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डिफेंस कोटे को लेकर पीयू प्रशासन को नोटिस

Mon, 30 Jun 2014 09:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 30 Jun 2014 09:11 PM IST
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high court notice for Defence quota to PU administration

पंजाब युनिवर्सिटी के इनफॉर्मेशन ब्रॉशर में यूटी पूल की सीटों के लिए पांच फीसदी आरक्षण है, लेकिन जीएमसीएच-32 में एमबीबीएस व बीडीएस की यूटी पूल की सीटों के लिए यह आरक्षण ही नहीं रखा गया, जबकि दाखिला एवं कोर्स पीयू के अधीन होते हैं।

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इससे पहले ग्रह विभाग भी पांच फीसदी सीटों के लिए पत्र जारी कर चुका है, लेकिन फिर भी यह आरक्षण नहीं दिया जा रहा।

इस संबंध में यशविका नाम की एक मेडिकल स्टूडेंट ने अपने वकील एडवोकेट जीएस घुम्मन के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पांच फीसदी आरक्षण की मांग की है। यशविका पूर्व सैनिक कोटे के तहत यह आरक्षण मांग रही हैं।
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अब हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी और ग्रह सचिव को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

यशविका ने याचिका में कहा है कि ग्रह विभाग ने सात मई 1993 के एक पत्र में स्पष्ट किया था कि यूटी के सभी शैक्षणिक, तकनीकी एवं मेडिकल संस्थानों में यूटी पूल की 85 फीसदी सीटों में बहादुरी पुरस्कार प्राप्त, युद्ध में मारे गए एवं पूर्ण तौर पर शारीरिक अयोग्य हो चुके, अर्द्घ सैनिक बलों और पूर्व सैनिकों के बच्चों, पत्नियों के लिए पांच फीसदी सीटें आरक्षित की जाएं।
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इसी पत्र के हवाले के साथ बाद में मई 1999 में कहा गया कि सामान्य वर्ग की 40 फीसदी सीटें यदि खाली रहती हैं, तो इन सीटों पर यूटी पूल में दाखिला दिया जाए। वर्ष 2003 में डिफेंस कोटे की पांच फीसदी आरक्षित सीटों में आईबी कर्मचारियों के बच्चों को भी डिफेंस कोटे में शामिल किया गया।

पंजाब यूनिवर्सिटी का इंफॉर्मेशन ब्रॉशर भी स्पष्ट करता है कि इस कोटे के लिए पांच फीसदी आरक्षण है। एडवोकेट घुम्मन ने चीफ जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अजय तिवारी की डिवीजन बेंच के समक्ष पैरवी करते हुए कहा कि पीयू पांच फीसदी आरक्षण दे रहा है और प्रशासन की नीति भी है।


इसके बावजूद जीएमसीएच ने आरक्षण नहीं रखा और न ही प्रॉस्पेक्टस में इसका जिक्र है, जबकि पीयू ही दाखिले को अंतिम रूप देता है। डिग्रियां भी इसे ही देनी हैं।

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