकड़ भूमि औद्योगिक मकसद से अलॉट की थी। इसे बाद में 68 एकड़ कर दिया गया था, लेकिन वर्धमान पॉलिटेक्स लिमिटेड ने इस भूमि में से 19.42 एकड़ पर नगर निगम से सीएलयू लेकर रिहायशी कॉलोनी बसा दी।
याची ने कहा कि वर्धमान पॉलिटेक्स तो अलॉटी भी नहीं था, ऐसे में किस प्रकार उसे इस उद्देश्य के लिए सीएलयू जारी कर दिया गया। साथ ही उद्योग के लिए दी गई भूमि का कैसे रिहायशी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी बताया कि भूमि उद्योग स्थापित करने के लिए दी गई थी, लेकिन वहां पर कोई उद्योग आज तक स्थापित ही नहीं किया गया। साथ ही कागजों में जो भूमि 68 एकड़ दिखाई गई है असल में वह 71.3 एकड़ है। ऐसे में करोड़ों की जमीन का बिना किसी भुगतान के कंपनी इस्तेमाल कर रही है।
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याची ने इस बारे में सरकार को मांगपत्र भी दिया था, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई पर बताया जाए कि भूमि पर उद्योग है या नहीं।
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याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी रविंदर कटारिया ने एडवोकेट दीपक अरोड़ा के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि उद्योग विभाग ने मान एंड महावीर स्पिनिंग एंड जनरल मिल्स को ढंडारीकलां में 1994 में 60 एकड़ भूमि औद्योगिक मकसद से अलॉट की थी। इसे बाद में 68 एकड़ कर दिया गया था, लेकिन वर्धमान पॉलिटेक्स लिमिटेड ने इस भूमि में से 19.42 एकड़ पर नगर निगम से सीएलयू लेकर रिहायशी कॉलोनी बसा दी।
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याची ने कहा कि वर्धमान पॉलिटेक्स तो अलॉटी भी नहीं था, ऐसे में किस प्रकार उसे इस उद्देश्य के लिए सीएलयू जारी कर दिया गया। साथ ही उद्योग के लिए दी गई भूमि का कैसे रिहायशी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी बताया कि भूमि उद्योग स्थापित करने के लिए दी गई थी, लेकिन वहां पर कोई उद्योग आज तक स्थापित ही नहीं किया गया। साथ ही कागजों में जो भूमि 68 एकड़ दिखाई गई है असल में वह 71.3 एकड़ है। ऐसे में करोड़ों की जमीन का बिना किसी भुगतान के कंपनी इस्तेमाल कर रही है।
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याची ने इस बारे में सरकार को मांगपत्र भी दिया था, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई पर बताया जाए कि भूमि पर उद्योग है या नहीं।