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बर्खास्तगी मुद्दे पर शिक्षकों को कोर्ट ने दी राहत

Sat, 25 Apr 2015 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 25 Apr 2015 12:20 AM IST
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high court relief to teachers in dismiss issue

हरियाणा में साल 2010 में जेबीटी भर्ती के लिए हुई अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट) में फर्जी पाए गए 776 अभ्यर्थियों को बर्खास्त करने के मामले में सरकार ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया।

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बर्खास्तगी की नोटिस के खिलाफ कुछ शिक्षकों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। अब उन्हें मामले में स्टे आर्डर मिल गया है। ऐसे में अभी कार्रवाई रुकी हुई है। स्टे आर्डर पर सुनवाई अब 13 मई को होगी। दूसरी ओर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई 18 मई तक के लिए स्थगित कर दी।
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सरकार को आदेश जारी कर फर्जी अभ्यर्थियों को बर्खास्त करने को कहा गया था। इसके लिए इन अभ्यर्थियों को पहले नोटिस देने का निर्देश दिया गया। इसी मामले में हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। इसी पर सरकार ने शुक्रवार को अपना जवाब दाखिल किया।
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शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई को प्रमुख सचिव शिक्षा ने हरी झंडी दी थी। डायरेक्टर एलिमेंटरी एजुकेशन ने हाईकोर्ट को बताया था कि प्रमुख सचिव से कार्रवाई की अनुमति मांगी गई थी। पूछा था कि फर्जी पाए गए 776 अभ्यर्थियों को बर्खास्त किया जाए या एफआईआर भी दर्ज कराई जाए।

जिन 216 फर्जी अभ्यर्थियों ने जेबीटी की नौकरी छोड़ दी, उनके खिलाफ कैसी कार्रवाई की जाए। साथ ही तीन अनुपस्थित उम्मीदवारों पर कार्रवाई कैसे की जाए। हाईकोर्ट को बताया था कि प्रमुख सचिव से बुधवार को ही प्राप्त पत्र में कहा गया है कि 776 को 15 दिन के भीतर नोटिस दिया जाए कि उनके खिलाफ अंगूठों के मिलान की रिपोर्ट पर उनका क्या कहना है। उन पर अगले 15 दिनों में कार्रवाई भी की जाए।

हाईकोर्ट को बताया गया था कि सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को कार्रवाई के संबंध में पत्र गए भेजे थे। सभी फर्जी अभ्यर्थियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। परीक्षा में शामिल 6060 फर्जी अभ्यर्थियों के सैंपल लैब भेजे गए थे। शिक्षक पात्रता परीक्षा में आठ हजार से अधिक परीक्षार्थियों में से केवल 1101 के ही अंगूठों के निशानों का मिलान हो पाया था।


इसी कारण हाईकोर्ट ने रिपोर्ट मांगी थी। जेबीटी के लिए सरकार ने नौ हजार पदों के लिए आवेदन मांगे थे। इनमें से 8325 का चयन हुआ था, जिसमें फर्जी अभ्यर्थियों भी शामिल थे। भर्ती से वंचित रहे अभ्यर्थियों ने एडवोकेट जसबीर मोर और जगबीर मलिक के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

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