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चंडीगढ पर दावा करने में आगे, पर जिम्मेदारी निभाने में पीछे हैं हरियाणा और पंजाब: हाईकोर्ट
Tue, 03 Dec 2019 12:00 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 03 Dec 2019 12:00 PM IST
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सुखना झील
- फोटो : अमर उजाला
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सूखती जा रही सुखना लेक के कैचमेंट एरिया में पंजाब और हरियाणा की ओर हो रहे अवैध निर्माणों पर हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा दोनों राज्य सरकारों को फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों राज्य चंडीगढ़ पर अपना अधिकार जमाने में पीछे नहीं रहते, लेकिन जब शहर की बेहतरी की बात की जाती है तो दोनों ही राज्य पीछे हट जाते हैं। सुनवाई के दौरान केस में सहयोग दे रहे वकील एमएल सरीन ने सुप्रीम कोर्ट के टाटा केमलॉट केस में जारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि टाटा केमलॉट इको-सेंसिटिव जोन और सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के दस किलोमीटर के दायरे में था।
यहां निर्माणकार्यों की इजाजत नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ की स्टैंडिंग कमेटी से ली जानी जरूरी थी, जोकि इस प्रोजेक्ट के लिए नहीं ली गई थी। सरीन ने हाईकोर्ट को बताया कि न सिर्फ टाटा केमलॉट प्रोजेक्ट बल्कि इस एरिया के अन्य निर्माणों के लिए इसी तरह ही स्टैंडिंग कमेटी से इजाजत ली जानी जरूरी थी, जोकि नहीं ली गई। सुप्रीम कोर्ट ने दायरे को घटा 100 मीटर करने की पंजाब सरकार की मांग को भी खारिज कर दिया था।
इस दौरान कैचमेंट एरिया में हुए निर्माणों को लेकर स्थानीय निवासियों ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर कहा कि उन्होंने तय प्रक्रिया के तहत निर्माण किए हैं और उनके पास बिजली व पानी के कनेक्शन भी हैं। उनके वकील ने कहा कि नयागांव मास्टर प्लान के तहत ही उनके मकान बने हैं। पंजाब सरकार ने भी यही दलील दी और कहा कि इस प्लान में साफ तय किया गया है कि कहां रिहाइशी इलाका है और कहां वन भूमि और कृषि। इसके साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया कि सुखना लेक को 1988 में ही वेटलैंड घोषित कर इसकी नोटिफिकेशन कर दी गई थी।
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अब नए कानून के तहत 26 सितंबर 2017 को एक बार फिर इसकी नोटिफिकेशन की गई है। अब इसके लिए नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसके लिए अब आपत्तियां मंगवाई गई है। नोटिफिकेशन के तहत रॉक गार्डन और लेक के बीच का फारेस्ट एरिया सहित गांव कैंबवाला, खुड्ड़ा अली शेर, कांसल और सकेतड़ी को सुखना वेटलैंड एरिया में शामिल किया गया है।
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यहां निर्माणकार्यों की इजाजत नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ की स्टैंडिंग कमेटी से ली जानी जरूरी थी, जोकि इस प्रोजेक्ट के लिए नहीं ली गई थी। सरीन ने हाईकोर्ट को बताया कि न सिर्फ टाटा केमलॉट प्रोजेक्ट बल्कि इस एरिया के अन्य निर्माणों के लिए इसी तरह ही स्टैंडिंग कमेटी से इजाजत ली जानी जरूरी थी, जोकि नहीं ली गई। सुप्रीम कोर्ट ने दायरे को घटा 100 मीटर करने की पंजाब सरकार की मांग को भी खारिज कर दिया था।
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इस दौरान कैचमेंट एरिया में हुए निर्माणों को लेकर स्थानीय निवासियों ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर कहा कि उन्होंने तय प्रक्रिया के तहत निर्माण किए हैं और उनके पास बिजली व पानी के कनेक्शन भी हैं। उनके वकील ने कहा कि नयागांव मास्टर प्लान के तहत ही उनके मकान बने हैं। पंजाब सरकार ने भी यही दलील दी और कहा कि इस प्लान में साफ तय किया गया है कि कहां रिहाइशी इलाका है और कहां वन भूमि और कृषि। इसके साथ ही चंडीगढ़ प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया कि सुखना लेक को 1988 में ही वेटलैंड घोषित कर इसकी नोटिफिकेशन कर दी गई थी।
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अब नए कानून के तहत 26 सितंबर 2017 को एक बार फिर इसकी नोटिफिकेशन की गई है। अब इसके लिए नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसके लिए अब आपत्तियां मंगवाई गई है। नोटिफिकेशन के तहत रॉक गार्डन और लेक के बीच का फारेस्ट एरिया सहित गांव कैंबवाला, खुड्ड़ा अली शेर, कांसल और सकेतड़ी को सुखना वेटलैंड एरिया में शामिल किया गया है।
हरियाणा और पंजाब अपनी ही राजधानी के लिए बन रहे परेशानी
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि चंडीगढ़ भले ही दोनों राज्यों की राजधानी है, लेकिन जब शहर के संरक्षण और अस्तित्व की बात आती है तो दोनों राज्य पीछे हट जाते हैं। दोनों राज्यों के कारण ही शहर की परेशानियां बढ़ रही हैं। निर्माण प्रतिबंधित होने के बावजूद भी सुखना कैचमेंट के हरियाणा व पंजाब एरिया में निर्माण जारी है।
हाईकोर्ट ने पूछा कि सुखना कैचमेंट एरिया क्या पंजाब और हरियाणा दोनों में आता है। कोर्ट को बताया गया कि ज्यादातर हिस्सा पंजाब में और बाकी का हरियाणा में आता है। सरीन ने गूगल मैप के हवाले से बताया कि 2011 के बाद इस एरिया में हुए बहुत से निर्माण हुए हैं। वह खुद इस एरिया का दौरा कर कई बार हाईकोर्ट को यहां लगातार जारी अवैध निर्माणों की जानकारी देते रहे हैं।
हाईकोर्ट ने पूछा कि सुखना कैचमेंट एरिया क्या पंजाब और हरियाणा दोनों में आता है। कोर्ट को बताया गया कि ज्यादातर हिस्सा पंजाब में और बाकी का हरियाणा में आता है। सरीन ने गूगल मैप के हवाले से बताया कि 2011 के बाद इस एरिया में हुए बहुत से निर्माण हुए हैं। वह खुद इस एरिया का दौरा कर कई बार हाईकोर्ट को यहां लगातार जारी अवैध निर्माणों की जानकारी देते रहे हैं।