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अनशन, आश्रम संचालक ने चौथे पानी पीना भी बंद किया
अमर उजाला/ ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 12 Sep 2014 12:36 AM IST
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लाडवा के बपदा रोड स्थित बाल अनाथ आश्रम के संचालक शीशपाल मदान का अनशन बृहस्पतिवार को चौथे दिन भी जारी रहा। चौथे दिन उन्होंने पानी का भी त्याग कर दिया।
वह आश्रम के लिए सरकार से जमीन व अनुदान की मांग कर रहे हैं। चौथे दिन प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर शीशपाल मदान से बातचीत की और अनशन खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी कोशिश असफल रही।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुमिति भास्कर काउंसलर राखी, बाल कल्याण समिति के चेयरमैन वीरेंद्र सिंह ने समस्याएं सुनी और समाधान का आश्वासन भी दिया।
बातचीत के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए सुमिति भास्कर ने बताया कि बाल अनाथ आश्रम को पहले मात्र एक वर्ष की अस्थाई मान्यता दी गई थी।
उन्होंने बताया कि अब उच्चाधिकारियों के पास तीन वर्ष की स्थायी मान्यता के लिए फाइल गई है और वह पास भी हो चुकी है।
उनका कहना है कि उनको मिलने वाले प्रमाणपत्र पर जिस अधिकारी के हस्ताक्षर होने हैं, वह छुट्टी पर हैं। जल्द ही प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।
इसके बाद अनुदान व अन्य मांगों के लिए बाल अनाथ आश्रम विभाग के पास आवेदन कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुवार को ही उनको अनशन के बारे में जानकारी मिली थी।
जिसके बाद उन्होंने यहां पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि मांगों के बारे में भी अधिकारियों को बताया दिया है।
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वहीं शीशपाल मदान का कहना था कि अनाथ बच्चों को पालने का काम सरकार का है लेकिन वह सरकार के इस कार्य को कर रहा है।
यही नहीं सरकारी अधिकारी जिस भी अनाथ बच्चे को आश्रम में छोड़कर जाते हैं, उनका भी वह पालन पोषण कर रहा है। इसके बावजूद सरकारी अधिकारी ही उनके हर काम में अड़चन लगा रहे हैं।
अब वह किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं और उनका अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं। उनके अनुसार वह लोगों के सामने हाथ पसार-पसार कर इन अनाथ बच्चों का पालन पोषण कर रहा है।
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वह आश्रम के लिए सरकार से जमीन व अनुदान की मांग कर रहे हैं। चौथे दिन प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर शीशपाल मदान से बातचीत की और अनशन खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी कोशिश असफल रही।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुमिति भास्कर काउंसलर राखी, बाल कल्याण समिति के चेयरमैन वीरेंद्र सिंह ने समस्याएं सुनी और समाधान का आश्वासन भी दिया।
बातचीत के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए सुमिति भास्कर ने बताया कि बाल अनाथ आश्रम को पहले मात्र एक वर्ष की अस्थाई मान्यता दी गई थी।
उन्होंने बताया कि अब उच्चाधिकारियों के पास तीन वर्ष की स्थायी मान्यता के लिए फाइल गई है और वह पास भी हो चुकी है।
उनका कहना है कि उनको मिलने वाले प्रमाणपत्र पर जिस अधिकारी के हस्ताक्षर होने हैं, वह छुट्टी पर हैं। जल्द ही प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।
इसके बाद अनुदान व अन्य मांगों के लिए बाल अनाथ आश्रम विभाग के पास आवेदन कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुवार को ही उनको अनशन के बारे में जानकारी मिली थी।
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जिसके बाद उन्होंने यहां पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि मांगों के बारे में भी अधिकारियों को बताया दिया है।
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वहीं शीशपाल मदान का कहना था कि अनाथ बच्चों को पालने का काम सरकार का है लेकिन वह सरकार के इस कार्य को कर रहा है।
यही नहीं सरकारी अधिकारी जिस भी अनाथ बच्चे को आश्रम में छोड़कर जाते हैं, उनका भी वह पालन पोषण कर रहा है। इसके बावजूद सरकारी अधिकारी ही उनके हर काम में अड़चन लगा रहे हैं।
अब वह किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं और उनका अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं। उनके अनुसार वह लोगों के सामने हाथ पसार-पसार कर इन अनाथ बच्चों का पालन पोषण कर रहा है।