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14 अक्टूबर को लंदन में नीलाम होगा चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर, विदेश मंत्री से रुकवाने की मांग
Sat, 10 Oct 2020 12:48 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 12:48 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social media
तमाम कोशिशों के बावजूद चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर की विदेश में खरीद-फरोख्त जारी है। बीते कुछ सालों में करोड़ों रुपये के हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी हो चुकी है। 14 अक्तूबर को लंदन में फिर चंडीगढ़ के करीब 1.50 करोड़ रुपये के हेरिटेज फर्नीचर की नीलामी होने जा रही है। हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर इस संबंध में शिकायत दी है।
अजय जग्गा ने कहा है कि चंडीगढ़ से हेरिटेज फर्नीचर की तस्करी हो रही है। स्थानीय स्तर पर इसकी चोरी रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं और इस मामले को यूएन के समक्ष भी उठाया जाए। उन्होंने कहा कि 14 अक्तूबर को नीलामी में चंडीगढ़ की 10 वस्तुएं रखी गई हैं। इनमें प्रेस कुर्सियां, नीची कुर्सियों की जोड़ी, मेज, हत्थे वाली 8 कुर्सियां, जूनियर अफसर की लिखने वाली मेज, बेंच, पब्लिक बेंच, आरामदायक कुर्सी और फोल्डिंग स्क्रीन आदि शामिल हैं।
जग्गा ने विदेश मंत्री से कार्रवाई करने की मांग की है ताकि तथ्यों की जांच कर इस नीलामी को रोका जा सके। जग्गा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2011 में चंडीगढ़ हेरिटेज फर्नीचर के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, बावजूद इसके फर्नीचर विदेश में जा रहा है और वहां नीलाम भी हो रहा है।
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कौन हैं जो विदेश ले जाकर बेच रहे चंडीगढ़ की धरोहर
जग्गा का कहना है कि चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर विदेश पहुंच कैसे रहा है, यह बड़ा सवाल है लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि हेरिटेज फर्नीचर विदेश तक कब और कैसे पहुंचा है। कौन लोग हैं, जो चंडीगढ़ के फर्नीचर को विदेश में ले जाकर करोड़ों में बेच रहे हैं।
गौरतलब है कि पियरे जेनरे चंडीगढ़ के स्विस-फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए के साथ काम करते थे। इसी कारण ली कार्बूजिए ने चंडीगढ़ में घरों, सड़कों और पार्कों की प्लानिंग से लेकर सरकारी दफ्तरों में रखी जाने वाली कुर्सियों, मेज आदि के शानदार डिजाइन की जिम्मेदारी पियरे जेनरे को दी थी। विदेश में इनके चाहने वाले मुंहमांगे दामों पर फर्नीचर खरीदते हैं।
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अजय जग्गा ने कहा है कि चंडीगढ़ से हेरिटेज फर्नीचर की तस्करी हो रही है। स्थानीय स्तर पर इसकी चोरी रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं और इस मामले को यूएन के समक्ष भी उठाया जाए। उन्होंने कहा कि 14 अक्तूबर को नीलामी में चंडीगढ़ की 10 वस्तुएं रखी गई हैं। इनमें प्रेस कुर्सियां, नीची कुर्सियों की जोड़ी, मेज, हत्थे वाली 8 कुर्सियां, जूनियर अफसर की लिखने वाली मेज, बेंच, पब्लिक बेंच, आरामदायक कुर्सी और फोल्डिंग स्क्रीन आदि शामिल हैं।
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जग्गा ने विदेश मंत्री से कार्रवाई करने की मांग की है ताकि तथ्यों की जांच कर इस नीलामी को रोका जा सके। जग्गा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2011 में चंडीगढ़ हेरिटेज फर्नीचर के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, बावजूद इसके फर्नीचर विदेश में जा रहा है और वहां नीलाम भी हो रहा है।
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कौन हैं जो विदेश ले जाकर बेच रहे चंडीगढ़ की धरोहर
जग्गा का कहना है कि चंडीगढ़ का हेरिटेज फर्नीचर विदेश पहुंच कैसे रहा है, यह बड़ा सवाल है लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि हेरिटेज फर्नीचर विदेश तक कब और कैसे पहुंचा है। कौन लोग हैं, जो चंडीगढ़ के फर्नीचर को विदेश में ले जाकर करोड़ों में बेच रहे हैं।
गौरतलब है कि पियरे जेनरे चंडीगढ़ के स्विस-फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए के साथ काम करते थे। इसी कारण ली कार्बूजिए ने चंडीगढ़ में घरों, सड़कों और पार्कों की प्लानिंग से लेकर सरकारी दफ्तरों में रखी जाने वाली कुर्सियों, मेज आदि के शानदार डिजाइन की जिम्मेदारी पियरे जेनरे को दी थी। विदेश में इनके चाहने वाले मुंहमांगे दामों पर फर्नीचर खरीदते हैं।