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शैक्षणिक योग्यता अहम: हाईकोर्ट ने कहा-न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मुआवजा तय करना गलत, ट्रिब्यूनल का आदेश बदला
Sat, 03 Jan 2026 09:38 AM IST
निवेदिता वर्मा
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 03 Jan 2026 09:38 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के लिए, जो पेशेवर करिअर की तैयारी कर रहा हो, केवल न्यूनतम मजदूरी के आधार पर आय तय करना गलत और अव्यावहारिक है। हाईकोर्ट ने माना कि ट्रिब्यूनल ने शैक्षणिक योग्यता और भविष्य की कमाई पर संभावित असर को नजरअंदाज कर गंभीर भूल की है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा निर्धारण को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि पीड़ित की शैक्षणिक योग्यता और भविष्य की आय पर संभावित असर को नजरअंदाज कर केवल न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मुआवजा तय करना गलत है।
हाईकोर्ट ने फिटर कोर्स के तीसरे सेमेस्टर के छात्र को 100 प्रतिशत दिव्यांगता के मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, चंडीगढ़ की ओर से तय मुआवजा राशि को 40,53,617 रुपये से बढ़ाकर 75,20,817 रुपये कर दिया है।
मामले में राकेश कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रिब्यूनल की ओर से तय मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए बढ़ाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि वाहन दुर्घटना में उसे 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता हो गई, जिससे उसका भविष्य पूरी तरह प्रभावित हो गया है। इसके बावजूद ट्रिब्यूनल ने उसकी आय का आकलन राज्य में लागू न्यूनतम मजदूरी के आधार पर किया, जो न केवल अव्यावहारिक है बल्कि न्यायसंगत भी नहीं है।
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दूसरी ओर, बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराते हुए मुआवजा बढ़ाने की याचिका का विरोध किया। कंपनी का कहना था कि ट्रिब्यूनल ने कानून के अनुसार मुआवजा तय किया है और इसमें किसी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के लिए, जो पेशेवर करिअर की तैयारी कर रहा हो, केवल न्यूनतम मजदूरी के आधार पर आय तय करना गलत और अव्यावहारिक है। हाईकोर्ट ने माना कि ट्रिब्यूनल ने शैक्षणिक योग्यता और भविष्य की कमाई पर संभावित असर को नजरअंदाज कर गंभीर भूल की है।
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल की ओर से तय 40,53,617 रुपये के मुआवजे में 34,67,200 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए कुल मुआवजा राशि 75,20,817 रुपये निर्धारित की। इसके साथ बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह यह राशि दो माह के भीतर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, चंडीगढ़ में जमा कराए। ट्रिब्यूनल को आदेश दिया गया है कि जमा राशि को दावाकर्ता को शीघ्र जारी किया जाए।
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हाईकोर्ट ने फिटर कोर्स के तीसरे सेमेस्टर के छात्र को 100 प्रतिशत दिव्यांगता के मामले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, चंडीगढ़ की ओर से तय मुआवजा राशि को 40,53,617 रुपये से बढ़ाकर 75,20,817 रुपये कर दिया है।
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मामले में राकेश कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रिब्यूनल की ओर से तय मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए बढ़ाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि वाहन दुर्घटना में उसे 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता हो गई, जिससे उसका भविष्य पूरी तरह प्रभावित हो गया है। इसके बावजूद ट्रिब्यूनल ने उसकी आय का आकलन राज्य में लागू न्यूनतम मजदूरी के आधार पर किया, जो न केवल अव्यावहारिक है बल्कि न्यायसंगत भी नहीं है।
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तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहा था याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि हादसे के समय वह तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहा था और फिटर कोर्स के तीसरे सेमेस्टर का छात्र था। ऐसे में उसकी संभावित आय का आकलन उसकी शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर भविष्य को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए था। इसके अलावा मुआवजा तय करते समय भविष्य की संभावनाओं और करियर पर पड़े प्रभाव पर भी कोई विचार नहीं किया गया।दूसरी ओर, बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराते हुए मुआवजा बढ़ाने की याचिका का विरोध किया। कंपनी का कहना था कि ट्रिब्यूनल ने कानून के अनुसार मुआवजा तय किया है और इसमें किसी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के लिए, जो पेशेवर करिअर की तैयारी कर रहा हो, केवल न्यूनतम मजदूरी के आधार पर आय तय करना गलत और अव्यावहारिक है। हाईकोर्ट ने माना कि ट्रिब्यूनल ने शैक्षणिक योग्यता और भविष्य की कमाई पर संभावित असर को नजरअंदाज कर गंभीर भूल की है।
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल की ओर से तय 40,53,617 रुपये के मुआवजे में 34,67,200 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए कुल मुआवजा राशि 75,20,817 रुपये निर्धारित की। इसके साथ बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह यह राशि दो माह के भीतर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, चंडीगढ़ में जमा कराए। ट्रिब्यूनल को आदेश दिया गया है कि जमा राशि को दावाकर्ता को शीघ्र जारी किया जाए।